Monday, November 29, 2021

लाल किले की दर्द भरी दास्तां

इतिहास पुरुष

आधुनिक भारत का इतिहास

आधुनिक भारत का इतिहास, लेखक डॉ. मोहनलाल गुप्ता – अनुक्रमणिका

अध्याय अध्याय – 1 : भारत में यूरोपीय जातियों का आगमनअध्याय – 2 : अंग्रेजों के आगमन के समय भारत की राजनीतिक स्थिति -...

अध्याय – 1 : भारत में यूरोपीय जातियों का आगमन

सिकंदर के भारत में आने (523 ई.पू.) से भी बहुत पहले, रोम के एक शासक ने कहा था- 'भारतीयों के बागों में मोर, उनके...

अध्याय – 2 : अँग्रेजों के आगमन के समय भारत की राजनीतिक स्थिति – 1

अँग्रेज भारत में समुद्री मार्ग से 1608 ई. में आये। उस समय भारत में मुगल बादशाह जहाँगीर का शासन था। मुगलों की केन्द्रीय सत्ता...

साहित्य

बुढ़िया का चश्मा , (हिन्दी लघु नाटक)

प्रस्तावना बुढ़िया का चश्मा भारतीय राजनीति तथा भारत में फैले भ्रष्टाचार पर एक करारा व्यंग्य है। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद लोगों की आकांक्षाएं जिस प्रकार...

अश्वत्थामा के आँसू

हास्य व्यंग्य नाटिका भूमिका महाभारत का युद्ध हुए 5300 वर्ष से भी अधिक समय व्यतीत हो चुका है किंतु आज भी महाभारत की कथा का रोमांच...

प्रस्तावना

अकबर के राज्यारोहण के समय राजस्थान में ग्यारह रियासतें थीं जिनमें से मेवाड़, बांसवाड़ा, डूंगरपुर तथा प्रतापगढ़ पर गुहिल, जोधपुर एवं बीकानेर पर राठौड़,...
21,585FansLike
2,651FollowersFollow
0SubscribersSubscribe
- Advertisement -

Most Popular

मध्यकालीन भारत

अनुक्रमणिका – बाबर के बेटों की दास्तान

बाबर के बेटों की दर्द भरी दास्तान – प्राक्कथन1कुत्तों का मांस खाने लगे ययाति के वंशज!2नुकीली टोपी वाले हूणों का एक कबीला तुर्क कहलाने...

बाबर के बेटों की दर्द भरी दास्तान – प्राक्कथन

अत्यंत प्राचीन काल से चीन देश के उत्तरी रेगिस्तिान में तुर्क एवं मंगोल नामक युद्ध-जीवी कबीले रहा करते थे जो पेट भरने के लिए...

1. कुत्तों का मांस खाने लगे ययाति के वंशज!

चूंकि मुगलों का उद्भव तुर्कों एवं मंगोलों के रक्त-मिश्रण से हुआ था इसलिए मुगलों के इतिहास में जाने से पहले हमें तुर्कों एवं मंगोलों...

2. नुकीली टोपी वाले हूणों का एक कबीला तुर्क कहलाने लगा !

भारतीय पुराणों के अनुसार राजा ययाति के शापित पुत्रों- तुर्वसु एवं अनु के वंशजों ने कुत्ते, बिल्ली, सांप आदि का मांस खाना आरम्भ कर...

3. तुर्कों ने मंगोलों से खाँ की उपाधि छीन ली!

जिस समय हूण मंगोलिया से निकलकर बाल्हीक देश की तरफ जाने आरम्भ हुए थे, उस समय उनके पड़ौस में उनके ही जैसी एक और...

विश्व-इतिहास

सब भीतर ही भीतर गांधी के खिलाफ थे

2 जून 1947 को माउंटबेटन ने कांग्रेस की ओर से नेहरू, पटेल तथा कांग्रेस अध्यक्ष आचार्य कृपलानी को, मुस्लिम लीग की ओर से जिन्ना,...

कांग्रेस कार्यसमिति में पाकिस्तान को स्वीकृति

3 जून 1947 को कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक हुई जिसमें माउंटबेटन योजना स्वीकार कर ली गई। बैठक में इसे अस्थाई समाधान बताया गया...

Latest Articles

अध्याय – 30 : राजपूतकालीन भारत

राजपूत काल का भारत के इतिहास में बहुत बड़ा महत्त्व है। राजपूतों ने लगभग साढ़े पांच शताब्दियों तक अदम्य उत्साह के साथ मुस्लिम आक्रांताओं...

अध्याय – 31 : सर्वोच्चता के लिए त्रिकोणीय संघर्ष (गुर्जर-प्रतिहार, पाल और राष्ट्रकूट वंश)

अवंति का गुर्जर-प्रतिहार वंश गुर्जर-प्रतिहारों का उदय मण्डोर में हुआ तथा वे जालोर होते हुए अवन्ति तक जा पहुंचे थे। गुर्जर प्रदेश का स्वामि होने...

अध्याय – 32 इस्लाम का उत्कर्ष

इस्लाम का अर्थ इस्लाम अरबी भाषा के ‘सलम’ शब्द से निकला है जिसका अर्थ होता है आज्ञा का पालन करना। इस्लाम का अर्थ है आज्ञा...

अध्याय – 33 : अरब वालों का भारत पर आक्रमण

अरबवासियों का परिचय अरब एशिया महाद्वीप के दक्षिण-पश्चिमी भाग में स्थित एक प्रायद्वीप है। इसके दक्षिण में हिन्द महासागर, पश्चिमी में लालसागर और पूर्व में...

अध्याय – 34 (अ) : भारत पर तुर्क आक्रमण एवं हिन्दू प्रतिरोध – महमूद गजनवी

सिंध में अरबों के आक्रमण के लगभग 350 वर्ष बाद उत्तर-पश्चिमी दिशा से भारत भूमि पर तुर्क आक्रमण आरंभ हुए। उस समय भारत की...

अध्याय – 34 (ब) : भारत पर तुर्क आक्रमण एवं हिन्दू प्रतिरोध – मुहम्मद गौरी

गौर साम्राज्य का उत्कर्ष महमूद गजनवी की मृत्यु के बाद उसका साम्राज्य छिन्न-भिन्न होने लगा तथा एक नवीन राजवंश का उदय हुआ जिसे गौर वंश...

Must Read