क्या आपने उस किताब का नाम सुना है जिसने 1950 के दशक में पूरी दुनिया में आग लगा दी थी! क्या आपने एनीमल फार्म (Animal Farm) का नाम सुना है! जी हाँ, यही वह किताब है जिसने दुनिया भर के लोगों के दिमागों में आग लगा दी थी और उन दिमागों से निकली आग में दुनिया की 45 सरकारें जलकर भस्म हो गई थीं!
एनीमल फार्म संसार की सबसे रोचक और प्रभावशाली पुस्तकों में से एक है।
जब यह किताब जनता के बीच पहुंची तो दुनिया भर के लोगों ने साम्यवादियों के लाल झण्डे फूंक दिए, सरकारों को गिरा दिया और फिर से अपने देश की वास्तविक संस्कृति के आधार पर सरकारों का गठन किया। इस प्रकार इस किताब ने दुनिया भर में साम्यवाद का जनाजा निकला दिया।
एनीमल फार्म पर बात करने से पहले यह जानना आवश्यक होगा कि ईस्वी 1917 में रूस की बोल्शेविक क्रांति (Bolshevik Revolution) के बाद दुनिया भर में लगभग 50 देशों में साम्यवादी, मार्क्सवादी और लेनिनवादी सरकारें स्थापित हुई थीं।
इन कम्युनिस्ट सरकारों के तानाशाही रवैये और जनता के उत्पीड़ ने से दुखी होकर इंगलैण्ड के एक लेखक जॉर्ज ऑरवेल ने ‘एनीमल फार्म: ए फेयरी स्टोरी’ शीर्षक से एक छोटा सा उपन्यास लिखा। इस उपन्यास ने दुनिया भर के लोगों के दिमागों में आग लगा दी।
अमरीकी सरकार ने इस उपन्यास में भरी हुई कम्युनिस्ट विरोधी आग को पहचाना और इस किताब को कम्युनिज्म के विरुद्ध एक हथियार के रूप में इस्तेमाल करने का निश्चय किया।
अमरीकी गुप्तचर एजेंसी सीआईए ने इस किताब के 60 से अधिक भाषाओं में अनुवाद करवाए और उन्हें सोवियत संघ तथा उसके प्रभाव वाले समस्त कम्युनिस्ट देशों में गुप्त रूप से फैला दिया।
सीआईए ने इस किताब पर 1954 में विभिन्न भाषाओं में एनिमेटेड फिल्में भी बनवाई। इन किताबों और फिल्मों ने दुनिया भर में पूंजीवाद को नई ऑक्सीजन प्रदान की और लोगों को कम्युनिज्म के विरोध में खड़ा कर दिया।
विरोध की इस आग में दुनिया भर में स्थापित लगभग 50 कम्युनिस्ट सरकारों में से 45 सरकारें वर्ष 1989 से 1991 के बीच भस्म हो गईं।
अब दुनिया के केवल 5 देशों में आधिकारिक रूप से कम्युनिस्टों की सरकारें बची हैं जिनमें चीन, क्यूबा, लाओस, उत्तर कोरिया और वियतनाम शामिल हैं। हालांकि रूस अब आधिकारिक रूप से कम्युनिस्ट देश नहीं है किंतु रूसी सरकार का चरित्र अब भी कम्युस्टि है।
इस वीडियो में हम जॉर्ज ऑरवेल के उपन्यास ‘एनीमल फार्म ए फेयरी स्टोरी’ की मूल कथा के बारे में चर्चा करेंगे।
इस उपन्यास का मूल सार यह है कि संसार में हर क्रांति अच्छे उद्देश्य के लिए होती है, किंतु जब क्रांति सफल हो जाती है तब सत्ता बुरे लोगों द्वारा हथिया ली जाती है। इसके बाद जनता को एक नए तरह का शोषण का सामना करना होता है।
जॉर्ज ऑरवेल (George Orwell) का उपन्यास ‘एनीमल फार्म: ए फेयरी स्टोरी’ (Animal Farm: A Fairy Story) एक व्यंग्यात्मक रूपकात्मक डिस्टोपियन कथा है, जो 17 अगस्त 1945 को इंग्लैंड में पहली बार प्रकाशित हुआ था। यह एक पशु-कथा अर्थात् बीस्ट फेबल के रूप में लिखी गई है जिसमें मानवीय गुणों वाले जानवरों की कहानी के माध्यम से ईस्वी 1917 में हुई रूसी क्रांति से लेकर सोवियत संघ के स्टालिन युग तक की घटनाओं को दर्शाया गया है।
ऑरवेल, पूंजीपति नहीं थे, एक लोकतांत्रिक समाजवादी लेखक थे किंतु उन्होंने स्पेनिश सिविल वार के अपने अनुभवों से प्रभावित होकर स्टालिनवाद की आलोचना की।
इस उपन्यास की कहानी मैनर फार्म नामक पशुओं के एक बाड़े के अंदर घूमती है।
एनीमल फार्म में बहुत से जानवर रहते हैं तथा फार्म का मालिक उनसे बहुत काम लेता है। भर पेट खाने को भी नहीं देता। इसलिए पीड़ित जानवर अपने मालिक के खिलाफ विद्रोह करते हैं, ताकि समानता, स्वतंत्रता और सुख से भरा हुआ समाज स्थापित कर सकें। इस क्रांति का नेतृत्व तीन सूअर करते हैं।
जब क्रांति सफल हो जाती है तो एनीमल फार्म सूअरों की तानाशाही के अधीन एक डिस्टोपियन राज्य में बदल जाता है। सूअरों का राज्य आदमी के शासन भी अधिक उत्पीड़न करता है। उपन्यास की थीम में क्रांतिकारी आदर्शों का भ्रष्टाचार, अधिनायकवाद का उदय, प्रचार का प्रभाव और उत्पीड़न का चक्रीय स्वभाव शामिल है। जैसे ही एनीमल फार्म से आदमी का शासन हटता है और एनीमल फार्म के भोले-भाले जानवरों की सत्ता स्थापित होती है, क्रांतिकारी नेताओं की भाषा बदलने लगी है। चूंकि अब वे सत्ताधीश हैं, इसलिए उनकी भाषा में नैतिक विरोधाभास होने लगते हैं।
इस रूपक में एनीमल फार्म के जानवर सोवियत रूस के इतिहास के प्रमुख व्यक्तियों और घटनाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं। सूअर कम्युनिस्ट नेतृत्व के प्रतीक हैं जबकि फार्म की घटनाएं यूएसएसआर अर्थात् सोवियत संघ की नौकरशाही के द्वारा किए जा रहे भ्रष्टाचार को दिखाती हैं।
इस उपन्यास के प्रकाशन के 80 साल बाद भी एनीमल फार्म की कहानी न केवल रूस की, अपितु संसार भर में जनता के साथ हो रहे राजनीतिक धोखे को उजागर करती है। एनीमल फार्म की कहानी का अंत एनीमल फार्म के जानवरों पर आदमी के शासन की पुनर्स्थापना के साथ होता है।
उपन्यास में दस अध्याय हैं जिसमें क्रांति और उसके परिणाम की कथा जानवरों के उत्पीड़न से लेकर मानव-तानाशाही की बहाली तक चलती है।
उपन्यास की शुरुआत मैनर फार्म से होती है, जो शराबी मनुष्य मिस्टर जोन्स के कुप्रबंधन के कारण अस्त-व्यस्त है। एनीमल फार्म के जानवरों का जीवन दयनीय हैदृ वे भूखे, थके हुए और शोषित हैं।
एनीमल फार्म का एक वृद्ध सूअर जिसे सभी ओल्ड मेजर कहते हैं, सभी जानवरों को एक सभा में बुलाता है। वास्तव में वह एक पुरस्कार प्राप्त मिडल व्हाइट सूअर है जिसका पहले का नाम विलिंगडन ब्यूटी था।
ओल्ड मेजर नामक वह बूढ़ा सूअर, एनीमल फार्म के जानवरों को मानव शासन से मुक्ति का सपना दिखाता है। ओल्ड मेजर कहता है कि सभी जानवरों की समस्याओं के मूल कारण मनुष्य हैं, जो जानवरों का शोषण करते हैं दृ दूध और अंडे चुराते हैं, जानवरों से काम करवाते हैं और अंत में जानवरों को मार देते हैं।
ओल्ड मेजर एनिमलिज्म के सिद्धांतों की व्याख्या करता है और कहता है कि आदमी की गुलामी से त्रस्त सभी जानवर एक समान हैं और उन्हें मनुष्यों से मुक्त होकर एक ऐसे समाज का निर्माण करना चाहिए जहां कोई शोषण न हो।
वह बूढ़ा सूअर बीस्ट्स ऑफ इंग्लैंड नामक एक क्रांतिकारी गीत गाकर जानवरों को एकजुट होने का आह्वान करता है। इस सभा के तीन दिन बाद ओल्ड मेजर की मौत हो जाती है, लेकिन उसके विचार जीवित रहते हैं।
इस उपन्यास में ओल्ड मेजर कार्ल मार्क्स और व्लादिमीर लेनिन का प्रतीक है, जो क्रांति की प्रेरणा प्रदान करता है। यह अध्याय जानवरों के बीच असंतोष को स्थापित करता है, जो बाद की घटनाओं की नींव रखता है।
जानवरों की सभा में विभिन्न पशु अपनी प्रकृति के अनुसार प्रतिक्रिया देते हैं दृ घोड़े उत्साहित हैं, मुर्गियां चिंतित हैं और सूअर विचारशील हैं।
ओल्ड मेजर की मौत के बाद, दो युवा सूअर, स्नोबॉल और नेपोलियन जानवरों का नेतृत्व संभालते हैं। वे ओल्ड मेजर की शिक्षाओं को व्यवस्थित करते हैं और एनिमलिज्म को एक दर्शन के रूप में विकसित करते हैं।
स्नोबॉल नामक सूअर बुद्धिमान है और प्रखर वक्ता है। वह जानवरों को पढ़ना-लिखना सिखाता है। जबकि नेपोलियन नामक सूअर चालाक और महत्वाकांक्षी है। वह जानवरों के पिल्लों को गुप्त रूप से एनिमलिज्म में शिक्षित करता है।
अब एनीमल फार्म के जानवर सात आज्ञाओं को अपनाते हैं, जो खलिहान की दीवार पर लिख दी जाती हैं- 1. दो पैरों पर चलने वाला दुश्मन है; 2. चार पैरों वाला या पंख वाला मित्र है; 3. कोई जानवर कपड़े नहीं पहनेगा; 4. कोई जानवर बिस्तर पर नहीं सोएगा; 5. कोई जानवर शराब नहीं पिएगा; 6. कोई जानवर दूसरे जानवर को नहीं मारेगा; 7. सभी जानवर समान हैं।
सूअर खुद को विशेष भोजन का हकदार बताते हैं, कहते हैं कि यह उनके स्वास्थ्य के लिए जरूरी है। एक रात को जब मिस्टर जोन्स शराब के नशे में होता है, जानवर विद्रोह करते हैं, उसे और जोन्स तथा उसके आदमियों को भगा देते हैं।
क्रांति सफल हो जाती है और जोन्स फार्म का नाम बदलकर एनीमल फार्म कर दिया जाता है। वे एक हरा झंडा फहराते हैं, जिसमें एक सींग और खुर का प्रतीक होता है। जीवन में सुधार आता है दृ भोजन प्रचुर है, और काम सुचारू रूप से चलने लगता है।
यह अध्याय क्रांति की शुरुआती सफलता दिखाता है, लेकिन सूक्ष्म संकेत देता है कि सूअरों में सत्ता की लालसा है। वस्तुतः यह चित्रण ईस्वी 1917 की बोल्शेविक क्रांति का प्रतिनिधित्व करता है, जहां जनता ने रूस के जार निकोलस द्वितीय को सत्ता से हटाया था।
विद्रोह के बाद, एनीमल फार्म के सभी जानवर सामूहिक रूप से काम करते हैं। स्नोबॉल समितियां बनाता है, जैसे अंडा उत्पादन समिति, जबकि नेपोलियन पिल्लों पर ध्यान केंद्रित करता है।
जब गायें दूध देती हैं, तो उसे सूअर पी जाते हैं और जब मुर्गियाँ अण्डे देती हैं तो उन्हें भी सूअर खा जाते हैं। जब एनीमल फार्म के जानवर दूध और अण्डों के बारे में पूछते हैं तो सूअर जानवरों को एनीमल फार्म पर शांति रखने की सलाह देते हैं।
एक दिन मिस्टर जोन्स और उसके सहयोगी बैटल ऑफ द काउशेड में फार्म पर हमला करते हैं, लेकिन एनीमल फार्म के जानवर उन्हें हरा देते हैं। अब तो स्नोबॉल और नेपोलियन पशुओं के वास्तविक नायक बन जाते हैं।
वस्तुतः ‘बैटल ऑफ द काउ-शेड’ 1918 के गृहयुद्ध में विदेशी हस्तक्षेप को दर्शाता है।
एनीमल फार्म के सूअर काम नहीं करते, वे केवल नेता हैं और बाकी के जानवरों के लिए निर्णय लेते हैं। जबकि दूसरी ओर बाकी के जानवर कड़ी मेहनत करते हैं।
एनीमल फार्म पर बॉक्सर नामक एक मजबूत घोड़ा है, वह सूअरों के भाषणों से प्रभावित होकर ‘आई विल वर्क हार्डर’ का संकल्प लेता है। यह अध्याय क्रांति के आदर्शों की शुरुआती परीक्षा दिखाता है, जहां समानता अभी भी मौजूद लगती है किंतु सूअरों की विशेषाधिकार शुरू हो जाते हैं।
एक दिन स्नोबॉल फार्म को आधुनिक बनाने के लिए एक पवनचक्की बनाने का प्रस्ताव रखता है, जो एनीमल फार्म के जानवरों को बिजली और सुविधाएं प्रदान करेगी।
नेपोलियन इस पवनचक्की के प्रस्ताव का विरोध करता है, जिससे सूअरों के बीच नेतृत्व को लेकर तनाव बढ़ता है।
अब नेपोलियन नामक सूअर की महत्वाकांक्षा स्पष्ट होने लगती है। एक दिन वह अपने प्रशिक्षित कुत्तों से स्नोबॉल को भगा देता है और जानवरों का एकमात्र नेता बन जाता है। वह जानवरों की सभाओं को समाप्त कर देता है और सूअरों की समिति से शासन चलाने लगता है।
इस उपन्यास में जहाँ नेपोलियन नामक सूअर कम्युनिस्ट क्रांतिकारी स्टालिन का प्रतिनिधित्व करता है, वहीं स्नोबॉल ट्रॉटस्की का। नेपोलियन के आदेश पर काम करने वाले कुत्ते सोवियत गुप्त पुलिस एनकेवीडी के प्रतीक हैं।
एक दिन नेपोलियन ओल्ड मेजर की खोपड़ी को धरती में से खोदकर निकालता है और जानवरों के समक्ष उसका प्रदर्शन करके स्नोबॉल को तोड़फोड़ के लिए आरोपी बनाता है।
इस सभा में नेपोलियन नामक सूअर, जानवरों से पवनचक्की बनाने के लिए कहता है और पवनचक्की से होने वाले फायदों का बखान करता है। स्क्वीलर नामक एक चालाक सूअर, एनीमल फार्म में आ रहे बदलावों को जायज ठहराता है। यह अध्याय अधिनायकवाद के उदय को दिखाता है।
अब नेपोलियन आदमियों की तरह दो पैरों पर चलने लगता है, बिस्तर पर सोने लगता है और अत्यधिक शराब पीने लगता है। वह अपनी आज्ञाओं को गुप्त रूप से बदलता है। नेपोलियन के आदेश पर एनीमल फार्म की भेड़ें फोर लेग्स गुड, टू लेग्स बैड का गीत गाने लगती हैं। ताकि जानवर नेपालियन का विरोध न करें।
पवनचक्की का निर्माण शुरू होता है, लेकिन कठिनाइयां आती हैं। जानवर पवनचक्की बनाने के लिए कड़ी मेहनत करते हैं और जानवरों का जीवन कठिन होता चला जाता है, लेकिन स्क्वीलर नामक सूअर दावा करता है कि इस समय एनीमल फार्म का शासन मिस्टर जोन्स के समय से बेहतर है। वास्तव में यह रूपक सोवियत रूस के पांच-वर्षीय योजनाओं और आदर्शों के भ्रष्टाचार को दिखाता है।
जब पवन चक्की बन जाती है तो पड़ौसी फार्म के मालिक मिस्टर फ्रेडरिक हमला करते हैं और पवनचक्की को विस्फोट से नष्ट कर देते हैं। इस पर मिस्टर फ्रेडरिक तथा जानवरों के बीच युद्ध होता है जिसमें जानवर जीत जाते हैं। कुछ पशु इस युद्ध में मर जाते हैं।
एक दिन नेपोलियन, एनीमल फार्म के जानवरों से छिपकर, एनीमल फार्म के दुश्मन फ्रेडरिक से लकड़ी के लिए सौदा करता है। फ्रेडरिक एनीमल फार्म की लकड़ी ले जाता है और बदले में नकली नोट देता है। इस पर नेपोलियन इस षड़यंत्र के लिए स्नोबॉल को देशद्रोही ठहराता है जिसे कि पहले ही एनीमल फार्म से भगाया जाता है। इस प्रकार यह अध्याय युद्ध और धोखे को दर्शाता है, जहाँ फ्रेडरिक हिटलर का रूपक है और हमला मोलोटोव-रिबेंट्रॉप पैक्ट के टूटने का।
इसके बाद नेपोलियन एनीमल फार्म का शुद्धिकरण करता है और अपने विरोधी जानवरों को अपने कुत्तों से मरवा देता है। नेपोलियन आरोप लगाता है कि जानवर स्नोबॉल की साजिश में शामिल हैं, वे ही मेरा विरोध करते हैं।
अब नेपोलियन एनीमल फार्म के एंथम बीस्ट्स ऑफ इंग्लैंड पर प्रतिबंध लगा देता है। जानवर अब एक नया गीत गाने लगते हैं जिसमें नेपोलियन की स्तुति की जाती है। इस प्रकार नेपोलियन पूरी तरह डिक्टेटर बन जाता है और एनीमल फार्म की दीवारों पर लिखी गई पुरानी आज्ञाओं को मिटाकर नई आज्ञाएं लिखवाता है।
नई आज्ञाओं में कहा जाता है कि ‘ऑल एनिमल्स आर इक्वल, बट सम आर मोर इक्वल दैन अदर्स।’ इसके बाद जानवरों के कष्ट और अधिक बढ़ जाते हैं, लेकिन नेपोलियन का प्रचार अधिकारी जो कि स्क्वीलर नामक सूअर है, शासन के अच्छे होने का दावा करता है। यह चित्रण वस्तुतः 1930 के दशक के शो ‘ट्रायल्स और पर्जेस’ को दिखाता है।
एक दिन पवनचक्की तूफान में गिर जाती है। नेपोलियन इसके लिए भी स्नोबॉल को दोषी ठहराता है जबकि पवनचक्की तो घटिया निर्माण सामग्री के कारण गिरती है।
युवा सूअरों का निष्पादन होता है। मुर्गियां अंडों की जब्ती पर विद्रोह करती हैं, लेकिन भूख से दबा दी जाती हैं। यह अध्याय सोवियत की अकाल (जैसे होलोडोमोर) को दर्शाता है।
कुछ समय और बीतता है, पवनचक्की पुनर्निर्मित होती है, लेकिन उससे होने वाली आय पर केवल सूअरों का अधिकार होता है। सूअर मानवीय आदतें अपनाते हैं दृ सीधे चलना, कपड़े पहनना, शराब पीना। झंडे का रंग भी बदल जाता है। ओल्ड मेजर की खोपड़ी फिर से दफना दी जाती है। अब केवल एक आज्ञा बाकी रहती है, जो जानवरों के बीच समानता के अधिकार की जगह असमानता को दर्शाती है।
एक दिन बॉक्सर नामक घोड़ा जो कि रूस के स्टाखानो-वाइट श्रमिकों का प्रतिनिधित्व करता है, अत्यधिक मेहनत के कारण बीमार पड़ जाता है और नेपोलियन द्वारा बेच दिया जाता है।
एक दिन नेपोलियन एनीमल फार्म के सूअरों और पड़ौसी फार्मों के मानव किसानों के लिए रात्रिभोज आयोजित करता है। वह क्रांतिकारी परंपराओं को समाप्त देता है। एनीमल फार्म का नाम वापस द मैनर फार्म कर देता है। जानवर बाहर से देखते हैं कि सूअर और मनुष्य अब एक जैसे हो चुके हैं। वे ताश खेलते हैं और पैसा हार-जीत पर लगाते हैं।
सूअरों के आदेश पर फार्म के दूसरे जानवर और अधिक काम करते हैं, उनका भोजन घटा दिया जाता है। सूअरों के मनुष्य-मित्र नेपोलियन की प्रशंसा करते हैं। यह अध्याय क्रांति के बाद जनता के साथ होने वाले पूर्ण विश्वासघात को दिखाता है, जहां सूअर और मनुष्य एक हो जाते हैं अर्थात् सोवियत रूस के कम्युनिस्ट और यूरोप के पूंजीपति एक हो जाते हैं।
इन्हीं परिस्थितियों के बीच एक दिन मैनर फार्म का पुराना मालिक मिस्टर जोन्स लौट आता है और एनीमल फार्म पर फिर से कब्जा कर लेता है। इस प्रकार एक सफल क्रांति बुरे अनुभव के साथ समाप्त हो जाती है और एनीमल फार्म के जानवर फिर से पहले की तरह आदमी के निर्देशों पर काम करने लगते हैं।
एनीमल फार्म के जानवरी अब जाकर अनुभव कर पाते हैं कि सूअरों के शासन से तो आदमी का शासन बेहतर है। अर्थात् कम्युनिस्टों के शासन से पूंजीपतियों का शासन बेहतर है।
इस प्रकार यह उपन्यास समानता के भ्रष्टाचार, प्रचार की शक्ति और अधिनायकवाद को उजागर करता है। सात आज्ञाएं सोवियत संविधान की विकृति हैं। अंत में, सूअर और मनुष्य का एकीकरण सोवियत-पश्चिम संबंधों की आलोचना है। ऑरवेल राजनीतिक उद्देश्य को कलात्मक व्यंग्य से जोड़ते हैं, दिखाते हैं कि सत्ता-लोलुप नेता क्रांतियां कैसे तानाशाही में बदल देते हैं।
यदि हम इस कथानक को भारत के इतिहास की दृष्टि से देखें तो हम पाते हैं कि भारत में भी ईस्वी 1857 में एक महान् क्रांति आरम्भ हुई। इसका उद्देश्य भारत माता को विदेशियों की दासता से मुक्त करवाना था। यह क्रांति पूरे 90 साल में जाकर सफल हुई। हजारों प्रतिभावान क्रांतिनायकों ने अपना जीवन होम कर दिया। अंततः 1947 में भारत स्वतंत्र हुआ।
जैसा कि हर क्रांति के बाद होता है, क्रांति के महान नायक क्रांति के दौरान या तो शहीद हो गए, या फिर परिदृश्य से हटा दिए गए और क्रांति की सफलता का समस्त श्रेय कम प्रतिभा वाले लोगों को मिला। उनके हाथों में सत्ता की बागडोर आई। वे धूर्त नहीं थे किंतु चालाक अवश्य थे। उन्होंने अपने आप को कम्यूनिस्ट नहीं कहा, बड़ी चालाकी से धर्मनिरपेक्ष एवं समाजवादी के रूप में प्रदर्शित किया।
शीघ्र ही वे चालाक लोग जिन्हें भारत की सत्ता की बागडोर मिली थी और जो स्वयं को समाजवादी कहते थे, सुविधाभोगी होने लगे। समय के साथ इन सुविधाभोगियों का लालच बढ़ने लगा। वे जनता के सुख-सुविधाओं से नहीं अपनी सुख-सुविधाओं के लिए पॉलिटिक्स का गंदा खेल खेलने लगे। और धीरे-धीरे पूरी तरह धूर्त भी बन गए।
भारत के इन नेताओं ने भारत के संविधान में धर्मनिरपेक्ष और समाजवाद (Secularism and socialism) शब्द ठीक उसी प्रकार बदल दिए जिस प्रकार एनीमल फार्म के अधिनायक नेपोलियन ने एनीमल फार्म की सात आज्ञाओं को बदल दिया था।
हालांकि जनता ने पिछले कुछ सालों से उन्हें सत्ता से वंचित कर रखा है किंतु वे पॉलिटिक्स का गंदा खेल खेलने से बाज नहीं आते, और सदैव इस ताक में रहते हैं कि सत्ता फिर से उनके हाथों में आ जाए।
संसार भर में हुई सफल क्रांतियों की इस क्रूर हकीकत तथा भारत की जनता के साथ हुए धोखे को समझाने के लिए मैंने इस आलेख में जॉर्ज ऑरवेल के उपन्यास एनीमल फार्म की कहानी का सहारा लिया है।
-डॉ. मोहनलाल गुप्ता



