डॉ. मोहनलाल गुप्ता द्वारा रचित “तीसरा मुगल: जलालुद्दीन मुहम्मद अकबर” (Tīsara Mughal: Jalaluddīn Muhammad Akbar) एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक कृति है, जिसमें लेखक ने अकबर के व्यक्तित्व, शासन, नीतियों और उनके समय की राजनीतिक परिस्थितियों का गहन विश्लेषण प्रस्तुत किया है। यह पुस्तक पारंपरिक मुगल इतिहास-लेखन से हटकर अकबर (Akbar) के शासन को एक नई दृष्टि से देखती है और अनेक ऐसी घटनाओं को रेखांकित करती है जिन्हें मुख्यधारा के इतिहास में अपेक्षित स्थान नहीं मिल पाया।
लेखक ने अकबर के जीवन को केवल एक सम्राट की कथा के रूप में नहीं, बल्कि एक ऐसे शासक के रूप में प्रस्तुत किया है जिसकी महत्वाकांक्षाएँ अत्यन्त व्यापक थीं। पुस्तक में यह स्पष्ट किया गया है कि अकबर ने अपने शासनकाल में साम्राज्य का विस्तार, प्रशासनिक संरचना, राजपूताना नीति, धार्मिक प्रयोगों और सैन्य अभियानों के माध्यम से एक विशाल और केंद्रीकृत शक्ति का निर्माण किया। लेकिन इन सभी पहलुओं के पीछे छिपे राजनीतिक उद्देश्य, रणनीतियाँ और संघर्ष भी उतनी ही स्पष्टता से उभरकर सामने आते हैं।
डॉ. गुप्ता ने विशेष रूप से अकबर और महाराणा प्रताप के संघर्ष को विस्तार से विवेचित किया है। लेखक के अनुसार यह संघर्ष केवल दो राजाओं की लड़ाई नहीं, बल्कि दो विचारधाराओं—स्वतंत्रता और विस्तारवादी साम्राज्यवाद—का टकराव था। पुस्तक के अध्यायों में यह प्रमाणित करने का प्रयास किया गया है कि अकबर किसी भी कीमत पर मेवाड़ पर अधिकार जमाना चाहता था, जबकि महाराणा प्रताप अपने स्वाभिमान और स्वाधीनता के लिए अन्त तक संघर्षरत रहे। पुस्तक में Akbar के दरबार, उनके सेनापतियों, नवरत्नों और प्रशासनिक अधिकारियों पर भी विस्तृत प्रकाश डाला गया है। लेखक कई प्रसंगों के माध्यम से यह बताते हैं कि अकबर का दरबार जितना प्रतापी दिखता था, उसके भीतर राजनीतिक स्पर्धाएँ, आंतरिक संघर्ष और दरबारी महत्वाकांक्षाएँ भी उतनी ही तीव्र थीं। Raja Todarmal, मान सिंह, बीरबल, अबुल फ़जल आदि के संबंध में लेखक ने कई ऐतिहासिक उद्धरण और घटनाएँ प्रस्तुत की हैं, जिनसे अकबर की नीतियों और उसके परिणामों का गहराई से आकलन किया जा सकता है। डॉ. गुप्ता की लेखन शैली सरल, प्रामाणिक और शोधपूर्ण है। उन्होंने फ़ारसी, राजस्थानी और मुगलकालीन स्रोतों का उपयोग करते हुए अनेक ऐसे प्रमाण प्रस्तुत किए हैं जो पारंपरिक इतिहास से भिन्न दृष्टिकोण सामने लाते हैं।
पुस्तक तीसरा मुगल: जलालुद्दीन मुहम्मद अकबर में कई घटनाएँ जैसे—अकबर के पारिवारिक संबंध, शहजादों का जीवन, दंडनीति, धार्मिक प्रयोग, और साम्राज्यवादी महत्वाकांक्षाएँ—इस प्रकार से वर्णित हैं कि पाठक अकबर के वास्तविक व्यक्तित्व को समझने में सक्षम होता है।
समग्रतः यह कृति अकबर के इतिहास को एक नई दृष्टि प्रदान करती है। यह न केवल इतिहास के छात्रों और शोधार्थियों के लिए मूल्यवान है, बल्कि उन पाठकों के लिए भी महत्वपूर्ण है जो भारतीय इतिहास को गहराई से समझना चाहते हैं। डॉ. मोहनलाल गुप्ता ने इस पुस्तक के माध्यम से यह स्थापित किया है कि अकबर का शासन जितना भव्य दिखाई देता है, उतना ही जटिल और संघर्षपूर्ण भी था। यह पुस्तक निश्चित रूप से मुगल इतिहास के अध्ययन में एक महत्वपूर्ण योगदान प्रस्तुत करती है।
पुस्तक- तीसरा मुगल: जलालुद्दीन मुहम्मद अकबर
लेखक- डॉ. मोहनलाल गुप्ता
प्रकाशक- शुभदा प्रकाशन जोधपुर




