वॉयनिच मैन्युस्क्रिप्ट एक ऐसी पहेली, जिसे द्वितीय विश्व युद्ध के दिग्गज कोड-ब्रेकर्स से लेकर आज के सबसे एडवांस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सुपर कंप्यूटर्स तक, कोई भी डिकोड नहीं कर सका। आखिर इस किताब में ऐसा क्या लिखा है, जिसे पढ़ना नामुमकिन बना हुआ है?
क्या धरती पर कभी किसी ने ऐसी औरतें देखी हैं जिनकी नसें हरे रंग की हैं और जो निर्वस्त्र होकर नीले पानी में नहाती हैं? संभवतः ज्ञात सभ्यताओं के किसी भी कालखण्ड के इतिहास में ऐसी औरतों का उल्लेख नहीं है किंतु आज से छः सौ साल पहले लिखी गए एक रहस्यमयी किताब में इन औरतों के चित्र बने हुए हैं। इन औरतों के बारे में कुछ लिखा भी गया है किंतु क्या लिखा गया है, इसे कोई नहीं पढ़ सका। यह एक ऐसी किताब है, जिसके पन्ने पलटते ही हम एक ऐसी दुनिया में पहुँच जाते हैं जो हमारी धरती जैसी तो लगती है, लेकिन है नहीं।
इतिहास के सीने में दबे अनगिनत रहस्यों को विज्ञान ने सुलझा लिया है, कुछ को समय ने धुंधला कर दिया है, लेकिन एक रहस्य ऐसा है जिसने सदियों से इंसानी दिमाग को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया है।
आज मैं बात कर रहा हूँ वॉयनिच मैन्युस्क्रिप्ट (Voynich Manuscript) की। यह 240 पन्नों की एक पुरानी डायरी जैसी लगती है किंतु दुनिया की सबसे रहस्यमयी किताब है।
एक ऐसी पहेली, जिसे द्वितीय विश्व युद्ध के दिग्गज कोड-ब्रेकर्स से लेकर आज के सबसे एडवांस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सुपर कंप्यूटर्स तक, कोई भी डिकोड नहीं कर सका। आखिर इस किताब में ऐसा क्या लिखा है, जिसे पढ़ना नामुमकिन बना हुआ है?
धूल भरे पुस्तकालय से दुनिया के सामने तक का सफर
इस किताब की आधुनिक खोज की कहानी भी किसी फिल्मी थ्रिलर से कम नहीं है। साल 1912 में, पोलिश-अमेरिकी मूल के पुरानी किताबों के एक व्यापारी, विल्फ्रिड वॉयनिच (Wilfrid Voynich), इटली में रोम के पास स्थित ‘विला मोंड्रागोन’ नामक एक पुराने कैथोलिक कॉलेज के पुस्तकालय में दुर्लभ किताबें खंगाल रहे थे।
धूल से सने संदूकों के बीच, उनकी नज़र एक अजीबोगरीब किताब पर पड़ी। इसका कवर बिल्कुल सादा था—न कोई नाम, न लेखक का पता। जिज्ञासावश जब वॉयनिच ने इसे खोला, तो वह सन्न रह गए। पन्नों पर जो लिपि लिखी थी, वह न तो लैटिन थी, न ग्रीक, न अरबी और न ही दुनिया की कोई अन्य ज्ञात भाषा। यह एक पूरी तरह से अज्ञात लिपि थी, जिसके साथ अजीबोगरीब चित्र बने थे। वॉयनिच ने इसे तुरंत खरीद लिया और अपनी पूरी ज़िंदगी इस किताब का रहस्य सुलझाने में लगा दी। उन्हीं के सम्मान में आज इसे ‘वॉयनिच मैन्युस्क्रिप्ट’ कहा जाता है।
कोलंबस से भी पुरानी: क्या कहती है साइंस?
दशकों तक विद्वानों का मानना था कि यह किताब शायद 16वीं या 17वीं सदी में लिखी गई होगी। लेकिन साल 2009 में, यूनिवर्सिटी ऑफ एरिज़ोना के वैज्ञानिकों ने इस किताब के पन्नों (जो जानवरों की खाल से बने कागज ‘वेलम’ पर लिखे गए हैं) की रेडियो-कार्बन डेटिंग की।
नतीजे चौंकाने वाले थे। परीक्षणों से पता चला कि यह किताब 1404 से 1438 के बीच लिखी गई थी। इसका मतलब यह है कि यह किताब क्रिस्टोफर कोलंबस द्वारा अमेरिका की खोज किए जाने से भी लगभग सदी भर पहले अस्तित्व में थी।
इस किताब का ऐतिहासिक सफरनामा भी काफी दिलचस्प है। दस्तावेजों के अनुसार, 16वीं सदी में यह किताब बोहेमिया के सम्राट रूडोल्फ द्वितीय के पास थी, जिन्होंने इसे 600 सोने के सिक्कों (आज के हिसाब से लाखों डॉलर) में खरीदा था। राजा को विश्वास था कि यह 13वीं सदी के मशहूर दार्शनिक और जादूगर ‘रोजर बेकन’ की कृति है। इसके बाद यह किताब कई विद्वानों और कीमियागरों के हाथों से गुजरती हुई अंततः रोम के उस अंधेरे तहखाने में गुम हो गई, जहाँ इसे वॉयनिच ने ढूँढ निकाला।
एक अकल्पनीय दुनिया: वॉयनिच मैन्युस्क्रिप्ट के अंदर क्या है?
अगर आपको लगता है कि इस किताब की केवल भाषा ही अजीब है, तो इसके चित्रों को देखकर आप दांतों तले उंगली दबा लेंगे। मैन्युस्क्रिप्ट के हाई-रेज़ोल्यूशन स्कैन देखने पर पता चलता है कि 240 पन्नों की इस किताब को चित्रों के आधार पर 6 मुख्य भागों में बांटा जा सकता है। हर भाग अपने आप में एक अलग और पेचीदा पहेली है।
- हर्बल सेक्शन (वनस्पति विज्ञान): यह किताब का सबसे बड़ा हिस्सा है। इसमें 113 अलग-अलग प्रकार के पौधों और वनस्पतियों के चित्र बने हैं। लेकिन सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इनमें से एक भी पौधा हमारी पृथ्वी पर पाए जाने वाले किसी भी ज्ञात पौधे से पूरी तरह मेल नहीं खाता। यह ऐसे पौधे हैं जो या तो किसी की गहरी कल्पना से उपजे हैं, या फिर किसी ऐसी जगह के हैं जिसे हम नहीं जानते।
- एस्ट्रोनॉमिकल सेक्शन (खगोल विज्ञान): इस हिस्से में सितारों, सूर्य, चंद्रमा और नक्षत्रों के गोलाकार चार्ट बने हैं। इनमें राशि चक्र (Zodiac) के चिह्न भी दिखाई देते हैं। लेकिन इन नक्षत्रों के बीच अजीबोगरीब आकृतियां हैं, जैसे धनु या वृषभ राशि के चिह्नों के इर्द-गिर्द ऐसी महिलाओं के चित्र बने हैं जो तारों से बंधी हुई प्रतीत होती हैं।
- बायोलॉजिकल सेक्शन (जीव विज्ञान): यह पूरी किताब का सबसे विचित्र हिस्सा माना जाता है। इसमें कई नग्न महिलाओं के चित्र हैं, जो हरे और नीले रंग के रहस्यमयी तरल पदार्थों से भरे कुंडों (Pools) में तैर रही हैं या नहा रही हैं। उनके शरीर से अजीब से पाइप, कैप्सूल और नलियां जुड़ी हुई हैं, जो इंसानी नसों (Blood vessels) जैसी दिखती हैं। कुछ विशेषज्ञ इसे कीमिया (Alchemy) का कोई गुप्त फॉर्मूला मानते हैं, तो कुछ इसे मानव शरीर के आंतरिक तंत्र का रहस्यमयी चित्रण।
- कॉस्मोलॉजिकल सेक्शन (ब्रह्मांड विज्ञान): इसमें बड़े-बड़े फोल्ड-आउट (खुलने वाले) पन्ने हैं। एक पन्ना तो 6 सामान्य पन्नों के बराबर बड़ा है, जिसमें ज्वालामुखी, प्राचीन महल और नौ ग्रहों जैसी आकृतियां बनी हैं। इसमें बने महल और दीवारें इटली के कुछ प्राचीन किलों से मिलते-जुलते हैं, जो एक इशारा देते हैं कि शायद किताब इटली या उसके आस-पास ही कहीं लिखी गई थी।
- फार्मास्युटिकल सेक्शन (औषधि विज्ञान): यहाँ विभिन्न पौधों की जड़ों, पत्तियों और अजीब सी बोतलों के चित्र बने हैं। ऐसा लगता है जैसे यह प्राचीन काल के किसी वैद्य की रहस्यमयी दवाइयां बनाने की रेसिपी बुक हो।
- रेसिपीज़ (विधियां): किताब के अंत में बिना चित्रों वाले सिर्फ टेक्स्ट (लिखावट) के पन्ने हैं, जिनके किनारे फूल और तारे बने हैं। इसे देखकर लगता है कि यह कोई निर्देशिका या जादुई मंत्रों की सूची है।
वॉयनिच मैन्युस्क्रिप्ट कोड जिसे कोई तोड़ न सका
चित्रों के अलावा इस किताब की असली जानलेवा पहेली है इसकी भाषा… जिसे ‘वॉयनिचीज़’ (Voynichese) कहा जाता है। प्रथम और द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान दुश्मनों के सबसे जटिल कोड तोड़ने वाले महारथी, जैसे विलियम फ्राइडमैन (जिन्होंने जापान के प्रसिद्ध ‘पर्पल कोड’ को क्रैक किया था)—वे भी वॉयनिच मैन्युस्क्रिप्ट के सामने बेबस नज़र आए।
लेकिन क्या यह सिर्फ एक पागलपन भरी चित्रकारी है? भाषा विज्ञानियों (Linguists) के अध्ययन कुछ और ही कहानी बयां करते हैं। उन्हों भाषा विज्ञानियों ने पाया कि वॉयनिच मैन्युस्क्रिप्ट की भाषा ‘ज़िपफ के नियम’ (Zipf’s Law) का कड़ाई से पालन करती है। ‘ज़िपफ का नियम’ कहता है कि किसी भी प्राकृतिक भाषा में, सबसे ज़्यादा इस्तेमाल होने वाला शब्द, दूसरे सबसे ज़्यादा इस्तेमाल होने वाले शब्द से दोगुना आता है, और इसी क्रम में आगे बढ़ता है।
इसका मतलब है कि वॉयनिच का टेक्स्ट कोई बेतरतीब लिखावट नहीं है। इसमें स्वर (Vowels) और व्यंजन (Consonants) का एक निश्चित पैटर्न है। शब्दों की लंबाई बिल्कुल वैसी है जैसी अंग्रेजी या लैटिन में होती है। लिखने वाले ने बिना किसी गलती, बिना किसी काट-छांट के, बाएं से दाएं, एक दम सधे हुए हाथों से इसे लिखा है। अगर यह कोई झूठी भाषा होती, तो इसे इतनी परफेक्शन और निरंतरता के साथ लिखना एक इंसान के लिए लगभग नामुमकिन है।
सच या धोखा? प्रमुख थ्योरीज़
सदियों से वॉयनिच मैन्युस्क्रिप्ट के रहस्य को सुलझाने के लिए कई थ्योरीज़ (सिद्धांत) सामने आई हैं:
- वॉयनिच मैन्युस्क्रिप्ट थ्योरी 1: एलियन या दूसरी दुनिया का ज्ञान: चूंकि इसमें छपे पौधे और तारामंडल हमारी दुनिया से मेल नहीं खाते, कई कॉन्स्पिरेसी थ्योरिस्ट मानते हैं कि यह किसी परग्रही सभ्यता का ज्ञान है जो गलती से धरती पर छूट गया, या किसी इंसान ने एलियंस के संपर्क में आकर इसे लिखा।
- वॉयनिच मैन्युस्क्रिप्ट थ्योरी 2: एक मध्ययुगीन धोखा (The Great Hoax): कुछ इतिहासकारों का मानना है कि इसे जानबूझकर केवल पैसे कमाने के लिए बनाया गया था। चूंकि सम्राट रूडोल्फ द्वितीय दुर्लभ और जादुई चीज़ों के दीवाने थे, शायद एडवर्ड केली नाम के एक मशहूर धोखेबाज़ ने अपने साथी जॉन डी के साथ मिलकर यह झूठी किताब रची, ताकि राजा को बेवकूफ बनाकर मोटी रकम ऐंठी जा सके।
- वॉयनिच मैन्युस्क्रिप्ट थ्योरी 3: महिलाओं का स्वास्थ्य और सीक्रेट कोड: हाल ही में कुछ शोधकर्ताओं ने दावा किया कि यह किताब कोई जादू-टोना नहीं, बल्कि
- वॉयनिच मैन्युस्क्रिप्ट महिलाओं के स्वास्थ्य, गर्भावस्था और हर्बल मेडिसिन की एक एनसाइक्लोपीडिया है। Nuns ने अपनी जानकारियों को चर्च की आंखों से छिपाने के लिए इसे सीक्रेट कोड में लिखा।
- वॉयनिच मैन्युस्क्रिप्ट थ्योरी 4: ऑटो-कॉपी या कार्डन ग्रिल मेथड: कुछ लोगों का मानना है कि यह वॉयनिच मैन्युस्क्रिप्ट थ्योरीएक ‘माइक्रोग्राफिक’ साइफर है। हर अक्षर को एक जटिल जाली (Grille) के ज़रिए बदल दिया गया है, जिसे डिकोड करने की चाबी (Key) इतिहास में कहीं खो चुकी है।
तकनीक हार गई, वॉयनिच मैन्युस्क्रिप्ट का रहस्य बरकरार
आज वॉयनिच मैन्युस्क्रिप्ट अमेरिका की प्रतिष्ठित येल यूनिवर्सिटी (Yale University) की ‘बायनेकी रेयर बुक एंड मैन्युस्क्रिप्ट लाइब्रेरी’ में एक शीशे के सुरक्षित बॉक्स (वॉल्ट) के अंदर रखी हुई है। हालांकि, इसका पूरा पीडीएफ इंटरनेट पर मुफ्त में उपलब्ध है, जिसे दुनिया भर के लाखों एमेच्योर जासूस, हैकर्स और एआई सिस्टम रोज़ाना क्रैक करने की कोशिश कर रहे हैं।
हम एक ऐसे युग में जी रहे हैं जहां हमने ब्लैक होल की तस्वीर खींच ली है, इंसानी डीएनए का नक्शा बना लिया है, और मंगल ग्रह पर रोवर भेज दिए हैं। लेकिन यह एक बड़ी विडंबना है कि हमारे सारे सुपरकंप्यूटर और आधुनिक विज्ञान मिलकर भी 600 साल पहले एक इंसान के हाथ से लिखी गई इस 240 पन्नों की किताब के सामने असहाय हैं।
हमें याद दिलाती है कि हमारी तमाम तकनीकी तरक्की के बावजूद, इतिहास ने अभी भी अपने कुछ राज़ हमारे लिए छुपा कर रखे हैं। शायद एक दिन कोई जीनियस वॉयनिच मैन्युस्क्रिप्ट कोड को तोड़ दे… या शायद, इसे कभी पढ़ा ही नहीं जा सकेगा।
क्या आपको लगता है कि वॉयनिच मैन्युस्क्रिप्ट में किसी अकल्पनीय खज़ाने या ज्ञान का राज़ छिपा है, या यह महज़ सदियों पुराना एक बहुत ही चालाकी से बुना गया मज़ाक है? रहस्य अभी भी बरकरार है।
-डॉ. मोहनलाल गुप्ता



