बौद्ध धर्म के प्रमुख ग्रंथ कोश में त्रिपिटक, महायान सूत्र, अवदान साहित्य और तांत्रिक ग्रंथ सम्मिलित हैं। यह आलेख बौद्ध धर्म के प्रमुख ग्रंथ- विनयपिटक, सुत्तपिटक, अभिधम्मपिटक, प्रज्ञापारमिता सूत्र, दिव्यावदान और आर्य मंजूश्री मूल कल्प आदि महत्वपूर्ण ग्रंथों की सूची प्रस्तुत करता है।
✍️बौद्ध धर्म का साहित्य अत्यंत विशाल और विविधतापूर्ण है। बौद्ध धर्म के प्रमुख ग्रंथ मुख्य रूप से तीन भाषाओं—पालि, संस्कृत और तिब्बती/चीनी—में विभाजित है। बौद्ध धर्म की विभिन्न शाखाओं (हीनयान/थेरवाद, महायान और वज्रयान) के अपने विशिष्ट ग्रंथ हैं।
📚 बौद्ध धर्म के प्रमुख ग्रंथ कोश में त्रिपिटक (विनयपिटक, सुत्तपिटक, अभिधम्मपिटक), महायान सूत्र (प्रज्ञापारमिता सूत्र, लोटस सूत्र, लंकावतार सूत्र), अवदान साहित्य (दिव्यावदान, अशोकावदान), और तांत्रिक ग्रंथ (आर्य मंजूश्री मूल कल्प, हीवज्र तंत्र) सम्मिलित हैं।
बौद्ध धर्म के प्रमुख ग्रंथ
यहाँ बौद्ध धर्म के प्रमुख ग्रंथों की एक विस्तृत और वर्गीकृत सूची दी गई है:
⚖️1. पालि साहित्य: त्रिपिटक (Theravada Canon)
बौद्ध धर्म की सबसे प्राचीन और प्रमुख शाखा को थेरवाद (Theravada) कहा जाता है। थेरवाद शब्द का अर्थ है- स्थविरों का मत या बड़ों की शिक्षा। इसे बौद्ध धर्म का सबसे रूढ़िवादी रूप माना जाता है क्योंकि यह भगवान बुद्ध की मूल शिक्षाओं को उसी रूप में सुरक्षित रखने का प्रयास करता है जैसा वे 2500 साल पहले दी गई थीं। ‘थेरवाद बौद्ध धर्म’ के सबसे प्राचीन और प्रामाणिक ग्रंथ ‘त्रिपिटक’ कहलाते हैं। ‘पिटक’ का अर्थ है ‘टोकरी’। त्रिपिटक को पालिकैनन भी कहा जाता है। इसमें तीन पिटक सम्मिलित हैं:
| पिटक का नाम | विवरण |
| विनय पिटक | इसमें भिक्षुओं और भिक्षुणियों के लिए संघ के नियम और अनुशासन का वर्णन है। |
| सुत्त पिटक | इसमें भगवान बुद्ध के धार्मिक उपदेशों और संवादों का संग्रह है। (यह 5 निकायों में विभाजित है: दीघ, मज्झिम, संयुत्त, अंगुत्तर और खुद्दक)। |
| अभिधम्म पिटक | इसमें बौद्ध शिक्षाओं की दार्शनिक और मनोवैज्ञानिक व्याख्या की गई है। |
🏰 2. सुत्त पिटक के महत्वपूर्ण अंग
सुत्त पिटक के अंतर्गत आने वाले कुछ ग्रंथ स्वतंत्र रूप से बहुत प्रसिद्ध हैं:
- धम्मपद: बुद्ध के उपदेशों का संकलन, अत्यंत लोकप्रिय। इसे ‘बौद्धों की गीता’ कहा जाता है। इसमें बुद्ध के नैतिक विचारों का संग्रह है।
- जातक कथाएं: बुद्ध के पूर्व जन्मों की 547 कहानियों का संग्रह, जो नैतिकता सिखाती हैं।
- थेरीगाथा: बौद्ध भिक्षुणियों द्वारा रचित गीतों का संग्रह, जो महिला अध्यात्म का अनूठा उदाहरण है।
📌 3. पालि अनु-साहित्य (Non-Canonical Pali Literature)
त्रिपिटक के बाहर भी कुछ पालि ग्रंथ ऐतिहासिक और दार्शनिक रूप से महत्वपूर्ण हैं:
- मिलिंदपन्हो (Milinda Panha): यूनानी राजा मेनांडर (मिलिंद) और बौद्ध भिक्षु नागसेन के बीच दार्शनिक संवाद।
- दीपवंश और महावंश: श्रीलंका के प्राचीन इतिहास और बौद्ध धर्म के प्रसार का वर्णन करने वाले महाकाव्य। श्रीलंका में बौद्ध धर्म का इतिहास।
- विशुद्धिमग्ग: आचार्य बुद्धघोष द्वारा रचित, जिसे थेरवाद दर्शन का ‘छोटा विश्वकोश’ माना जाता है।
⚔️4. संस्कृत बौद्ध साहित्य (Mahayana Literature)
महायान परंपरा के उदय के साथ ही ग्रंथों की भाषा संस्कृत (या मिश्रित संस्कृत) हो गई।
👉 अ. महायान सूत्र (Mahayana Sutras)
महायान परंपरा में अनेक सूत्रों की रचना हुई:
- प्रज्ञापारमिता सूत्र: शून्यता के दर्शन और प्रज्ञा पर आधारित (जैसे- वज्रच्छेदिका सूत्र और हृदय सूत्र)।
- सद्धर्मपुण्डरीक सूत्र (Lotus Sutra): करुणा और सार्वभौमिक मुक्ति का संदेश। महायान का सबसे प्रभावशाली ग्रंथ, जो बुद्ध की अनंत करुणा को दर्शाता है।
- ललितविस्तर: बुद्ध के जीवन का विस्तृत वर्णन। बुद्ध की जीवनी का चमत्कारिक और अलंकृत वर्णन।
- लंकावतार सूत्र: योगाचार दर्शन और चित्त मात्र सिद्धांत। योगाचार दर्शन का प्रमुख ग्रंथ, जो चेतना (मन) की व्याख्या करता है।
- विमलकीर्ति निर्देश सूत्र – गृहस्थ साधक विमलकीर्ति की शिक्षाएँ।
- अवतंसक सूत्र (गंधव्यूह सूत्र) – बोधिसत्त्व मार्ग का विस्तृत वर्णन।
👉 ब. दार्शनिक और साहित्यिक ग्रंथ
- बुद्धचरित: महाकवि अश्वघोष द्वारा रचित बुद्ध की पहली पूर्ण जीवनी (महाकाव्य)।
- माध्यमिक कारिका: आचार्य नागार्जुन द्वारा रचित, जो ‘शून्यवाद’ के सिद्धांत का आधार है।
- अभिधर्मकोश: आचार्य वसुबन्धु द्वारा रचित बौद्ध दर्शन का व्यवस्थित विवरण। बौद्ध दर्शन का विश्लेषण।
✨5. अवदान साहित्य (Avadana Literature)
ये ग्रंथ बुद्ध और उनके शिष्यों के महान कार्यों (Heroic Deeds) पर आधारित हैं। ये कथाएँ (Edifying Tales) पुण्यकर्मों और उनके फल का वर्णन करती हैं-
- दिव्यावदान: 38 कथाओं का संग्रह।
- अशोकावदान – सम्राट अशोक के जीवन और बौद्ध धर्म प्रचार की कथा।
- कुणालावदान – अशोक के पुत्र कुणाल की कथा।
- महावस्तु: यह हीनयान और महायान के संक्रमण काल का ग्रंथ है, जिसमें बुद्ध को अलौकिक माना गया है।
- अवदानशतक: सौ उपदेशात्मक कहानियों का संग्रह।
📝 6. वज्रयान और तंत्र ग्रंथ (Tantric Texts)
बौद्ध धर्म के तांत्रिक स्वरूप (Vajrayana) के ग्रंथ ‘तंत्र’ कहलाते हैं। महायान के बाद वज्रयान परंपरा में अनेक तांत्रिक ग्रंथ रचे गए-
- आर्य मंजूश्री मूल कल्प: मंजूश्री बोधिसत्त्व की साधना और अनुष्ठान। मंत्र, मुद्रा और ऐतिहासिक भविष्यवाणियों का संग्रह।
- गुह्यसमाज तंत्र: गुप्त साधनाओं और योग पर आधारित। तांत्रिक साधना का आधारभूत ग्रंथ।
- कालचक्र तंत्र: खगोल विज्ञान और आंतरिक योग का संगम।
- हीवज्र तंत्र – वज्रयान साधना का प्रमुख ग्रंथ।
🎭 निष्कर्ष
बौद्ध धर्म के ग्रंथ केवल धार्मिक उपदेश नहीं हैं, अपितु वे भारतीय इतिहास, दर्शन और संस्कृति के अमूल्य स्रोत भी हैं। त्रिपिटक से लेकर महायान सूत्र और तांत्रिक ग्रंथों तक, इनका अध्ययन बौद्ध धर्म के विकास और विविधता को समझने के लिए आवश्यक है।
-डॉ. मोहनलाल गुप्ता



