Wednesday, January 28, 2026
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छन्द-प्रस्तार की गणनाएँ

महर्षि पिङ्गल के छन्दःसूत्रम् में मुख्य रूप से चार प्रकार की ‘Combinatorial’ गणनाएँ मिलती हैं, जिन्हें छन्द-प्रस्तार के अंतर्गत रखा जाता है।

ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य

पश्चिमी गणित में ‘Combinatorics’ का व्यवस्थित इतिहास 17वीं सदी (Pascal, Leibniz) से माना जाता है, लेकिन छन्दःशास्त्र के माध्यम से भारत में यह ज्ञान 200-300 ईसा पूर्व में ही अत्यंत विकसित हो चुका था। महर्षि पिंगल ने शून्य (Zero) का उपयोग भी इसी गणना के क्रम में किया था।

छन्दःशास्त्र (छंदः सूत्रम्) और Combinatorics (क्रमचय-संचय) का संबंध बहुत गहरा और ऐतिहासिक है। जिसे आज हम गणित की एक शाखा के रूप में पढ़ते हैं, प्राचीन भारत में उसका विकास छंदों के संभावित विस्तार (Permutations) को खोजने के लिए किया गया था।

चार प्रकार की गणनाएँ (Combinatorial)

पिङ्गल के छन्दःसूत्रम् में मुख्य रूप से चार प्रकार की ‘Combinatorial’ गणनाएँ मिलती हैं, जिन्हें छन्द-प्रस्तार के अंतर्गत रखा जाता है:

1. प्रस्तार (Permutations/Listing)

इसका अर्थ है—किसी निश्चित वर्ण या मात्रा वाले छंद के सभी संभव रूपों (Variations) को व्यवस्थित तरीके से लिखना।

  • यदि हमें 3 वर्णों वाला छंद लिखना है, तो कुल 23 = 8 रूप बनेंगे (जैसे: SSS, SSI, SIS, . . . .)।
  • पिंगल ने इसके लिए एक ‘Algorithm’ दिया था जिससे बिना कोई क्रम भूले सभी 8 गण लिखे जा सकें।

2. संख्या (Total Combinations)

यह गणना बताती है कि कुल कितने छंद बन सकते हैं।

  • वर्णिक छंद: यदि n वर्ण हैं, तो कुल छंद 2n होंगे।
  • मात्रिक छंद: इसके लिए पिंगल ने जो विधि दी, वह आज के Fibonacci Numbers के समान है।

3. नष्ट और उद्दिष्ट (Mapping and Inverse Mapping)

ये दो सबसे उन्नत (Advanced) गणनाएँ हैं:

  • नष्ट (Nashta): यदि आपको कोई संख्या दी जाए (जैसे—”6वें नंबर का छंद कौन सा है?”), तो गणितीय गणना से उस छंद का स्वरूप (S/I का क्रम) बता देना।
  • उद्दिष्ट (Uddishta): यदि आपको छंद का स्वरूप दिया जाए, तो यह बता देना कि वह सूची में किस क्रम (Index) पर आएगा।

4. मेरु प्रस्तार (Pascal’s Triangle)

जैसा कि हमने पहले चर्चा की, मात्रामेरु का उपयोग यह जानने के लिए किया जाता था कि $n$ अक्षरों वाले छंदों में:

  • कितने छंदों में 1 गुरु होगा?
  • कितने छंदों में 2 गुरु होंगे?
  • यह सीधे तौर पर Binomial Coefficients  (nCr) की गणना है।

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