Sunday, December 4, 2022

पाकिस्तान में सूफी दरगाहों पर खूनी हमलों का इतिहास

सदियों से पाकिस्तान सूफी संतों की जमीन रहा है किंतु आज का पाकिस्तान दुनियाभर के आतंकवादियों की शरणगाह बन चुका है। वहाँ मुहाजिरों, शियाओं और अहमदियों के साथ-साथ सूफी समुदाय भी सुन्नी आतंकी संगठनों के निशाने पर है। सूफियों को पाकिस्तान में काफिर और मूर्तिपूजक माना जाता है।

पाकिस्तान में सूफियों की सभी दरगाहें आतंकवादियों के निशाने पर हैं। अहमदियों की तरह सूफियों को भी नागरिक अधिकार और सुविधाएं नहीं दी जाती हैं। पाकिस्तान के सबसे खतरनाक आतंकी संगठन तहरीके तालिबान ने 2005 से वर्ष 2017 तक 30 सूफी दरगाहों को निशाना बनाया जिनमें से कई दरगाहें 100 साल से अधिक पुरानी हैं।

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इस्लामाबाद में बड़ी इमाम दरगाह, मोहम्मद एजेंसी में हाजी साहब तुरंगजई की दरगाह, पेशावर के चमखानी में अब्दुल शकूर बाबा की दरगाह समेत कई मकबरों, पेशावर में 17वीं सदी के सूफी कवि अब्दुल रहमान बाबा, डेरा गाजी खान में साखी सरवर दरगाह, पाकपत्तन शहर की सूफी दरगाह, चमकानी में फंडू बाबा की दरगाह, सूफी हजरत बाबा फरीद, सूफी अब्दुल्लाह शाह गाजी की दरगाह सहित अनेक दरगाहों पर आतंकी हमले हो चुके हैं।

इन हमलों में बड़ी संख्या में सूफी मत में विश्वास रखने वाले मुसलमान मारे गए। कभी अफगानिस्तान भी सूफी पीर औलिया और दरवेशों का केंद्र था लेकिन तालिबानियों ने उन सब को मिटा दिया। फरवरी 2017 में पाकिस्तान के सिन्ध प्रांत में लाल शाहबाज कलंदर की दरगाह पर हुए आतंकी हमले में 100 से अधिक लोग मारे गए और 250 लोग घायल हुए थे।

इससे पहले बलूचिस्तान प्रांत की मशहूर सूफी दरगाह शाह नूरानी पर आतंकी हमले में 52 लोगों की मौत हुई थी। वास्तव में ये आतंकी हमले वहाबी संप्रदाय की सूफियों के खिलाफ चल रही जंग का हिस्सा हैं। भारत में भी पाकिस्तानी आतंकवादियों ने चरारे शरीफ मजार तथा हजरत बल दरगाह सहित अनेक स्थानों पर बड़े हमले किए हैं।

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