Sunday, June 23, 2024
spot_img

जिन्ना भारत का विभाजन चाहता था न कि पंजाब और बंगाल का

मुहम्मद अली जिन्ना को जिस पाकिस्तान की चाहत थी उसके अंतर्गत पांच नदियों से सिंचित विशाल पंजाब में लहलहाते गेहूं और गन्ने के खेत और गंगा तथा ब्रह्मपुत्र के जलों से सिंचित बंगाल में लहलहाते चावल, गन्ने और पटसन के खेत शामिल थे। उसमें पंजाब के लाहौर, अमृतसर, रावपिण्डी और कराची तथा बंगाल के कलकत्ता और ढाका जैसे विशाल व्यावसायिक एवं औद्योगिक नगर शामिल थे।

पंजाब और बंगाल के बल पर वह खैबर-पख्तून, बलोचिस्तान तथा सिंध के निर्धन क्षेत्रों के लोगों का पेट भरना चाहता था। सरदार पटेल ने जिन्ना की इस कमजोरी को पकड़ लिया था और वे भारत का विभाजन रोकने के लिए पंजाब और बंगाल का विभाजन करने की बात करने लगते थे। उनका तर्क था कि पंजाब और बंगाल के मुसलमानों के साथ इन राज्यों के हिन्दू पाकिस्तान को नहीं सौंपे जा सकते।

TO PURCHASE THIS BOOK, PLEASE CLICK THIS PHOTO.

जब माउण्टबेटन ने जिन्ना से भेंट की तो वायसराय ने उसे बताया कि वे भारत का विभाजन नहीं कर सकते। इस पर जिन्ना ने कहा कि विभाजन तो उन्हें करना ही होगा। ई.1938-39 में उन लोगों ने (हिन्दुओं ने) हमारे साथ जो किया था, उसके कारण उन पर हमें भरोसा नहीं। आपके जाने के बाद हम कुछ चुने हुए हिन्दुओं के रहम पर रह जाएंगे। हमें दबाया जाएगा। हमारे साथ बहुत बुरा होगा।

माउण्टबेटन ने जिन्ना को भरोसा दिलाना चाहा कि- ‘नेहरू और उनके साथियों का ऐसा करने का कोई इरादा नहीं है। फिर भी यदि आपको पाकिस्तान चाहिए तो मुझे पंजाब और बंगाल का विभाजन करना होगा। आप पंजाब और बंगाल के हिन्दुओं को पाकिस्तान नहीं ले जा सकते।’

 जिन्ना ने कहा- ‘आप यह नहीं समझते कि पंजाब एक राष्ट्र है, बंगाल एक राष्ट्र है। एक आदमी पंजाबी या बंगाली पहले है, बाद में हिन्दू या मुसलमान। अगर आप ये सूबे हमें देंगे तो किसी भी हालत में उनका बंटवारा नहीं करेंगे। इससे खून खराबा होगा।’

माउण्टबेटन ने कहा- ‘हिन्दू-मुसलमान, पंजाबी-बंगाली से पहले वह भारतीय है। इसलिए आप भारत के एक बने रहने के पक्ष में दलील दे रहे हैं। ….. यदि आप कैबीनेट मिशन प्लान को मान लेते तो आपको बहुत अधिक स्वायत्त अधिकार मिल जाते। पंजाब और बंगाल अपना शासन स्वयं संभालते। संयुक्त राष्ट्र अमरीका से भी अधिक स्वायत्तता होगी। फिर आप अल्पसंख्यक जनता को मनचाहे ढंग से दबाने की खुशी भी हासिल कर सकेंगे क्योंकि आप केन्द्र को हस्तक्षेप करने से टोक सकेंगे। क्या यह बात आपको अनुकूल लगती है?’

जिन्ना ने कहा- ‘नहीं! मैं भारत का एक हिस्सा नहीं बनना चाहता। हिन्दू राज्य के अधीन होने से तो मैं सब-कुछ खो देना ज्यादा पसंद करूंगा।’

Related Articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Stay Connected

21,585FansLike
2,651FollowersFollow
0SubscribersSubscribe
- Advertisement -spot_img

Latest Articles

// disable viewing page source