Wednesday, June 26, 2024
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142. लाल किले में शाही महिलाओं का शील हरण किया गया!

जब अहमदशाह अब्दाली आगरा का अभियान बीच में रोक कर दिल्ली लौटा और महाराजा सूरजमल ने उसे फूटी कौड़ी भी नहीं दी तो अहमदशाह अब्दाली के गुस्से का पार नहीं रहा। उसका सारा गुस्सा दिल्ली वालों पर कहर बन कर टूटा। उसे हर समय धरती पर बहते हुए लाल इंसानी खून, सुंदर स्त्रियों और पीले चमचमाते हुए सोने की हवस बनी रहती थी। इस काल की निर्धन दिल्ली अब्दाली की हवस पूरी नहीं कर सकती थी किंतु अब्दाली अपनी हवस पूरी करना अच्छी तरह जानता था।

जदुनाथ सरकार ने अपनी पुस्तक ‘फॉल ऑफ मुगल एम्पायर’ में लिखा है कि अब्दाली के दिल्ली आने से कुछ माह पहले जब मराठों ने इमादुलमुल्क से युद्ध-क्षति-पूर्ति के चालीस लाख रुपए मांगे थे तो इमादुलमुल्क ने मरहूम बादशाह अहमदशाह बहादुर की माँ ऊधमबाई के भाई-बहिनों और शाही परिवार के अन्य सदस्यों की विपुल सम्पत्ति जब्त कर ली थी और गड़े हुए धन का पता लगाने के लिए स्त्रियों पर बड़े अत्याचार किए थे जिनके कारण शाही परिवार के सदस्यों का धन लुट चुका था। पूरी तरह कंगाल हो चुका बादशाह आलमगीर (द्वितीय) भी अहमदशाह अब्दाली को एक करोड़ रुपए दे चुका था।

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जब अहमदशाह अब्दाली ने दिल्ली में प्रवेश किया तो इस बार भी पहले की ही तरह बाजारों को पूरी तरह बंद कर दिया गया। बाजारों एवं सड़कों पर दोनों तरफ अब्दाली के सिपाही पंक्ति बनाकर खड़े हो गए। सड़कें और गलियां सूनी हो गईं। लोगों को खिड़कियों से भी झांकने की मनाही थी। बादशाह आलमगीर ने पुनः लाल किले के दरवाजे पर खड़े होकर अब्दाली का स्वागत किया।

पूरे आलेख के लिए देखें यह वी-ब्लॉग-

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