Wednesday, February 28, 2024
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9. महान् रोमन साम्राज्य का उदय

प्रिन्सेप्स ऑगस्टस ऑक्टेवियन सीजर

जूलियस सीजर की हत्या ने रोम गणराज्य के पतन की गति को और भी तीव्र कर दिया। सीजर के दत्तक पुत्र ऑगस्टस ऑक्टेवियन जो कि सीजर के एक भाई का पौत्र था, ने तथा जूलियस सीजर के मित्र मार्क एण्टोनी ने जूलियस की हत्या का बदला लिया। सीजर के महल में उसकी रानी के रूप में रह रही क्लियोपैट्रा ने रोम के शासन पर अधिकार करने का प्रयास किया किंतु ऑक्टेवियन ने विद्रोह कर दिया जिसके कारण क्लियोपैट्रा रोम छोड़कर मिस्र चली गई।

ऑक्टेवियन रोमन सीनेट का सदस्य था। उसने  जूलियस सीजर की समस्त संतानों को मार दिया तथा कुछ वर्ष बाद सीनेट के दूसरे प्रमुख सदस्य मार्क एन्टोनी (क्लियोपैट्रा के अंतिम पति) को भी परास्त करके आत्मघात करने पर विवश कर दिया। इसके बाद ऑक्टेवियन ‘ऑगस्टस सीजर’ के नाम से सीनेट का प्रमुख बन गया तथा व्यावहारिक रूप में रोमन गणराज्य का एकछत्र राजा बन गया। इसी के साथ महान् रोम गणराज्य इतिहास के नेपथ्य में चला गया और राजतंत्र का उदय हो गया।

ऑक्टेवियन ने अपने नाम के साथ सीजर शब्द का प्रयोग किया ताकि लोग उसे जूलियस सीजर की ही शासन परम्परा का हिस्सा समझें। आगे चलकर ‘सीजर’ पारिवारिक उपनाम की बजाय सम्राट की पदवी के रूप में प्रयुक्त होने लगा। इस प्रकार 16 जनवरी ई.पू.27 को ऑक्टेवियन रोमन साम्राज्य का पहला निरंकुश राजा बन गया।

सीनेट काम करती रही किंतु उसके हाथों में शासन की कोई शक्ति नहीं रह गई और रोम गणराज्य से साम्राज्य बनने की तरफ अग्रसर हुआ। प्रारम्भ में उसने ‘प्रिन्सेप्स सीनेटुअस’ की उपाधि धारण की जिसका अर्थ होता है ‘सीनेट में सबसे प्रथम।’ कुछ समय बाद उसने ‘प्रिन्सेप्स सिविटैटिस’ की उपाधि धारण की जिसका अर्थ होता है ‘नागरिकों में सबसे प्रथम।’

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कुछ समय बाद उसने ‘इम्परेटर‘ की उपाधि धारण की जिसका अर्थ होता है- ‘आदेश देने वाला।’ अब वह ‘सीजर डिवि फिलियस ऑगस्टस’ के नाम से रोम का शासक बना। उसने अपने राज्य को ‘किंगडम’ (राज्य) न कहकर ‘प्रिंसीपेट’ कहा किंतु शासन के अधिकार पूरी तरह अपने अधीन कर लिए और निरंकुश राजा बन गया।

ऑगस्टस के पिता जूलियस सीजर ने कभी भी स्वयं को ‘किंग’ अर्थात् राजा नहीं कहा उसी तरह ऑगस्ट सीजर ने भी स्वयं को ‘किंग’ नहीं कहा किंतु इस शब्द का प्रयोग नहीं करने के पीछे दोनों के कारण अलग-अलग थे। जूलियस सीजर रोमन गणराज्य की प्रचलित परम्परा के कारण स्वयं को ‘किंग’ कहलाने में संकोच करता था जबकि ऑगस्ट सीजर ‘किंग’ के पद को अपने योग्य नहीं समझता था।

इसलिए उसने ‘इम्परेटर’ अर्थात् ‘आदेश देने वाला’ की उपाधि ग्रहण की। यही शब्द अंग्रेजी भाषा में ‘एम्परर’ बन गया। ऑक्टेवियन ने 44 साल तक शासन किया। इतिहासकारों एवं समकालीन कवियों ने उसके शासनकाल को रोम के इतिहास का स्वर्ण-युग कहा है। उनके अनुसार उसके राज्य में भले लोगों को पुरस्कार एवं अपराधियों को कड़ा दण्ड दिया जाता था। इसी रोमन सम्राट के शासनकाल में रोमन साम्राज्य के नासरत नामक शहर में ईसा मसीह का जन्म हुआ था।

जूलियस सीजर की हत्या, उसके बाद उसके शत्रुओं की हत्या, मार्क एंटोनी द्वारा आत्मघात, जूलियस के समस्त पुत्र-पुत्रियों की हत्या के सिलसिले के कारण रोम में गृहयुद्ध छिड़ गया। दूसरे देशों में स्थित बहुत से रोमन गवर्नर एवं वहाँ के राजा रोम से अलग हो गए। इस कारण रोमन प्रातों (रीजन) की संख्या 50 से घटकर केवल 28 रह गई।

इम्प्रेटर ऑगस्टस सीजर ने अपनी सेनाओं को इल्लीरिया, मोएसिया, पैन्नोनिया और जर्मेनिया नामक राज्यों पर चढ़ाई करने के आदेश दिए। उसके प्रयासों से रोमन साम्राज्य फिर से फैल गया तथा राइन और डैन्यूब नदियाँ उत्तर में रोमन साम्राज्य की नई सीमा-रेखा बन गईं।

उसने यूरोप के अधिकांश भागों, उत्तरी अफ्रीका तथा पश्चिमी एशिया के भूभागों को भी जीत लिया। ऑक्टेवियन के काल में रोम में वर्जिल, आविद, होरेस आदि कई विख्यात लैटिन लेखक हुए जिन्होंने ऑक्क्टेवियन के शासन की मुक्त कण्ठ से प्रशंसा की है।

इसका कारण यह है कि ऑक्टेवियन से पहले के रोमन गणराज्य में सीनेट के सदस्यों एवं सेनापतियों के बीच गहरे संघर्ष एवं घृणित षड़यंत्र चला करते थे जिन पर ऑक्टेवियन ने पूरी तरह विजय प्राप्त करके राज्य में शांति स्थापित कर दी थी। इस कारण रोमन साम्राज्य में व्यापार फलने-फूलने लगा था और जन-सामान्य पर होने वाले अत्याचारों में भारी कमी आई थी।

रोमन भेड़ें देती हैं साल में दो बार बच्चे

रोमन महाकवि ‘वर्जिल’ ने इसी काल में ‘ईनिद’ नामक काव्य की रचना की जिसे इटली का राष्ट्रीय महाकाव्य माना जाता है। वर्जिल ने इस महाकाव्य में इस काल में इटली की सम्पन्नता की प्रशंसा करते हुए लिखा है-

ईरान अपने सुंदर और घने वनों सहित,

अथवा गंगा अपनी जलप्लावित लहरों सहित,

अथवा हरमुश नदी जिसके कणों में सोना मिलता है,

इनमें से कोई इटली की समता नहीं कर सकते,

इटली जहाँ सदा बसंत रहता है,

जहाँ भेड़ें वर्ष में दो बार बच्चे देती हैं और

जहाँ वृक्ष वर्ष में दो बार फल देते हैं।

दुनिया में छा गए इम्परेटर और सीजर

ऑक्टेवियन ने सीनेट में तथा प्रजा के बीच स्वयं को इतना महत्त्वपूर्ण बना लिया कि प्रजा के बीच वह देवता के रूप में स्थापित हो गया। उसके जीवन काल में ही उसकी पूजा होने लगी। इस कारण ‘इम्परेटर’ की उपाधि ‘किंग’ से भी ऊँची समझी जाने लगी। कुछ समय बाद ‘इम्परेटर’ शब्द ‘एम्परर’ में बदल गया तथा ‘सीजर’ को ‘एम्परर’ का पर्यायवाची माना जाने लगा।

इस कारण यूरोप के बहुत से देशों के राजा स्वयं को एम्परर एवं सीजर कहलाना पसंद करने लगे। सीजर शब्द ही जर्मनी में ‘कैसर’ तथा रूस में ‘जार’ बन गया। बाद में जब रोम साम्राज्य का विभाजन हुआ और पूर्वी रोमन साम्राज्य मुसलमानों के अधीन चला गया तो कुस्तुंतुनिया का मुस्लिम शासक स्वयं को ‘कैसेरे रूम’ कहता था। इंग्लैण्ड की क्वीन विक्टोरिया तथा एम्परर जॉर्ज पंचम को ‘कैसरे हिन्द’ की उपाधि दी गई थी।

सम्राट टाइबेरियस

19 अगस्त 14 को 75 वर्ष की आयु में ऑगस्टस सीजर की मृत्यु हो गई तथा टाइबेरियस रोम का इम्प्रेटर हुआ। वह ऑगस्टस सीजर की तीसरी पत्नी के, पहले विवाह से पैदा हुआ था। अर्थात् उसका पिता ऑगस्टस सीजर नहीं था। टाइबेरियस का शासन अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण रहा। टाइबेरियस के शासनकाल में येरूशलम में ईसा मसीह को उपद्रवी एवं धर्म-विरोधी घोषित करके सूली पर लटकाया गया था।

Dr. Mohanlal Gupta
Dr. Mohanlal Gupta
Dr. Mohan Lal Gupta is a renowned historian from India. He has written more than 100 books on various subjects.

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