Wednesday, February 21, 2024
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148. भारत के घावों से रक्त निकालने फिर आ गया अहमदशाह अब्दाली!

हम चर्चा कर चुके हैं कि ई.1756 में अहमदशाह अब्दाली ने अपने पुत्र तिमूरशाह को लाहौर का सूबेदार बनाया था तथा मुगल बादशाह आलमगीर (द्वितीय) ने तिमूरशाह से अपनी पुत्री जौहरा बेगम का विवाह करके तिमूरशाह को लाहौर का सूबेदार स्वीकार कर लिया था किंतु ई.1758 में मराठों ने तिमूरशाह को लाहौर से मार भगाया तो अहमदशाह अब्दाली के लिए आवश्यक हो गया कि वह एक बार फिर भारत पर आक्रमण करे।

ईस्वी 1760 में अहमदशाह अब्दाली ने फिर से दिल्ली का रुख किया। इस बार वह पहले से भी अधिक विशाल सेना लेकर आया।

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इस बार उसके तीन लक्ष्य थे। उसका पहला लक्ष्य था मीर बख्शी इमादुलमुल्क जिसने अब्दाली द्वारा नियुक्त नजीब खाँ को मीर बख्शी के पद से हटा दिया था। अहमदशाह का दूसरा लक्ष्य था मराठा सरदार सदाशिव राव भाउ जिसने तिमूरशाह को लाहौर से मारकर भगा दिया था। अब्दाली का तीसरा लक्ष्य था महाराजा सूरजमल जाट जिसने पिछले अभियान में 10 लाख रुपए देने का वादा किया था किंतु उसने अब्दाली को फूटी कौड़ी भी नहीं दी थी।

जिस समय अहमदशाह अब्दाली अफगानिस्तान से रवाना हुआ, ठीक उसी समय दक्षिण भारत में स्थित मैसूर राज्य के शासक हैदर अली ने दक्षिण की ओर से मराठों पर आक्रमण किया। हैदरअली ने कुछ ही समय पहले मैसूर के हिन्दू शासक एवं उसकी माता को बंदी बनाकर मैसूर का राज्य हड़प लिया था।

पूरे आलेख के लिए देखें यह वी-ब्लॉग-

Dr. Mohanlal Gupta
Dr. Mohanlal Gupta
Dr. Mohan Lal Gupta is a renowned historian from India. He has written more than 100 books on various subjects.

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