Tuesday, January 20, 2026
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शाहजहाँ की बीमारी (10)

शाहजहाँ (Shahjahan) की बीमारी के समाचार लाल किले (Red Fort) की दीवारों से बाहर निकलकर पूरी सल्तनत में तेजी से फैलते जा रहे थे। ये खबरें मुगलियां शहजादों को तख्त पर कब्जा करने के लिए उकसाने वाली थीं।

शाहजहाँ (Shahjahan) ने न केवल पूरे हिन्दुस्तान पर मजबूती से नियंत्रण कर रखा था अपितु मारवाड़ (Marwar or Jodhpur), आम्बेर (Amber or Amer), बूंदी (Bundi) तथा किशनगढ़ (Kishangarh) के राजाओं के बल पर लगभग आधे मध्य एशिया पर भी नियंत्रण कर लिया था। फिर भी शाहजहाँ  अपने हरम को और अपने पुत्रों पर नियंत्रण नहीं रख सका था। जिस प्रकार वह अपनी उद्दाम वासनाओं पर नियंत्रण नहीं रख सका था, उसी प्रकार वह अपने शहजादों में बढ़ती दुश्मनी और शहजादियों में बढ़ती सत्ता की हवस पर भी नियंत्रण नहीं रख सका था।

शाहजहाँ (Shahjahan) की बीमारी की खबरें लाल किले (Red Fort) से बाहर निकलकर रियाया में फैल जाने से परिस्थितियां पूरी तरह शाहजहाँ के नियंत्रण से बाहर थीं और समय इतना आगे निकल गया था कि उसके किए कुछ भी ठीक होने वाला नहीं था। जाने क्यों उसे ऐसा लगता था कि अब वह घड़ी आने ही वाली है जब उसके शहजाद नंगी तलवारें लेकर एक दूसरे का खून बहाने के लिए निकल पड़ेंगे और उन सबकी लाशें धरती पर पड़ी होंगी।

बूढ़े शाहजहाँ की आंखों में रह-रह कर अपने भाइयों और चाचाओं के शव घूम जाते थे जिन्हें खुद शाहजहाँ ने मौत के मुंह में पहुंचाया था। ऐसी ही जाने कितनी ही भयावह बातें सोच-सोच कर बूढ़ा शाहजहाँ बार-बार बीमार पड़ जाता था। आगरा आकर वह फिर से बीमार पड़ गया। भरपूर इलाज के बावजूद उसकी बीमारी में दिन पर दिन वृद्धि होती जा रही थी।

पिछली बार के अनुभव के कारण इस बार शाहजहां (Shahjahan) ने झरोखा दर्शन देना बंद नहीं किया। चाहे बहुत थोड़ी देर के लिए ही सही बादशाह लाल किले (Red Fort) के झरोखे से रियाया के सामने जलवा अफरोज जरूर होता था।

इस रोचक इतिहास का वीडियो देखें-

शाहजहाँ की बीमारी बढ़ती जा रही थी और एक दिन बादशाह के लिए शैय्या से उठकर खड़ा होना भी कठिन हो गया। उस दिन से उसने झरोखा दर्शन देना भी बंद कर दिया।

एक दिन उसने राजधानी में मौजूद अपने तमाम अमीरों, उमरावों, सूबेदारों, अहलकारों और हिन्दू सरदारों को बुलाकर कहा- ‘हमने पिछले पच्चीस साल से शहजादे दारा शुकोह (Dara Shikoh or Dara Shukoh) को वली-ए-अहद घोषित कर रखा है। हमारी तबियत नासाज रहती है तथा सल्तनत के बहुत से फैसले तुरंत लेने होते हैं। अतः आप सब आज से वली-ए-अहद शहजादे दारा को मुगलिया तख्त का अगला वारिस समझें तथा केवल उसके आदेश ही स्वीकार करें। सल्तनत का काम वैसे ही चलता रहे, जैसे आज तक चलता आया है।’

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दारा शिकोह को सल्तनत के सारे अधिकार दिए जाने की खबर आनन-फानन में न केवल लाल किले (Red Fort) में और राजधानी आगरा में अपितु पंख लगाकर पूरी सल्तन में फैल गई। जैसे ही बादशाह ने शहजादे दारा शिकोह (Dara Shikoh) को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया, उसके शेष तीनों शहजादों (Shah Shuja, Aurangzeb, Murad Bakhsh) और उनके पक्ष की शहजादियों (Jahanara Begum, Roshanara Begum, Gauharara Begum, Hoshmand Banu Begum, and Nithar Begum) के सब्र का बांध टूट गया और वे दारा शिकोह तथा जहाँआरा के खून के प्यासे हो उठे। आगरा के विशाल लाल किले (Red Fort) में अकेली जहाँआरा (Jahanara) ही ऐसी थी जिसे इस खबर को पाकर प्रसन्नता हुई थी। जिस प्रकार दारा शिकोह अपने पिता शाहजहाँ से थोड़ा-बहुत प्रेम करता था, उसी प्रकार शहजादी जहाँआरा भी अपने पिता शाहजहाँ (Shahjahan) से सहानुभूति रखती थी और केवल वही थी जो अपने पिता की मुश्किलों को समझती थी तथा उन्हें सुलझाने में अपने भाई दारा शिकोह की मदद करती थी। दारा शिकोह अपने पिता का सबसे बड़ा पुत्र था। वह योग्य, उदार, विनम्र तथा दयालु था। दारा की लाख कमजोरियों को जानने के बावजूद शाहजहाँ उसे सर्वाधिक चाहता था तथा उसे अपने पास ही रखता था। राजधानी में रहने के कारण दारा, सल्तनत की समस्याओं से अच्छी तरह परिचित था। उसे जितना अधिक प्रशासकीय अनुभव था, और किसी शहजादे को नहीं था। रियाया भी दारा शिकोह को चाहती थी।

यद्यपि उस काल में मुगल सल्तनत (Mughal Sultanate) में 95 प्रतिशत हिन्दू तथा 5 प्रतिशत मुसलमान थे तथापि रियाया से आशय केवल मुस्लिम जनसंख्या से होता था। यह बात मुस्लिम अमीरों को बहुत अखरती थी कि दारा शिकोह, मुस्लिम रियाया के साथ-साथ हिन्दुओं में भी बहुत लोकप्रिय था।

राजधानी में रहने के कारण दारा सल्तनत की समस्याओं से अच्छी तरह परिचित था। उसे जितना अधिक प्रशासकीय अनुभव था, और किसी शहजादे को नहीं था। दारा की सबसे बड़ी कमजोरी यह थी कि उसे दूसरे शहजादों की भांति युद्ध लड़ने का व्यापक अनुभव नहीं था। दारा के तीनों छोटे भाई एक दूसरे के खून के प्यासे होने के बाद भी दारा शिकोह को अपना पहला शत्रु मानते थे। क्योंकि तीनों शहजादों को उसी से सर्वाधिक खतरा था। वह बरसों से राजधानी दिल्ली में जमा हुआ था तथा उसने अमीरों के दिलों में भी जगह बना ली थी।

इसलिए लाल किले (Red Fort) में रहने वाला दारा शिकोह बाकी के तीनों शहजादों का सम्मलित शत्रु था। उनमें से प्रत्येक शहजादा यह चाहता था कि किसी तरह दारा शिकोह मर जाए शेष दो भाइयों से तो वह आसानी से निबट लेगा। ऐसा नहीं था कि दारा को अपने छोटे भाइयों और बहिनों के रवैये की जानकारी नहीं थी।

दारा कभी-कभी दबी जुबान से अपने पिता से उनकी शिकायत भी करता था किंतु शाहजहाँ की बीमारी शाहजहाँ (Shahjahan) को सही निर्णय नहीं लेने देती थी और पिता की इच्छा के बिना दारा किसी के भी खिलाफ कोई भी कार्यवाही करने में असमर्थ था। 

-डॉ. मोहनलाल गुप्ता

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