Wednesday, February 28, 2024
spot_img

152. जाटों की राजमाता ने कहा मराठा सैनिक मेरे बच्चे हैं इन्हें मत मारो!

जनवरी 1757 की कड़कड़ाती ठण्ड में पानीपत के मैदान से जान बचाकर भागे हुए मराठा सैनिकों ने भरतपुर राज्य का मार्ग पकड़ा। उनके पास न तो खाने को अनाज था और न पीने को पानी। उनके कपड़े फट गए थे, बहुतों के पैरों में तो जूते भी नहीं बचे थे। सर्द अंधेरी रातों में भीषण जाड़े एवं पाले में ठिठुरने के अतिरिक्त उनके पास और कोई उपाय नहीं था।

पानीपत से पूना एक हजार मील दूर था। इतनी दूर तक भूखे-नंगे और पैदल चलते हुए पूना पहुंच पाना एक असंभव सा काम था। फिर भी मनुष्य जीना चाहता है

TO PURCHASE THIS BOOK, PLEASE CLICK THIS PHOTO

और जीने के लिए हर संभव संघर्ष करना चाहता है। वह अपने घर से कितनी भी दूर क्यों न हो, हर हाल में अपनी धरती और अपने लोगों के बीच पहुंचना चाहता है। हजारों मराठा सैनिक, तीर्थयात्री एवं अन्य स्त्री-पुरुष तथा बच्चे भी इसी भावना के वशीभूत होकर महाराष्ट्र की तरफ भागे जा रहे थे।

जो मराठे कुछ दिन पहले तक अपने समक्ष किसी को कुछ गिनते नहीं थे, उन भागते हुए मराठा सैनिकों के हथियार, उनकी जेबों में रखे हुए रुपए और वस्त्र, उत्तर भारत के निर्धन लोगों ने छीन लिये। मराठा सैनिकों द्वारा पूर्व के काल में उत्तर भारत के सैंकड़ों गांव लूटे गए थे इसलिए इस क्षेत्र के लोग मराठों को पसंद नहीं करते थे और उन पर दया करने को तैयार नहीं थे।

पूरे आलेख के लिए देखें यह वी-ब्लॉग-

Dr. Mohanlal Gupta
Dr. Mohanlal Gupta
Dr. Mohan Lal Gupta is a renowned historian from India. He has written more than 100 books on various subjects.

Related Articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Stay Connected

21,585FansLike
2,651FollowersFollow
0SubscribersSubscribe
- Advertisement -spot_img

Latest Articles

// disable viewing page source