Sunday, April 12, 2026
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मुगल हरम (6)

मुगल हरम (Mughal Harem) शहंशाह अकबर (Akbar The Great or Akbar Shah) के समय से ही मुगल शहजादियों से भरने लगा था क्योंकि अकबर ने शहजादियों के विवाह करने की परम्परा बंद कर दी थी। मुगल हरमों में अपनाई गई इस नितांत अमानवीय परम्परा का एक खास कारण था।

अकबर की सात बहनें मुगल हरम (Mughal Harem) में रहती थीं, बक्शीबानू बेगम (Bakshi Banu Begum), अकीका सुल्ताना बेगम (Akika Sultana Begum), अमीना बानू बेगम (Amina Banu Begum), बख्त उन्निसा बेगम (Bakht-un-Nisa Begum), सकीना बानू बेगम (Sakina Banu Begum), जहान सुल्ताना बेगम (Jahan Sultana Begum) तथा फख्र उन्निसा बेगम (Fakhr-un-Nisa Begum)। इन सातों के पति मिर्जा (Mirza) कहलाते थे और ये सातों मिर्जा स्वयं को शहंशाह अकबर के बराबर समझते थे।

वे अकबर (Akbar) के साथ न केवल उद्दण्डता पूर्वक व्यवहार करते थे अपितु समय मिलते ही अकबर की सल्तनत उखाड़कर अपनी सल्तनत कायम करने के लिए बगावत करते थे। अकबर अपनी बहिनों के लिहाज के कारण अपने बहनोइयों को पकड़कर न तो मार ही पाता था और न उन्हें कैद कर पाता था।

अंत में तंग आकर जब तक अकबर ने अपने बागी बहनोइयों को मार नहीं डाला, तब तक उनके द्वारा की जाने वाली बगावत समाप्त नहीं हुई। इस कारण अकबर ने नियम बना दिया कि भविष्य में मुगल हरम की शहजादियों के विवाह नहीं किए जाएंगे।

इसी नियम पर चलते हुए अकबर (Akbar) ने अपनी चारों पुत्रियों आराम बानू बेगम (Aram Banu Begum), खानम सुल्तान बेगम (Khanam Sultan Begum), शकर उसनिसा बेगम (Shakar-un-Nisa Begum) तथा मेहरुन्निसा बेगम (Mehrunnisa Begum) के विवाह नहीं किए थे। ये चारों शहजादियां मुगल हरम (Mughal Harem) में रहती थीं।

इस रोचक इतिहास का वीडियो देखें-

अकबर के पुत्र जहाँगीर (Jahangir) ने भी अपनी तीनों शहजादियों माजियार बेहरूज (Majiyar Behrouz), बहार बानू बेगम (Bahar Banu Begum) तथा निठार बेगम (Nithar Begum) की शादियां नहीं कीं। फिर भी जहाँगीर (Jahangir) के पुत्र शाहजहाँ (Shahjahan) को अपने राज्यारोहण से पहले अपनी सौतेली बहिन लाडली बेगम के पति से निबटना पड़ा था।

लाडली बेगम (Ladli Begum) का किस्सा इस प्रकार से है- जहाँगीर ने अपनी प्रेयसी नूरजहाँ (Noor Jahan) के पति शेरअफगन (Sher Afghan) को मारकर नूरजहाँ से विवाह किया था। शेरअफगन से नूरजहाँ की एक बेटी थी जिसे लाडली बेगम कहा जाता था। जब नूरजहाँ को बंगाल से आगरा लाया गया तो लाडली बेगम भी उसके साथ जहाँगीर के हरम (Mughal Harem) में चली आई थी तथा उसका लालन-पालन भी शहजादियों की तरह हुआ था।

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जब लाडली बेगम जवान हुई तो नूरजहाँ (Noor Jahan) ने लाडली बेगम का विवाह अपने पति जहाँगीर की एक अन्य बेगम के पेट से जन्मे पुत्र शहरयार (Shahryar) से कर दिया। जब जहाँगीर बीमार पड़ा तो शाहजहाँ (Shahjahan) जो कि उन दिनों खुर्रम (Khurram) के नाम से जाना जाता था, शहरयार को मारकर ही बादशाह बन सका था। हालांकि शहरयार को तो खुर्रम के हाथों इसलिए भी मरना ही था क्योंकि वह खुर्रम का सौतेला भाई भी था तथा शाहजहाँ जानता था कि उसे अपने अठारह चाचाओं और भाइयों को मारे बिना मुगलों का तख्त हासिल नहीं होने वाला था। इसलिए शाहजहाँ ने अपने दादा अकबर (Akbar) द्वारा शहजादियों का विवाह न करने के सम्बन्ध में बनाए गए नियम को अपने समय में भी सख्ती से लागू कर रखा था और अपनी चारों शहजादियों में से किसी का विवाह नहीं किया था। ये चारों शहजादियां मुगल हरम पर अपनी-अपनी तरह से शासन करती थीं। इस नियम की पालना करने से बादशाह को जंवाइयों की बगावत की संभावना से और भावी बादशाह को बहनोइयों की बगावत की समस्या से तो छुटकारा मिल गया था किंतु एक नई समस्या पैदा हो गई थी।

अब शहजादियाँ जीवन भर बादशाह के हरम (Mughal Harem) का हिस्सा बनकर रहतीं थीं और वे भावी बादशाह के लिए होने वाले उत्तराधिकार के युद्ध में खुलकर भाग लेती थीं। शाहजहाँ का हरम भी इस खतरनाक समस्या से संक्रमित था। उसकी चारों शहजादियों भी अब जवान हो गई थीं। और उन्होंने भी अपने भाइयों के साथ मिलकर मुगलिया राजनीति के खूनी खेल में भाग लेना आरम्भ कर दिया था।

चारों शहजादियों ने एक-एक भाई का दामन पकड़ लिया था। जहांआरा (Jahanara) ने दारा शिकोह (Dara Shikoh) को, रोशनआरा ने औरंगज़ेब को, गौहर आरा (Gouhar Ara) ने मुराद (Murad) को और पुरहुनार बेगम (Purhunar Begum) ने शाहशुजा (Shahshuja) को बादशाह बनाने के लिए राजनीतिक शतरंज पर षड़यंत्रों की खूनी गोटियां बिछानी आरम्भ कर दीं थीं।

चारों शहजादियाँ अपनी पसंद के भाई को तख्ते ताउस पर बैठाकर कोहिनूर हीरे तथा दिल्ली के लाल किले (Red Fort) का स्वामी बनाने का ख्वाब देखा करती थीं। इस प्रकार अकबर (Akbar) द्वारा बनाई गई नीति के कारण मुगलों को बहनोइयों और जवांइयों की समस्याओं से तो मुक्ति मिल गई थी किंतु अब मुगल हरम (Mughal Harem) बहनों और बेटियों के षड़यंत्रों से घिर गए थे।

-डॉ. मोहनलाल गुप्ता

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