Monday, January 26, 2026
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क्वाण्टम ब्रह्माण्ड और वेदान्त

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क्वाण्टम ब्रह्माण्ड और वेदान्त

डॉ. मोहनलाल गुप्ता भारतीय इतिहास, संस्कृति और दर्शन के सुप्रसिद्ध लेखक हैं। इस पुस्तक “क्वाण्टम ब्रह्माण्ड और वेदान्त” (Quantum Brahmand Aur Vedant) में उन्होंने एक ऐसे विषय-संगम को प्रस्तुत किया है, जहाँ आधुनिक विज्ञान और प्राचीन भारतीय अध्यात्म एक-दूसरे का पूरक बनकर उभरते हैं। यह पुस्तक न केवल वैज्ञानिक जिज्ञासा को संतुष्ट करती है, बल्कि वेदांत की पारंपरिक चिंतन-धारा के माध्यम से ब्रह्माण्ड के रहस्यों को समझने का एक नया दृष्टिकोण भी प्रदान करती है।

क्वाण्टम ब्रह्माण्ड और वेदान्त की वैचारिक भूमिका

डॉ. गुप्ता ने आरंभ में ही यह स्थापित किया है कि विज्ञान और आध्यात्म—दोनों का उद्देश्य सत्य की खोज है। क्वाण्टम भौतिकी जहाँ सूक्ष्मतम स्तर पर पदार्थ और ऊर्जा के व्यवहार का अध्ययन करती है, वहीं वेदांत “ब्रह्म” को अंतिम सत्य मानते हुए जगत के मूल स्वरूप की व्याख्या करता है। लेखक दिखाते हैं कि दोनों अलग-अलग मार्गों से एक ही सत्य की ओर अग्रसर होते हैं—एक अनुभवजन्य प्रयोगों के द्वारा, और दूसरा अंतर्ज्ञान, तर्क तथा अनुभूति द्वारा।

क्वांटम सिद्धांत और वेदांत का संगम

पुस्तक के प्रथम भाग में क्वाण्टम भौतिकी (Quantum Physics) के प्रमुख सिद्धांतों—जैसे वेव-पार्टिकल द्वैत, अनिश्चितता सिद्धांत, क्वाण्टम एंटैंगलमेंट, क्वाण्टम टनलिंग आदि—का सरल भाषा में विवरण किया गया है। उल्लेखनीय यह है कि लेखक इन सिद्धांतों को अत्यधिक तकनीकी न बनाकर सामान्य पाठक के लिए सुगम कर देते हैं।

इसके बाद लेखक इन सिद्धांतों की तुलना वेदांतिक अवधारणाओं से करते हैं। उदाहरण के लिए—

  • वेव-पार्टिकल द्वैत की तुलना “निराकार–साकार ब्रह्म” से,
  • क्वाण्टम अनिश्चितता की तुलना माया सिद्धांत से,
  • और एंटैंगलमेंट की तुलना अद्वैत वेदांत के ‘एकत्व’ सिद्धांत से की गई है।

लेखक यह नहीं कहते कि प्राचीन ऋषियों ने सीधे-सीधे क्वांटम भौतिकी को समझ लिया था, बल्कि यह कि उनके अनुभवजन्य निष्कर्ष आज के वैज्ञानिक सिद्धांतों से सामंजस्य रखते हुए प्रतीत होते हैं। यह संतुलित दृष्टिकोण पुस्तक को अतिरंजना से बचाता है।

ब्रह्माण्ड की संरचना और वेदांत

पुस्तक का दूसरा भाग ब्रह्माण्ड विज्ञान (Brahmand Science) पर केंद्रित है। यहाँ बिग बैंग सिद्धांत, ब्रह्माण्ड के विस्तार, डार्क मैटर–डार्क एनर्जी, मल्टीवर्स जैसी चर्चित वैज्ञानिक अवधारणाओं का परिचय दिया गया है। लेखक बताते हैं कि आधुनिक विज्ञान ब्रह्माण्ड को एक सतत परिवर्तनशील, ऊर्जा-प्रधान संरचना के रूप में देखता है, जबकि वेदांत (Vedant) उसे ‘ब्रह्म की अभिव्यक्ति’ कहता है।

डॉ. गुप्ता इन दोनों दृष्टिकोणों का तुलनात्मक अध्ययन करते हुए यह निष्कर्ष प्रस्तुत करते हैं कि ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति, संरचना और अंत—ये सब प्रश्न विज्ञान और अध्यात्म दोनों के अध्ययन की सीमाओं को चुनौती देते हैं। वेदांत ‘चक्राकार समय’ की अवधारणा प्रस्तुत करता है, जबकि विज्ञान प्रारंभ और अंत की रैखिक अवधारणा पर आधारित है। यह तुलना पाठक को सोचने पर मजबूर करती है कि क्या यह दोनों विचारधाराएँ अंततः किसी साझा आधार पर मिल सकती हैं।

वेदांत का दार्शनिक विमर्श

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क्वाण्टम ब्रह्माण्ड और वेदान्त के तीसरे भाग में वेदांत के मूल सिद्धांत—ब्रह्म, आत्मा, माया, कर्म, पुनर्जन्म, अद्वैत, चेतना की प्रकृति—का विस्तृत विवेचन मिलता है। डॉ. मोहनलाल गुप्ता विशेष रूप से चेतना (Consciousness) पर वैज्ञानिक और दार्शनिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हैं। आधुनिक विज्ञान में चेतना को अधिकतर न्यूरोलॉजिकल या कम्प्यूटेशनल प्रक्रिया माना जाता है, जबकि वेदांत इसे ब्रह्म का स्वरूप मानते हुए प्राथमिक तत्व घोषित करता है। डॉ. गुप्ता बताते हैं कि आज क्वांटम कॉन्शसनेस, इंटीग्रेटेड इन्फॉर्मेशन थ्योरी जैसी वैज्ञानिक संकल्पनाएँ इस विमर्श को नई दिशा दे रही हैं। लेखक इन सिद्धांतों और वेदांत के दृष्टिकोण के बीच संभावित समानताओं और मतभेदों का संयत विश्लेषण देकर पाठक को गहन चिंतन के लिए प्रेरित करते हैं। लेखक ने इन विषयों के दार्शनिक पक्ष को स्पष्ट करने के लिए विभिन्न उपनिषदों एवं श्रीमद्भगवद् गीता के साथ-साथ तुलसीदास कृत रामचरित मानस से भी ढेरों उदाहरण दिए हैं जिनसे इस विषय को सारगर्भित रूप से समझने में सहायता मिलती है। रामचरित मानस के विभिन्न पक्षों पर यद्यपि अनेक प्रकार से शोध कार्य किए गए हैं किंतु मानस के दार्शनिक पक्ष को आधुनिक विज्ञान के साथ जोड़कर देखने का कार्य इससे पहले नहीं हुआ है।

कागभुशुण्डि के माध्यम से गोस्वामीजी से ब्रह्माण्ड में जीव की स्थिति को समझाया है तो क्वाण्टम ब्रह्माण्ड और वेदान्त पुस्तक में मानस के इसी विषय को क्वाण्टम के साथ जोड़कर स्पष्ट किया गया है।

क्वाण्टम ब्रह्माण्ड और वेदान्त की विशेषताएँ

  1. सरल भाषा और वैज्ञानिक संतुलन – पुस्तक जटिल वैज्ञानिक अवधारणाओं को भी सहज शैली में समझाती है।
  2. तुलनात्मक अध्ययन – विज्ञान और वेदांत के विचारों को बिना कट्टरता और बिना अनावश्यक चमत्कारवाद के तर्कसंगत रूप में प्रस्तुत किया गया है।
  3. विस्तृत संदर्भ – पुस्तक में वैज्ञानिक सिद्धांतों, उपनिषदों, वेदांत शास्त्रों और आधुनिक दार्शनिक विमर्शों का अच्छा संदर्भ मिलता है।
  4. चिन्तन-प्रधान ग्रंथ – यह पुस्तक उत्तरों से अधिक प्रश्नों को जन्म देती है, जिससे पाठक स्वयं विचार करने को प्रेरित होता है।

समीक्षात्मक निष्कर्ष

“क्वाण्टम, ब्रह्माण्ड और वेदान्त” उन पुस्तकों में से है जो ज्ञान के दो भिन्न क्षेत्रों—विज्ञान और अध्यात्म—के बीच संवाद की आवश्यकता पर बल देती है। डॉ. मोहनलाल गुप्ता ने इसे केवल वैचारिक कड़ी बनाने तक सीमित नहीं रखा, बल्कि विषय को व्यापक संदर्भों में रखकर समझाने का प्रयास किया है। कहीं-कहीं तुलना पाठक को दार्शनिक अधिक और वैज्ञानिक कम लग सकती है, किंतु लेखक का उद्देश्य विज्ञान की कठोर पद्धति को वेदांत पर थोपना नहीं, बल्कि दोनों की संगति और संभावनाओं को उजागर करना है।

समग्रतः यह पुस्तक उन पाठकों के लिए अत्यंत उपयोगी है जो ब्रह्माण्ड, चेतना, अस्तित्व और सत्य की खोज के संबंध में गहन तथा समन्वित दृष्टि प्राप्त करना चाहते हैं। यह विज्ञान और अध्यात्म के बीच सेतु-निर्माण का एक सफल प्रयास है और जिज्ञासु मस्तिष्कों के लिए अवश्य पठनीय है।

डॉ. मोहनलाल गुप्ता की पुस्तक “क्वाण्टम ब्रह्माण्ड और वेदान्त” का समीक्षात्मक परिचय (लगभग 600 शब्द)

यह पुस्तक अमेजन पर प्रिण्टेड एडीशन तथा ई-बुक एडीशन के रूप में उपलब्ध है।

ब्रिटिश शासन में राजपूताने की रोचक एवं ऐतिहासिक घटनाएँ

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ब्रिटिश शासन में राजपूताने की रोचक एवं ऐतिहासिक घटनाएँ

डॉ. मोहनलाल गुप्ता भारतीय इतिहास-लेखन की उस परंपरा के प्रतिनिधि लेखक हैं, जो इतिहास को केवल तथ्यों का संग्रह भर नहीं मानती, बल्कि उसे समाज, संस्कृति और सत्ता–संरचनाओं के बीच बहने वाली जीवंत धारा के रूप में देखती है। उनकी पुस्तक “ब्रिटिश शासन में राजपूताने की रोचक एवं ऐतिहासिक घटनाएँ” इसी दृष्टिकोण का उत्कृष्ट उदाहरण है। यह ग्रंथ राजपूताना (Rajputana) की उन ऐतिहासिक कड़ियों को जोड़ता है, जिनके बिना न तो राजस्थान के इतिहास का पूर्ण विश्लेषण संभव है और न ही ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन की वास्तविक प्रकृति को समझा जा सकता है।

पुस्तक का मूल भाव राजपूताना की राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक जटिलताओं को ब्रिटिश सत्ता (British Rule) के विस्तार के संदर्भ में देखना है। डॉ. गुप्ता ने घटनाओं का चयन अत्यंत सूक्ष्मता से किया है—कहीं यह कूटनीतिक चालों का विश्लेषण प्रस्तुत करता है, कहीं किसी राजपूत शासक की साहसपूर्ण नीति का, तो कहीं औपनिवेशिक शासन द्वारा अपनाई गई मनोवैज्ञानिक रणनीतियों को उजागर करता है। लेखक ने इस इतिहास को ‘शासक बनाम शासित’ की सरल संरचना में नहीं बांधा, बल्कि उसमें उपस्थित अनेक स्तरों—राजदरबार, ठिकाने, सामंत, प्रजा, व्यापारियों और अंग्रेज़ एजेंटों—सभी को साथ लेकर एक बहुरंगी चित्र प्रस्तुत किया है।

पुस्तक की भाषा सरल, प्रवाहपूर्ण और शोधपरक है, जो विद्वानों के साथ-साथ सामान्य पाठक को भी सहज रूप से आकर्षित करती है। डॉ. गुप्ता ने मूल अभिलेखों, प्रशासनिक दस्तावेज़ों, पारंपरिक स्रोतों और स्थानीय इतिहास-साहित्य का गहन अध्ययन कर तथ्यों को प्रमाणिकता प्रदान की है। यही कारण है कि वर्णित घटनाएँ केवल ऐतिहासिक तथ्य नहीं रह जातीं, बल्कि पाठक उन्हें प्रत्यक्ष देखने जैसा अनुभूति कर पाता है।

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समीक्षात्मक दृष्टि से देखा जाए तो पुस्तक का सबसे महत्त्वपूर्ण योगदान यह है कि यह ब्रिटिश शासन की कार्यशैली को राजपूताना की विशिष्ट सामाजिक संरचना के संदर्भ में समझने का अवसर प्रदान करती है। लेखक ने यह स्पष्ट किया है कि ब्रिटिश सत्ता का प्रभाव केवल राजनीतिक नहीं था; उसने राजपूत राज्यों की आंतरिक सत्ता-व्यवस्था, सामंती संबंध, सैन्य संगठन, कर-प्रणालियों और प्रशासनिक पद्धतियों में भी गहरे परिवर्तन किए। कई अध्यायों में यह विश्लेषण विशेष रूप से रोचक बन जाता है कि किस प्रकार अंग्रेज़ अधिकारियों ने विभाजन, संरक्षण, सहयोग और दमन—इन सभी का संयोजन करते हुए राजपूताने पर नियंत्रण स्थापित किया। इसके साथ ही पुस्तक का एक और महत्वपूर्ण पक्ष राजपूत वीरता, स्वाभिमान और कूटनीतिक बुद्धिमत्ता का संतुलित चित्रण है। डॉ. गुप्ता ने राजपूत शासकों के निर्णयों, संघर्षों और परिस्थितियों का मूल्यांकन न तो अतिरंजित भावनात्मकता के साथ किया है और न ही ब्रिटिश नीतियों का औचित्य सिद्ध करने की कोशिश की है। उनका दृष्टिकोण इतिहासकार का है—तटस्थ, विश्लेषणात्मक और तथ्यों पर आधारित।

पुस्तक की रोचकता इसी में है कि यह औपनिवेशिक काल की जटिलताओं को घटनाओं की श्रृंखला के रूप में प्रस्तुत करती है। प्रत्येक घटना न केवल अतीत का चित्र है, बल्कि वह यह भी बताती है कि सत्ता किस प्रकार समाज को रूपांतरित करती है, और समाज किस प्रकार सत्ता के परिवर्तनों का उत्तर देता है।

समग्रतः, “ब्रिटिश शासन में राजपूताने की रोचक एवं ऐतिहासिक घटनाएँ” एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक कृति है, जो राजपूताना के इतिहास-प्रेमियों, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी है। यह पुस्तक न केवल अतीत के पृष्ठों को खोलती है, बल्कि यह भी सिखाती है कि इतिहास को समझने के लिए दृष्टि, संवेदनशीलता और तथ्य-परक निष्पक्षता कितनी आवश्यक है।

डॉ. मोहनलाल गुप्ता की पुस्तक “ब्रिटिश शासन में राजपूताने की रोचक एवं ऐतिहासिक घटनाएँ” का समीक्षात्मक परिचय (लगभग 500 शब्द)

इस पुस्तक का पेपरबैक संस्करण भी अमेजन पर उपलब्ध है।

उर्दू बीबी की मौत

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उर्दू बीबी की मौत

डॉ. मोहनलाल गुप्ता द्वारा लिखित उर्दू बीबी की मौत (Urdu Bibi Ki Maut) एक ऐसी पुस्तक है जो भाषा, साहित्य, समाज और इतिहास के आपसी संबंधों को नई दृष्टि से समझने का अवसर देती है। यह कृति केवल साहित्यिक विमर्श नहीं, बल्कि भाषा–राजनीति, सांस्कृतिक परिवर्तन और सामाजिक वास्तविकताओं के गहरे विश्लेषण का दस्तावेज़ भी है। पुस्तक का शीर्षक ही पाठक का ध्यान तुरंत आकर्षित करता है और उसमें यह उत्सुकता पैदा करता है कि आख़िर “उर्दू बीबी” की मौत का प्रतीकात्मक अर्थ क्या है।

डॉ. गुप्ता ने इस पुस्तक में उर्दू भाषा के जन्म, विकास, उत्कर्ष, पतन और आज की परिस्थितियों पर अत्यंत गंभीर तथा प्रामाणिक चर्चा प्रस्तुत की है। लेखक बताते हैं कि उर्दू केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारतीय उपमहाद्वीप (Indian subcontinent) की साझा सांस्कृतिक धरोहर है—जिसमें हिंदवी, फ़ारसी, संस्कृत, राजस्थानी भाषा, और अरबी जैसी परंपराओं की सुगंध है। किन्तु समय के साथ-साथ इस भाषा का जो राजनीतिकरण हुआ, उसने समाज में विभाजन की रेखाओं को और गहरा कर दिया।

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पुस्तक में यह स्पष्ट रूप से दर्शाया गया है कि किस प्रकार भाषा को धार्मिक पहचान से जोड़ने की प्रवृत्ति ने उर्दू के स्वाभाविक विकास को बाधित किया। किताब में लेखक ने कई ऐतिहासिक तथ्यों, साहित्यिक उदाहरणों और संदर्भों के माध्यम से यह बताया है कि उर्दू का वास्तविक रूप हमेशा समन्वयकारी था। लेकिन विभाजन के बाद की राजनीति, शैक्षिक नीतियों और सांस्कृतिक बदलावों ने उर्दू को धीरे–धीरे उसके असली घर—भारतीय जनमानस—से दूर कर दिया। यही प्रक्रिया “उर्दू बीबी की मौत” का वास्तविक संदर्भ बनती है, जिसे लेखक ने रूपक रूप में अत्यंत प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया है। पुस्तक का सबसे प्रभावशाली पक्ष यह है कि लेखक ने तथ्यों, शोध और यथार्थ की धरातल पर अपने विचार रखे हैं। वे यह भी स्पष्ट करते हैं कि उर्दू की गिरती स्थिति केवल बाहरी कारणों से नहीं, बल्कि आंतरिक कमजोरियों—जैसे सीमित पाठक–वर्ग, बदलती भाषा-दृष्टि और आधुनिक साहित्यिक प्रवृत्तियों—का परिणाम भी है। इसके साथ ही लेखक यह भी सुझाव देते हैं कि उर्दू को पुनः जीवंत बनाने के लिए साहित्य, शिक्षा और सांस्कृतिक मंचों पर सार्थक प्रयास किए जाने चाहिए।

समग्रतः “उर्दू बीबी की मौत” केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि भाषा के इतिहास, समाज और संस्कृति पर लिखा गया एक महत्वपूर्ण और विचारोत्तेजक दस्तावेज़ है। यह ब्लॉग उन सभी पाठकों के लिए उपयोगी है जो भाषा और संस्कृति के गहरे संबंधों को समझना चाहते हैं। पुस्तक पढ़कर यह स्पष्ट हो जाता है कि भाषाएँ न मरती हैं और न जन्म लेती हैं—वे केवल समाज के व्यवहार और दृष्टिकोण से पुनर्जीवित या उपेक्षित होती हैं।

पुस्तकउर्दू बीबी की मौत

लेखक- डॉ. मोहनलाल गुप्ता

प्रकाशक- शुभदा प्रकाशन, जोधपुर

तीसरा मुगल: जलालुद्दीन मुहम्मद अकबर

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तीसरा मुगल: जलालुद्दीन मुहम्मद अकबर

डॉ. मोहनलाल गुप्ता द्वारा रचित “तीसरा मुगल: जलालुद्दीन मुहम्मद अकबर” (Tīsara Mughal: Jalaluddīn Muhammad Akbar) एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक कृति है, जिसमें लेखक ने अकबर के व्यक्तित्व, शासन, नीतियों और उनके समय की राजनीतिक परिस्थितियों का गहन विश्लेषण प्रस्तुत किया है। यह पुस्तक पारंपरिक मुगल इतिहास-लेखन से हटकर अकबर (Akbar) के शासन को एक नई दृष्टि से देखती है और अनेक ऐसी घटनाओं को रेखांकित करती है जिन्हें मुख्यधारा के इतिहास में अपेक्षित स्थान नहीं मिल पाया।

लेखक ने अकबर के जीवन को केवल एक सम्राट की कथा के रूप में नहीं, बल्कि एक ऐसे शासक के रूप में प्रस्तुत किया है जिसकी महत्वाकांक्षाएँ अत्यन्त व्यापक थीं। पुस्तक में यह स्पष्ट किया गया है कि अकबर ने अपने शासनकाल में साम्राज्य का विस्तार, प्रशासनिक संरचना, राजपूताना नीति, धार्मिक प्रयोगों और सैन्य अभियानों के माध्यम से एक विशाल और केंद्रीकृत शक्ति का निर्माण किया। लेकिन इन सभी पहलुओं के पीछे छिपे राजनीतिक उद्देश्य, रणनीतियाँ और संघर्ष भी उतनी ही स्पष्टता से उभरकर सामने आते हैं।

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डॉ. गुप्ता ने विशेष रूप से अकबर और महाराणा प्रताप के संघर्ष को विस्तार से विवेचित किया है। लेखक के अनुसार यह संघर्ष केवल दो राजाओं की लड़ाई नहीं, बल्कि दो विचारधाराओं—स्वतंत्रता और विस्तारवादी साम्राज्यवाद—का टकराव था। पुस्तक के अध्यायों में यह प्रमाणित करने का प्रयास किया गया है कि अकबर किसी भी कीमत पर मेवाड़ पर अधिकार जमाना चाहता था, जबकि महाराणा प्रताप अपने स्वाभिमान और स्वाधीनता के लिए अन्त तक संघर्षरत रहे। पुस्तक में Akbar के दरबार, उनके सेनापतियों, नवरत्नों और प्रशासनिक अधिकारियों पर भी विस्तृत प्रकाश डाला गया है। लेखक कई प्रसंगों के माध्यम से यह बताते हैं कि अकबर का दरबार जितना प्रतापी दिखता था, उसके भीतर राजनीतिक स्पर्धाएँ, आंतरिक संघर्ष और दरबारी महत्वाकांक्षाएँ भी उतनी ही तीव्र थीं। Raja Todarmal, मान सिंह, बीरबल, अबुल फ़जल आदि के संबंध में लेखक ने कई ऐतिहासिक उद्धरण और घटनाएँ प्रस्तुत की हैं, जिनसे अकबर की नीतियों और उसके परिणामों का गहराई से आकलन किया जा सकता है। डॉ. गुप्ता की लेखन शैली सरल, प्रामाणिक और शोधपूर्ण है। उन्होंने फ़ारसी, राजस्थानी और मुगलकालीन स्रोतों का उपयोग करते हुए अनेक ऐसे प्रमाण प्रस्तुत किए हैं जो पारंपरिक इतिहास से भिन्न दृष्टिकोण सामने लाते हैं।

पुस्तक तीसरा मुगल: जलालुद्दीन मुहम्मद अकबर में कई घटनाएँ जैसे—अकबर के पारिवारिक संबंध, शहजादों का जीवन, दंडनीति, धार्मिक प्रयोग, और साम्राज्यवादी महत्वाकांक्षाएँ—इस प्रकार से वर्णित हैं कि पाठक अकबर के वास्तविक व्यक्तित्व को समझने में सक्षम होता है।

समग्रतः यह कृति अकबर के इतिहास को एक नई दृष्टि प्रदान करती है। यह न केवल इतिहास के छात्रों और शोधार्थियों के लिए मूल्यवान है, बल्कि उन पाठकों के लिए भी महत्वपूर्ण है जो भारतीय इतिहास को गहराई से समझना चाहते हैं। डॉ. मोहनलाल गुप्ता ने इस पुस्तक के माध्यम से यह स्थापित किया है कि अकबर का शासन जितना भव्य दिखाई देता है, उतना ही जटिल और संघर्षपूर्ण भी था। यह पुस्तक निश्चित रूप से मुगल इतिहास के अध्ययन में एक महत्वपूर्ण योगदान प्रस्तुत करती है।

पुस्तक- तीसरा मुगल: जलालुद्दीन मुहम्मद अकबर
लेखक- डॉ. मोहनलाल गुप्ता
प्रकाशक- शुभदा प्रकाशन जोधपुर

स्मृतिकाल में नारी MCQ

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स्मृतिकाल में नारी MCQ

स्मृतिकाल में नारी MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए “स्मृतिकाल में नारी” विषय पर 70 बहुविकल्पीय प्रश्न। सही विकल्प के अंत में ✅ हरा टिक मार्क है।

1. स्मृति काल में नारी की स्थिति से क्या अभिप्राय है?
a. वैदिक ऋचाओं में वर्णित नारी स्थिति से
b. स्मृति ग्रंथों के रचना काल में स्त्रियों की सामाजिक स्थिति से ✅
c. मध्यकालीन धर्मग्रंथों में नारी की स्थिति से
d. आधुनिक कानूनों में नारी अधिकारों से

2. स्मृति ग्रंथ किनके बाद माने जाते हैं?
a. उपनिषदों के बाद
b. पुराणों के बाद
c. श्रुति (वेद, ब्राह्मण, आरण्यक एवं उपनिषद) के बाद ✅
d. रामायण-महाभारत के बाद

3. सामान्यतः स्मृतियों की रचना किस कालखण्ड में मानी जाती है?
a. ई.पू. 1500 – 1000
b. ई.पू. 1000 – 500 ✅
c. ई. 1 – 500
d. ई. 500 – 1000

4. निम्न में से कौन स्मृति ग्रंथ नहीं है?
a. मनु स्मृति (Manu Smriti)
b. याज्ञवलक्य स्मृति
c. गौतम स्मृति
d. ऋग्वेद ✅

5. स्मृतियों में मुख्यतः किन विषयों के लिए नियम बताए गए हैं?
a. केवल आर्थिक जीवन के लिए
b. केवल धार्मिक यज्ञों के लिए
c. सामाजिक एवं पारिवारिक जीवन के लिए ✅
d. केवल राजनीतिक जीवन के लिए

6. स्मृति काल में नारी की स्थिति किसकी अपेक्षा भिन्न मानी गई है?
a. महाकाव्य काल की अपेक्षा
b. वैदिक काल की अपेक्षा ✅
c. मध्यकाल की अपेक्षा
d. आधुनिक काल की अपेक्षा

7. गृह्यसूत्रों और स्मृतियों के रचना-काल में नारी के बारे में क्या माना गया?
a. उसे पूर्णतः स्वतंत्र माना गया
b. उसे किसी भी पुरुष से स्वतंत्र रहने को कहा गया
c. उसे किसी न किसी पुरुष के आश्रय में रहना अनिवार्य माना गया ✅
d. उसे केवल धार्मिक जीवन तक सीमित रखा गया

8. पुत्री को किसके संरक्षण में रहने की व्यवस्था थी?
a. पति के
b. भाई के
c. पिता के ✅
d. राजा के

9. विधवा माता को किसके संरक्षण में रहना अनिवार्य था?
a. भाई के
b. पिता के
c. गुरु के
d. पुत्र के ✅

10. इस काल में किसका स्थान पुत्र की अपेक्षा निम्न माना जाने लगा?
a. माता का
b. कन्या का ✅
c. बहन का
d. दासी का

11. स्त्री के साथ भोजन करने वाले पुरुष को कैसे देखा गया?
a. श्रेष्ठ आचरण वाला
b. सामान्य आचरण वाला
c. गर्हित आचरण करने वाला ✅
d. धार्मिक आचरण वाला

12. किस प्रकार की स्त्री की प्रशंसा की गई?
a. प्रतिवाद करने वाली
b. अप्रतिवादिनी अर्थात प्रतिवाद न करने वाली ✅
c. वाचाल स्त्री
d. न्याय के लिए संघर्ष करने वाली

13. स्मृति काल में स्त्री के किस अस्तित्व का लोप हो गया?
a. सामाजिक अस्तित्व
b. आर्थिक अस्तित्व
c. स्वतन्त्र अस्तित्त्व ✅
d. धार्मिक अस्तित्व

14. स्त्री के शरीर पर किसका अधिकार माना जाने लगा?
a. राजा का
b. समाज का
c. पिता का
d. पति का ✅

15. मनु के अनुसार कन्या कब तक पिता के संरक्षण में रहती है?
a. विवाह तक ✅
b. रजस्वला होने तक
c. प्रथम संतान होने तक
d. गुरु गृह से लौटने तक

16. वृद्धावस्था में स्त्री पर किसका संरक्षण रहता था?
a. भाई का
b. शिष्य का
c. पुत्र का ✅
d. मित्र का

17. उत्तरवैदिक तथा उसके परवर्ती काल में स्त्री की दशा कैसी हो गई?
a. उत्थानशील
b. स्थिर
c. पतनोन्मुख ✅
d. अत्यधिक प्रगतिशील

18. सूत्रकाल में भी स्त्रियाँ किस धार्मिक क्रिया में भाग लेती थीं?
a. केवल पूजा में
b. यज्ञों में ✅
c. केवल व्रतों में
d. केवल तीर्थयात्रा में

19. सुलभा, गार्गी, मैत्रेयी किस प्रकार की स्त्रियाँ थीं?
a. केवल गृहिणी
b. दासी
c. विदुषी स्त्रियाँ ✅
d. राजकुमारी

20. विदेह के राजा जनक के यज्ञ में गार्गी ने किससे शास्त्रार्थ किया?
a. व्यास से
b. वशिष्ठ से
c. याज्ञवलक्य ऋषि से ✅
d. भारद्वाज से

21. ऋग्वैदिक काल से सूत्रकाल तक स्त्रियों के लिए किसका समुचित प्रबन्ध था?
a. सैन्य प्रशिक्षण का
b. व्यापार प्रशिक्षण का
c. शिक्षा का ✅
d. विदेशी यात्रा का

22. इस काल की नारी किस प्रकार की कलाओं में पारंगत कही गई है?
a. युद्ध कलाओं में
b. कृषि कलाओं में
c. ललित कलाओं में ✅
d. व्यापार कलाओं में

23. उस युग की स्त्रियाँ किस व्रत का पालन करती थीं?
a. वानप्रस्थ व्रत
b. संन्यास व्रत
c. ब्रह्मचर्य व्रत ✅
d. राजयोग व्रत

24. स्त्रियों का कौन-सा संस्कार भी संपन्न होता था?
a. नामकरण
b. जातकर्म
c. उपनयन संस्कार ✅
d. संन्यास दीक्षा

25. जैसे-जैसे समाज की संरचना क्लिष्ट होती गई, नारी के साथ क्या हुआ?
a. उसके अधिकार बढ़ते गए
b. उसके अधिकार स्थिर रहे
c. उसके अधिकार सीमित होते गए ✅
d. उसे शासक बना दिया गया

26. आर्यों के किससे सम्पर्क में आने पर सामाजिक विवाह संबंध बढ़े?
a. यूनानियों से
b. अनार्य लोगों से ✅
c. द्रविडों से
d. शक-कुषाणों से

27. अनार्य स्त्रियाँ किससे अपरिचित थीं?
a. कृषिकर्म से
b. युद्धकौशल से
c. वैदिक वाड्मय और आचार-विचार से ✅
d. व्यापार से

28. अनार्य स्त्रियों द्वारा वैदिक मंत्रों के किस प्रकार के उच्चारण का उल्लेख है?
a. शुद्ध उच्चारण
b. मौन उच्चारण
c. भ्रष्ट उच्चारण ✅
d. तीव्र उच्चारण

29. स्त्रियों को यज्ञों से अलग रखने का मुख्य कारण क्या बताया गया?
a. उनके स्वास्थ्य की रक्षा
b. उनकी शिक्षा की कमी
c. यज्ञों को निर्विघ्न सम्पन्न करना और वैदिक साहित्य की शुद्धता बनाए रखना ✅
d. राजकीय आदेश

30. स्मृतिकाल (ई.पू. 200 – ई. 300) में स्त्री के किस संस्कार का स्वतंत्र रूप से लोप हो गया?
a. नामकरण
b. उपनयन संस्कार ✅
c. विवाह संस्कार
d. अन्त्येष्टि संस्कार

31. विवाह के अवसर पर स्त्री का उपनयन संस्कार किस रूप में किया जाता था?
a. अलग वैदिक उपनयन की तरह
b. गुरु दीक्षा की तरह
c. केवल मौन व्रत की तरह
d. द्विज होने के प्रतीक के रूप में ✅

32. मनु के अनुसार कन्या का आचार्य कौन माना गया?
a. पिता
b. गुरु
c. माता
d. पति ✅

33. मनु के अनुसार कन्या के लिए वास्तविक उपनयन क्या है?
a. यज्ञोपवीत धारण
b. तीर्थयात्रा
c. विवाह ✅
d. व्रत-उपवास

34. मनु के अनुसार स्त्री का आश्रम किसे कहा गया है?
a. गुरु आश्रम
b. वानप्रस्थ आश्रम
c. संन्यास आश्रम
d. पति की सेवा को आश्रम ✅

35. स्मृतिकारों ने बालिकाओं के उपनयन में किसका निषेध किया?
a. अग्नि का प्रयोग
b. वस्त्र धारण का
c. वैदिक मंत्रों के पाठ का ✅
d. आहुति देने का

36. कालान्तर में स्त्रियाँ किन अधिकारों से वंचित कर दी गईं?
a. कृषि करने के अधिकार से
b. व्यापार करने के अधिकार से
c. वेदों के पठन-पाठन और यज्ञ करने के अधिकार से ✅
d. तीर्थयात्रा करने के अधिकार से

37. स्मृति काल में कन्या को शिक्षा सामान्यतः कहाँ मिलती थी?
a. गुरुकुलों में
b. विश्वविद्यालयों में
c. मठों में
d. अपने घर पर माता-पिता, भाई, बन्धु आदि से ✅

38. मनुस्मृति में किस प्रकार की कन्याओं से विवाह न करने का निर्देश है?
a. अत्यधिक गोरी और अल्पबोली
b. अति सांवली, नित्य रोगिणी, कटुभाषिणी आदि दोषयुक्त कन्याएँ ✅
c. पढ़ी-लिखी कन्याएँ
d. संगीत-निपुण कन्याएँ

39. ‘मिताक्षरा’ नामक प्रसिद्ध टीका किस स्मृति पर लिखी गई है?
a. मनुस्मृति पर
b. नारद स्मृति पर
c. याज्ञवलक्य स्मृति पर ✅
d. बृहस्पति स्मृति पर

40. मिताक्षरा के अनुसार कन्या का कौन-सा गुण आवश्यक है?
a. कन्या आयु में वर से अधिक हो
b. कन्या अनन्यपूर्विका हो अर्थात पहले किसी पुरुष से यौन सम्बन्ध न रहा हो ✅
c. कन्या न बोलने वाली हो
d. कन्या संतान उत्पन्न करने में अयोग्य हो

41. मिताक्षरा में कन्या के स्त्री होने का क्या अभिप्राय है?
a. केवल सौन्दर्यवान हो
b. केवल कुलीन हो
c. माँ बनने की योग्यता रखती हो ✅
d. केवल धार्मिक हो

42. धर्मसूत्रकारों और स्मृतिकारों के अनुसार कन्या का विवाह किस आयु में करने का विधान था?
a. 4 से 6 वर्ष
b. 6 से 8 वर्ष
c. 8 से 12 वर्ष ✅
d. 16 से 18 वर्ष

43. गौतम और पाराशर ने बारह वर्ष की आयु में रजोदर्शन होने पर क्या करने का विधान किया?
a. उपनयन संस्कार
b. विदाई
c. कन्यादान अर्थात विवाह ✅
d. संन्यास

44. ‘नग्निका’ शब्द का अर्थ विवाह योग्य कन्या की आयु के सन्दर्भ में क्या बताया गया है?
a. 4 से 6 वर्ष
b. 6 से 8 वर्ष
c. 8 से 10 वर्ष ✅
d. 14 से 16 वर्ष

45. आसुर-विवाह में क्या प्रचलन था?
a. वर-पक्ष कन्या को दान देता था
b. माता-पिता वर-पक्ष को धन देते थे
c. कन्या के माता-पिता वर-पक्ष से धन लेते थे ✅
d. दोनों पक्ष किसी से धन नहीं लेते थे

46. सूत्रकाल में भाई न होने पर स्त्री के उत्तराधिकार को किसने अस्वीकार किया?
a. मनु ने
b. वशिष्ठ ने
c. आपस्तम्ब ने ✅
d. कौटिल्य ने

47. आपस्तम्ब के अनुसार पुत्र के अभाव में किसे उत्तराधिकारी बनाया जाना चाहिए?
a. पुत्री को सीधे
b. राजा को
c. सपिंड बालक या शिष्य को ✅
d. पत्नी के भाई को

48. किसने पुत्र के न होने पर भी पुत्री को उत्तराधिकारिणी स्वीकार किया, चाहे उसे कम हिस्सा ही मिले?
a. मनु ने
b. वशिष्ठ ने
c. नारद ने
d. कौटिल्य ने ✅

49. मनु के अनुसार स्त्री-धन में कौन-सा धन नहीं आता?
a. माता द्वारा प्रदत्त धन
b. पिता द्वारा प्रदत्त धन
c. भाई द्वारा प्रदत्त धन
d. ग्राम समाज का कर धन ✅

50. मनु के अनुसार स्त्री अपनी सम्पत्ति का व्यय कब कर सकती थी?
a. पूर्ण स्वतंत्र होकर
b. केवल न्यायालय की अनुमति से
c. पति की आज्ञा के बिना नहीं कर सकती थी ✅
d. केवल पुत्र की अनुमति से

-डॉ. मोहनलाल गुप्ता

स्मृतिकाल में नारी MCQ : मुख्य अध्ययन सामग्री

स्मृति काल में नारी की स्थिति​

पुराण कालीन नारी MCQ

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पुराण कालीन नारी

पुराण कालीन नारी MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए “पौराणिक काल में नारी की स्थिति” विषय पर 70 बहुविकल्पीय प्रश्न। सही विकल्प के अंत में ✅ हरा टिक मार्क है।

1. पौराणिक काल में नारी की स्थिति कैसी मानी गई है?
a) अत्यंत दयनीय
b) वैदिक एवं उत्तर वैदिक काल के समान संतोषजनक ✅
c) केवल घरेलू कार्यों तक सीमित
d) पूर्णतः अशिक्षित

2. पौराणिक काल में नारी विवाह सम्बन्धी निर्णय कैसे लेती थी?
a) पिता की आज्ञा से ही
b) समाज की पंचायत से
c) स्वयं निर्णय ले सकती थी ✅
d) केवल भाइयों की सलाह से

3. पौराणिक काल में नारी को किस प्रकार की सामाजिक बाध्यता नहीं थी?
a) शिक्षा ग्रहण करने की
b) पर्दा प्रथा का पालन करने की ✅
c) विवाह करने की
d) घर के कार्य करने की

4. पौराणिक काल किस कालखण्ड को कहा जाता है?
a) जब वेदों की रचना हुई
b) जब स्मृतियों की रचना हुई
c) जब पुराणों की रचना हुई ✅
d) जब उपनिषद रचे गए

5. पुराणों में किन तत्वों का समावेश हुआ है?
a) केवल राजनीति का
b) केवल दार्शनिक विचारों का
c) धर्म, अध्यात्म, इतिहास और काल्पनिक कथाओं का ✅
d) केवल लोककथाओं का

6. पौराणिक काल के आरम्भ और अंत के विषय में इतिहासकारों की क्या स्थिति है?
a) सब एक मत हैं
b) अधिकांश असहमत हैं
c) एक मत नहीं हैं ✅
d) मत व्यक्त ही नहीं किया गया

7. पुराणों में वैदिक देवी-देवताओं के साथ क्या किया गया?
a) उन्हें नकारा गया
b) उनका मानवीकरण किया गया ✅
c) उन्हें हटा दिया गया
d) केवल कुछ को स्वीकार किया गया

8. पुराणों में रामायण एवं महाभारत कालीन राजाओं के साथ क्या हुआ?
a) उनका तिरस्कार किया गया
b) उन्हें सामान्य मानव दिखाया गया
c) उनका दैवीकरण किया गया ✅
d) उन्हें इतिहास से बाहर कर दिया गया

9. बहुत से लोग पुराणों की रचना को किस काल से किस काल तक का मान लेते हैं?
a) वैदिक काल से गुप्त काल तक
b) वैदिक काल से महाकाव्य काल तक ✅
c) महाकाव्य काल से मध्यकाल तक
d) गुप्त काल से मुगल काल तक

10. पौराणिक काल को केवल किस राजवंश के काल तक सीमित करना उचित नहीं माना गया है?
a) नंद वंश
b) मौर्य वंश
c) गुप्त वंश ✅
d) चोल वंश

11. किन इतिहासकारों के अनुसार पौराणिक काल ईस्वी 300 से 600 तक माना गया है?
a) सभी इतिहासकारों के अनुसार
b) बहुत से इतिहासकारों के अनुसार ✅
c) कुछ विदेशी इतिहासकारों के अनुसार
d) केवल गुप्तकालीन विद्वानों के अनुसार

12. यदि पौराणिक काल को ई.300 से 600 माना जाए तो यह काल मुख्यतः किस साम्राज्य का है?
a) मौर्य साम्राज्य
b) कुषाण साम्राज्य
c) गुप्त साम्राज्य ✅
d) चोल साम्राज्य

13. पौराणिक काल में गुप्त सम्राटों की राजधानी कहाँ थी?
a) पाटलिपुत्र
b) कन्नौज
c) मगध ✅
d) उज्जयिनी

14. पौराणिक काल को केवल गुप्त काल तक सीमित न करने का मुख्य कारण क्या दिया गया है?
a) गुप्त कमजोर शासक थे
b) पुराणों की रचना गुप्तों के बाद भी होती रही ✅
c) पुराणों की रचना गुप्तों से पहले ही समाप्त हो गई
d) हर्ष ने पुराणों का विरोध किया

15. पौराणिक काल की परिभाषा में किस राजा के शासनकाल को भी समाहित करने की बात कही गई है?
a) अशोक
b) समुद्रगुप्त
c) हर्ष वर्द्धन ✅
d) विक्रमादित्य

16. गुप्तकाल को भारतीय इतिहास में किस रूप में जाना जाता है?
a) विज्ञान युग
b) युद्ध युग
c) धार्मिक पुनरुत्थान का काल ✅
d) मुस्लिम आक्रमण का काल

17. गुप्तकाल में वैदिक धर्म को किस रूप में प्रस्तुत किया गया?
a) जैन धर्म के रूप में
b) शैव धर्म के रूप में
c) भागवत् धर्म के रूप में ✅
d) बौद्ध धर्म के रूप में

18. गुप्तकाल में जनसामान्य को आकर्षित करने के लिए क्या किया गया?
a) करों में वृद्धि
b) युद्धों का विस्तार
c) पौराणिक कथाओं की रचना ✅
d) व्यापारिक प्रतिबंध

19. गुप्तकाल की समयावधि लगभग किससे किस तक मानी गई है?
a) ई.100 से ई.300
b) ई.200 से ई.400
c) ई.275 से ई.550 ✅
d) ई.500 से ई.800

20. पौराणिक काल में नारी की स्थिति के बारे में विभिन्न पुराणों से क्या ज्ञात होता है?
a) नारी अत्यंत शोषित थी
b) नारी को कोई अधिकार नहीं था
c) नारी की स्थिति बहुत अच्छी थी ✅
d) नारी को शिक्षा नहीं मिलती थी

21. पौराणिक काल में नारी को शिक्षा का अधिकार किन प्राचीन कालों की भाँति प्राप्त था?
a) केवल आधुनिक काल की भाँति
b) केवल मध्यकाल की भाँति
c) वैदिक, स्मृति, सूत्र और महाकाव्य काल की भाँति ✅
d) केवल स्मृति काल की भाँति

22. पौराणिक काल में नारी शिक्षा के कितने रूप बताए गए हैं?
a) एक
b) दो ✅
c) तीन
d) चार

23. पौराणिक काल में नारी शिक्षा के दो रूप कौन से थे?
a) प्राचीन और आधुनिक
b) लौकिक और पारलौकिक
c) आध्यात्मिक और व्यावहारिक ✅
d) ग्रामीण और शहरी

24. आध्यात्मिक शिक्षा ग्रहण करने वाली कन्याओं को क्या कहा जाता था?
a) गृहिणी
b) राजकन्या
c) ब्रह्मवादिनी ✅
d) आचार्या

25. पौराणिक साहित्य में किस ब्रह्मवादिनी का नाम नहीं मिलता?
a) वृहस्पति-भगिनी
b) अपर्णा
c) मेना
d) अनसूया ✅

26. निम्न में से कौन-सी ब्रह्मवादिनी का उल्लेख पौराणिक काल के साहित्य में मिलता है?
a) एकपर्णा ✅
b) गार्गी
c) मैत्रेयी
d) सीता

27. पौराणिक साहित्य में किसका उल्लेख ‘ब्रह्मवादिनी कन्या’ के रूप में किया गया है?
a) संनति ✅
b) द्रौपदी
c) कुंती
d) तारा

28. उमा, पीवरी, धर्मव्रता आदि कन्याओं ने अपनी इच्छानुसार वर किसके बल पर प्राप्त किया?
a) धन के बल पर
b) विद्या के बल पर
c) तपस्या के बल पर ✅
d) युद्ध के बल पर

29. पौराणिक काल में व्यावहारिक शिक्षा ग्रहण करने वाली कन्याओं के संदर्भ में कौन-सा कथन सही है?
a) वे केवल काव्य पढ़ती थीं
b) उन्होंने भी तपस्या से मनोनुकूल वर प्राप्त किया ✅
c) वे विवाह नहीं करती थीं
d) उन्हें घर का कार्य नहीं आता था

30. पौराणिक काल की गृहस्थ कन्याएँ किस प्रकार के कार्यों में निपुण होती थीं?
a) केवल सैन्य प्रशिक्षण में
b) केवल राजनीति में
c) गृहस्थी के कार्यों में ✅
d) केवल व्यापार में

31. पूर्व-वैदिक-युगीन अपाला अपने पिता की किस कार्य में सहायता करती थी?
a) व्यापार
b) कृषि कार्य ✅
c) लेखन
d) पशु पालन

32. उस युग की अधिकांश कन्याएँ कौन-सा कार्य भली-भाँति जानती थीं, जिसके कारण उन्हें ‘दुहिता’ कहा गया?
a) बुनाई
b) पौधरोपण
c) गाय दुहना ✅
d) भोजन बनाना

33. ‘दुहिता’ शब्द का प्रयोग किसके लिए किया गया है?
a) जो दुहना जानती हो ✅
b) जो नृत्य जानती हो
c) जो युद्ध करे
d) जो विद्या पढ़े

34. पौराणिक काल की कन्याएँ सूत कातने के अतिरिक्त क्या-क्या जानती थीं?
a) खेती और शिकार
b) लेखन और मुद्रण
c) बुनना और वस्त्र सिलना ✅
d) युद्ध और अस्त्र-शस्त्र

35. पौराणिक काल की कन्याएँ किन कलाओं में निपुण कही गई हैं?
a) केवल चित्रकला में
b) केवल वाद्यसंगीत में
c) ललित कलाओं में ✅
d) केवल नाटक में

36. गुप्तकाल तक कन्या विवाह की स्थिति के विषय में क्या कहा गया है?
a) पूर्ण परिवर्तन हो गया
b) बाल विवाह अनिवार्य हो गया
c) स्थिति पूर्ववत् रही ✅
d) विवाह बंद हो गए

37. गुप्तकाल में किस प्रकार के विवाह का उल्लेख मिलता है जो प्रेम-विवाह का द्योतक है?
a) दैव विवाह
b) आर्ष विवाह
c) गान्धर्व विवाह ✅
d) असुर विवाह

38. गान्धर्व विवाह को किस प्रकार का विवाह बताया गया है?
a) समाज द्वारा आयोजित
b) माता-पिता द्वारा तय
c) समाज से छिपकर किया गया प्रेम विवाह ✅
d) केवल राजाओं के लिए

39. गान्धर्व विवाह का उल्लेख किस बात का परिचायक है?
a) बालिका विवाह के
b) जबरन विवाह के
c) युवती होने पर स्वतंत्र विवाह के ✅
d) विधवा विवाह के

40. थानेश्वर के राजा हर्ष वर्द्धन का शासनकाल किस अवधि में रहा?
a) ई.500–550
b) ई.550–600
c) ई.606–647 ✅
d) ई.700–750

41. हर्षकालीन ग्रंथों से नारी शिक्षा के बारे में क्या अनुमान होता है?
a) सबके लिए शिक्षा अनिवार्य थी
b) नारी शिक्षा सर्वत्र फल-फूल रही थी
c) सामान्य परिवारों में नारी शिक्षा का प्रसार लगभग अवरुद्ध हो गया था ✅
d) केवल ग्रामीण नारी शिक्षित थी

42. हर्षकाल तक किस वर्ग की कन्याओं के लिए शिक्षा के द्वार खुले हुए थे?
a) केवल ग्रामीण वर्ग
b) केवल शूद्र वर्ग
c) समाज के अभिजात्य वर्ग की कन्याएँ ✅
d) केवल साधु-संतों की पुत्रियाँ

43. हर्षकाल में अभिजात्य वर्ग की कन्याएँ किन भाषाओं के काव्य में प्रवीण थीं?
a) पाली और प्राकृत
b) हिन्दी और पाली
c) प्राकृत और संस्कृत ✅
d) तमिल और तेलुगु

44. हर्षकालीन अभिजात्य कन्याएँ किन-किन कलाओं में निपुण कही गई हैं?
a) तैराकी और शिकार
b) कृषि और व्यापार
c) संगीत, नृत्य, वाद्य एवं चित्रकला ✅
d) युद्ध और राजनीति

45. हर्षकालीन कवि बाण ने नारी शिक्षा का उल्लेख किस ग्रंथ में किया है?
a) कादंबरी
b) मेघदूत
c) हर्षचरित ✅
d) रघुवंश

46. ‘हर्षचरित’ में किस राजकन्या के संदर्भ में नारी की कलात्मक प्रगति का वर्णन मिलता है?
a) राजलक्ष्मी
b) राज्यश्री ✅
c) कौशल्या
d) सुभद्रा

47. ‘हर्षचरित’ के वर्णन के अनुसार राज्यश्री किसके बीच रहकर कलाओं का परिचय प्राप्त कर रही थी?
a) राजपुरुषों के बीच
b) विद्वान ब्राह्मणों के बीच
c) विदग्ध सखियों के बीच ✅
d) सैनिकों के बीच

48. ‘हर्षचरित’ में राज्यश्री के संदर्भ में किस प्रकार की कलाओं का विशेष उल्लेख है?
a) केवल युद्धकला
b) नृत्य-गीत आदि कलाएँ ✅
c) कृषि-कला
d) शिल्पकला

49. पौराणिक काल में नारी की स्थिति को वैदिक और उत्तर वैदिक काल के साथ किस रूप में रखा गया है?
a) उससे नीचे
b) उससे बहुत खराब
c) उसके समान या समान्य रूप से संतोषजनक ✅
d) उससे बिल्कुल भिन्न

50. पौराणिक काल में नारी पर पर्दा प्रथा न होने का क्या अर्थ है?
a) उसे समाज में आने की अनुमति नहीं थी
b) वह स्वतंत्र रूप से सामाजिक जीवन में भाग ले सकती थी ✅
c) उसे घर से बाहर निकलने की मनाही थी
d) वह केवल त्योहारों पर बाहर जाती थी

51. पौराणिक काल में नारी की शिक्षा के संदर्भ में ‘ब्रह्मवादिनी’ शब्द किस पर लागू होता है?
a) जो गृहस्थी चलाती हो
b) जो केवल संगीत जानती हो
c) जो आध्यात्मिक शिक्षा ग्रहण करती हो ✅
d) जो युद्धकला सीखे

52. पौराणिक काल की ब्रह्मवादिनी कन्याओं की एक विशेषता क्या थी?
a) वे विवाह नहीं करती थीं
b) वे राज्य शासन संभालती थीं
c) वे तपश्चर्या द्वारा अभीष्ट की प्राप्ति करती थीं ✅
d) वे केवल गृहकार्य करती थीं

53. उमा, पीवरी और धर्मव्रता की समानता किस बात में हैं?
a) सभी रानियाँ थीं
b) सभी कौरव कुल से थीं
c) सभी ने तपस्या के बल पर इच्छित वर पाया ✅
d) सभी ने युद्ध जीते

54. पूर्व-वैदिक-युगीन अपाला का उल्लेख किस भूमिका में हुआ है?
a) प्रसिद्ध नर्तकी के रूप में
b) प्रसिद्ध कवयित्री के रूप में
c) पिता के कृषि कार्य में सहयोगी कन्या के रूप में ✅
d) योद्धा के रूप में

55. पौराणिक काल की कन्याओं की ललित कलाओं में निपुणता से क्या संकेत मिलता है?
a) वे केवल मनोरंजन का साधन थीं
b) उन्हें सौंदर्य प्रतियोगिताएँ करानी थीं
c) उन्हें सांस्कृतिक व बौद्धिक विकास का अवसर मिला हुआ था ✅
d) उन्हें राजनीति से दूर रखा गया

56. गुप्तकाल में गान्धर्व विवाह के उदाहरण किस सामाजिक प्रवृत्ति को दर्शाते हैं?
a) केवल माता-पिता द्वारा तय विवाह
b) जाति-आधारित विवाह
c) प्रेमाधारित स्वेच्छा विवाह ✅
d) बाल विवाह की प्रथा

57. हर्षकालीन सामान्य परिवारों में नारी शिक्षा के लगभग अवरुद्ध हो जाने से क्या निष्कर्ष निकलता है?
a) शिक्षा केवल पुरुषों का अधिकार बनती जा रही थी ✅
b) शिक्षा सभी के लिए निषिद्ध थी
c) शिक्षा केवल निचले वर्ग को मिल रही थी
d) शिक्षा का महत्व समाप्त हो गया था

58. हर्षकाल में अभिजात्य वर्ग की कन्याओं का प्राकृत और संस्कृत काव्य में प्रवीण होना किसका प्रतीक है?
a) केवल मौखिक परंपरा का
b) उच्च स्तरीय साहित्यिक शिक्षा का ✅
c) केवल धार्मिक अनुष्ठानों का
d) शिल्पकला का

59. ‘भारतीय नारी की युग-युगीन स्थिति’ शीर्षक के अंतर्गत पौराणिक काल के अतिरिक्त किस-किस काल की नारी स्थिति पर अलग–अलग चर्चा का संकेत मिलता है?
a) केवल आधुनिक काल
b) केवल वैदिक काल
c) वैदिक, महाकाव्य, स्मृति, पूर्वमध्यकाल, मध्यकाल, ब्रिटिश और आधुनिक काल ✅
d) केवल मध्यकाल और आधुनिक काल

60. पौराणिक काल में नारी की शिक्षा और विवाह सम्बन्धी स्वतंत्रता को किस रूप में देखा जा सकता है?
a) नारी दासता के रूप में
b) नारी के पूर्ण पराधीन होने के रूप में
c) नारी के अपेक्षाकृत उच्च सामाजिक दर्जे के रूप में ✅
d) नारी के समाज से बहिष्कार के रूप में

61. पौराणिक काल की नारी शिक्षा में व्यावहारिक रूप से गृहस्थी कार्यों की शिक्षा देने का मुख्य उद्देश्य क्या समझा जा सकता है?
a) उन्हें राजसत्ता के लिए तैयार करना
b) उन्हें युद्ध के लिए तैयार करना
c) उन्हें सफल गृहिणी बनाना ✅
d) उन्हें व्यापार के लिए प्रशिक्षित करना

62. गुप्तकाल को धार्मिक पुनरुत्थान का काल कहने का एक कारण क्या है?
a) बौद्ध धर्म का पूर्ण नाश
b) जैन धर्म का अंत
c) वैदिक धर्म का भागवत् रूप में पुनर्प्रस्तुतीकरण ✅
d) ईसाई धर्म का प्रसार

63. पौराणिक काल में पुराणों की रचना में इतिहास और काल्पनिक कथाओं दोनों को शामिल करने से क्या संकेत मिलता है?
a) केवल कल्पना पर बल था
b) केवल तथ्यपरक इतिहास लिखा जा रहा था
c) धर्म, इतिहास और कल्पना का मिश्रित स्वरूप बनाया गया ✅
d) इतिहास को महत्व नहीं दिया गया

64. पौराणिक काल को गुप्त काल से आगे बढ़ाकर हर्षकाल तक समाहित करने का क्या लाभ है?
a) काल छोटा हो जाता है
b) नारी की स्थिति का विश्लेषण कठिन हो जाता है
c) पुराण-रचना और नारी स्थिति का व्यापक परिप्रेक्ष्य मिलता है ✅
d) गुप्तों की भूमिका समाप्त हो जाती है

65. हर्षकाल में नारी की शिक्षा केवल अभिजात्य वर्ग में सीमित रह जाने से समाज की कौन सी प्रवृत्ति उजागर होती है?
a) समान शिक्षा का विस्तार
b) लोकतांत्रिक सोच
c) वर्ग-आधारित शैक्षिक असमानता ✅
d) नारी के प्रति अत्यधिक सम्मान

66. ‘हर्षचरित’ में राज्यश्री के संदर्भ से नारी के किस विकास पक्ष पर विशेष प्रकाश पड़ता है?
a) आर्थिक विकास
b) सैन्य प्रशिक्षण
c) सांस्कृतिक एवं कलात्मक विकास ✅
d) राजनीतिक विकास

67. पौराणिक काल में नारी के लिए ‘तपश्चर्या’ का महत्व किस रूप में उभरकर आता है?
a) केवल दंड के रूप में
b) केवल दिखावे के लिए
c) इच्छित वर एवं अभीष्ट प्राप्ति के साधन के रूप में ✅
d) युद्ध की तैयारी के रूप में

68. पौराणिक काल में नारी की स्वतंत्र निर्णय क्षमता विशेषतः किस क्षेत्र में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है?
a) कर निर्धारण में
b) युद्ध नीति में
c) अपने विवाह आदि के निर्णय में ✅
d) राज्य प्रशासन में

69. पौराणिक काल में नारी के लिए पर्दा प्रथा का अभाव किस ऐतिहासिक प्रवृत्ति से भिन्न था?
a) उत्तर मध्यकालीन कठोर पर्दा प्रथा से ✅
b) वैदिक काल से
c) स्मृति काल से
d) हर्षकाल से

70. पौराणिक काल की नारी की समग्र स्थिति को संक्षेप में कैसे अभिव्यक्त किया जा सकता है?
a) शोषित, निरक्षर और पराधीन
b) शिक्षा, विवाह निर्णय और सामाजिक जीवन में अपेक्षाकृत स्वतंत्र व सम्मानजनक ✅
c) केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित
d) पूर्णतः गृहबंदी और निराशाजनक

-डॉ. मोहनलाल गुप्ता

पुराण कालीन नारी MCQ : मुख्य अध्ययन सामग्री

पौराणिक काल में नारी की स्थिति

पूर्वमध्यकाल में नारी MCQ

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पूर्वमध्यकाल में नारी MCQ

पूर्वमध्यकाल में नारी MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए “पूर्वमध्यकाल में नारी की स्थिति” विषय पर 70 बहुविकल्पीय प्रश्न। सही विकल्प के अंत में ✅ हरा टिक मार्क है।

1. पूर्वमध्यकाल में नारी की स्थिति से आशय किस समय के भारत में नारी की स्थिति से है?
a) वैदिक काल
b) महाकाव्य काल
c) हर्ष की मृत्यु के बाद का काल ✅
d) ब्रिटिश शासन काल

2. हर्ष की मृत्यु से मुसलमानों के शासन की स्थापना तक के काल को क्या कहा जाता है?
a) प्राक्‌ ऐतिहासिक काल
b) पूर्वमध्यकाल ✅
c) उत्तरमध्यकाल
d) आधुनिक काल

3. बहुत से इतिहासकार पूर्वमध्यकाल की समय-सीमा किस प्रकार मानते हैं?
a) ई.200 से ई.800 तक
b) ई.400 से ई.1000 तक
c) ई.600 से ई.1300 तक ✅
d) ई.700 से ई.1400 तक

4. पूर्वमध्यकाल को और किस नाम से जाना जाता है?
a) गुप्त काल
b) राजपूत काल ✅
c) मौर्य काल
d) संगम युग

5. भारतीय इतिहास में प्राचीन काल की समाप्ति किस घटना से मानी जाती है?
a) अशोक की मृत्यु से
b) चंद्रगुप्त द्वितीय की मृत्यु से
c) हर्ष की मृत्यु से ✅
d) अकबर की मृत्यु से

6. हर्ष की मृत्यु किस ईस्वी सन् में मानी जाती है?
a) 550 ई.
b) 648 ई. ✅
c) 712 ई.
d) 800 ई.

7. हर्ष की मृत्यु के बाद भारतीय राजनीति के पटल से कौन-सा प्राचीन वर्ग लुप्त हो गया?
a) प्राचीन वैश्य
b) प्राचीन ब्राह्मण
c) प्राचीन क्षत्रिय ✅
d) प्राचीन शूद्र

8. हर्ष के बाद आरम्भ होने वाले युग को क्या कहा जाता है?
a) मौर्य युग
b) गुप्त युग
c) राजपूत-युग ✅
d) मुगल-युग

9. सातवीं से बारहवीं शताब्दी ईस्वी तक के काल को क्या कहा गया है?
a) उत्तर-वैदिक काल
b) पूर्व-मध्य-काल ✅
c) पौराणिक काल
d) औपनिवेशिक काल

10. पूर्वमध्यकाल तक आते-आते स्त्री के साथ क्या हुआ?
a) अधिकार बढ़ गए
b) अधिकार यथावत रहे
c) बहुत से अधिकार सीमित कर दिए गए ✅
d) स्त्री को पूर्ण स्वतंत्रता मिली

11. विज्ञानेश्वर ने किसका उद्धरण देकर स्त्री-आचरण पर टिप्पणी की?
a) मनु का
b) नारद का
c) शंख का ✅
d) वशिष्ठ का

12. शंख के उद्धरण के अनुसार स्त्री को घर से बाहर जाते समय क्या नहीं करना चाहिए?
a) अकेले जाना
b) गहने पहनना
c) बिना चादर ओढ़े जाना ✅
d) बच्चों को साथ ले जाना

13. शंख के अनुसार स्त्री को किनके अतिरिक्त किसी पर पुरुष से बात नहीं करनी चाहिए?
a) गुरु, पिता, भाई
b) बनिये, सन्यासी, वृद्ध वैद्य ✅
c) राजा, मंत्री, सैनिक
d) आचार्य, पंडित, लेखक

14. शंख के अनुसार स्त्री को अपने वस्त्र के बारे में क्या ध्यान रखना चाहिए?
a) केवल सिर ढँका होना चाहिए
b) घुटनों तक वस्त्र होना चाहिए
c) एड़ी तक वस्त्र पहने ✅
d) वस्त्र का रंग श्वेत हो

15. शंख के अनुसार स्त्री को किस प्रकार हँसना निषिद्ध बताया गया है?
a) ऊँची आवाज में
b) दूसरों के सामने
c) पति के सामने
d) मुँह ढके बिना ✅

16. धर्मशास्त्रीय नियमों के फलस्वरूप स्त्री किसके अधीन हो गई?
a) केवल राज्य के
b) केवल धर्मगुरुओं के
c) सामाजिक, धार्मिक और आर्थिक रूप से पुरुष के अधीन ✅
d) केवल आर्थिक रूप से स्वतंत्र

17. कुलीन स्त्रियों के चरित्र-भ्रष्ट होने का कारण किनकी संगति को माना गया?
a) साध्वी स्त्रियाँ
b) धूर्त, वेश्या, अभिसारिणी आदि स्त्रियाँ ✅
c) गृहिणी स्त्रियाँ
d) शिक्षित स्त्रियाँ

18. पूर्वमध्यकाल में स्त्री पर लगाए गए अनेक नियन्त्रणों का मुख्य परिणाम क्या हुआ?
a) स्त्री अधिक शिक्षित हुई
b) स्त्री शस्त्र-विद्या में निपुण हुई
c) स्त्री पुरुष की पूर्ण सहचरी बनी
d) स्त्री पुरुष के अधीनस्थ हो गई ✅

19. पूर्वमध्यकाल में भी किन क्षेत्रों में प्रज्ञा-सम्पन्न स्त्रियों का योगदान उल्लेखनीय रहा?
a) कृषि एवं व्यापार
b) काव्य, साहित्य एवं ललित कलाएँ ✅
c) सैनिक और प्रशासनिक क्षेत्र
d) उद्योग एवं विज्ञान

20. मंडन मिश्र और शंकर के मध्य हुए शास्त्रार्थ की निर्णायिका कौन थीं?
a) अवन्ति सुन्दरी
b) भारती ✅
c) गार्गी
d) मैत्रेयी

21. भारती किस विद्या में विशेष रूप से पारंगत मानी गईं?
a) आयुर्वेद, खगोल
b) अर्थशास्त्र, राजनीति
c) तर्क, मीमांसा, वेदान्त, साहित्य एवं शास्त्रार्थ ✅
d) शिल्प, वास्तु, नृत्य

22. कवि राजशेखर की पत्नी का नाम क्या था, जो उत्कृष्ट कवयित्री थीं?
a) भारती
b) लीलावती
c) अवन्ति सुन्दरी ✅
d) भानुमती

23. अवन्ति सुन्दरी किस प्रकार के कार्य के लिए विशेष प्रसिद्ध थीं?
a) युद्ध नीति
b) भक्ति-गीत रचना
c) टीकाकार एवं कवयित्री के रूप में ✅
d) मूर्ति-निर्माण

24. पूर्वमध्यकाल में कुछ स्त्रियाँ शासन-व्यवस्था में कैसी भूमिका निभाती थीं?
a) केवल सलाहकार
b) केवल कर-संग्रहकर्ता
c) केवल धार्मिक अनुष्ठानकर्ता
d) शासक अथवा अभिभावक के अभाव में स्वयं शासन करती थीं ✅

25. पूर्व-मध्य कालीन समाज में किस प्रकार के विवाह का प्रचलन विशेष रूप से बढ़ गया था?
a) स्वयम्बर
b) गन्धर्व विवाह
c) अल्प-वय-विवाह ✅
d) विधवा-विवाह

26. अल्प-वय-विवाह के प्रचलन का प्रमुख कारण क्या बताया गया है?
a) दहेज प्रथा
b) शिक्षा का अभाव
c) सामाजिक दिखावा
d) विदेशी, विशेषकर इस्लामी आक्रमण ✅

27. विदेशियों द्वारा भारतीय स्त्रियों से विवाह करने की प्रवृत्ति के परिणामस्वरूप क्या उपाय किये गए?
a) अंतरजातीय विवाह प्रोत्साहित हुए
b) बहुविवाह बन्द कर दिया गया
c) तलाक प्रथा प्रारम्भ हुई
d) आर्य-रक्त की शुद्धता हेतु बाल-विवाह का प्रावधान किया गया ✅

28. धर्मशास्त्रकारों ने बाल-विवाह का प्रावधान किस उद्देश्य से किया?
a) जनसंख्या बढ़ाने के लिए
b) आर्थिक समृद्धि के लिए
c) स्त्रियों के कौमार्य की रक्षा के लिए ✅
d) शिक्षा प्रसार हेतु

29. पूर्वमध्यकाल की नारी की स्थिति की तुलना यदि वैदिक नारी से की जाए तो वह कैसी प्रतीत होती है?
a) अधिक स्वतंत्र
b) लगभग समान
c) बिल्कुल भिन्न और अधिक बन्धनयुक्त ✅
d) केवल धार्मिक रूप से भिन्न

30. पूर्वमध्यकाल की नारी की स्थिति सम्बन्धी लेख किस लेखक द्वारा रचित है?
a) डॉ. रामशरण शर्मा
b) डॉ. मोहनलाल गुप्ता ✅
c) डॉ. इरफान हबीब
d) डॉ. सतीश चन्द्र

-डॉ. मोहनलाल गुप्ता

पूर्वमध्यकाल में नारी MCQ : मुख्य अध्ययन सामग्री

पूर्वमध्यकाल में नारी की स्थिति

मध्यकाल में नारी MCQ

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मध्यकाल में नारी

मध्यकाल में नारी MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए “मध्यकाल में नारी की स्थिति” विषय पर 70 बहुविकल्पीय प्रश्न। सही विकल्प के अंत में ✅ हरा टिक मार्क है।

1. मध्यकाल में नारी की स्थिति प्राचीन काल की अपेक्षा खराब होने का मुख्य कारण क्या था?
a) ब्रिटिश शासन की स्थापना
b) इस्लामिक शासन की स्थापना ✅
c) हिन्दू राजाओं के आपसी संघर्ष
d) यूरोपियन व्यापारियों का आगमन

2. मध्यकाल में स्त्रियों को संयुक्त परिवार में किस अधिकार से वंचित कर दिया गया था?
a) विवाह का अधिकार
b) तलाक का अधिकार
c) शिक्षा एवं सम्पत्ति का अधिकार ✅
d) मताधिकार

3. मध्यकाल में पुत्रियों को किस रूप में देखा जाने लगा?
a) कुल की रक्षक
b) परायी धरोहर ✅
c) गृहलक्ष्मी
d) कुलदेवी

4. मध्यकाल में स्त्रियों का प्रमुख कार्य क्या माना जाने लगा?
a) शासन चलाना
b) व्यापार करना
c) परिवार की सेवा करना ✅
d) युद्ध में भाग लेना

5. मध्यकाल में नारी को किस रूप में अधिक देखा जाने लगा?
a) शक्ति स्वरूपा
b) भोग की वस्तु ✅
c) विदुषी
d) भक्त

6. विदेशी आक्रांताओं के भय से किस प्रथा को विशेष बढ़ावा मिला?
a) स्वयंवर
b) दहेज
c) सती एवं जौहर ✅
d) कन्यादान

7. मध्यकाल में किस नई कुप्रथा ने जन्म लिया?
a) बहुपत्नी प्रथा
b) कन्या-वध ✅
c) दहेज प्रथा
d) नर-बली

8. परिवार की बड़ी-बूढ़ी अशिक्षित स्त्रियाँ स्वयं को क्या समझने लगी थीं?
a) राजा की सल्लाहकार
b) धर्म की रक्षक ✅
c) समाज-सुधारक
d) वेद की ज्ञाता

9. पुत्र जन्म न होने पर स्त्री को प्रायः क्या सहना पड़ता था?
a) राज्य से निष्कासन
b) मृत्युदण्ड
c) परिवार की अन्य महिलाओं की प्रताड़ना ✅
d) जेल

10. वृद्धाएँ पुत्र प्राप्ति हेतु पुत्रों को क्या करने के लिए उकसाती थीं?
a) संन्यास लेने के लिए
b) विदेश जाने के लिए
c) दूसरा विवाह करने के लिए ✅
d) व्यापार करने के लिए

11. किस-किस कुरीतियों के कारण वैदिक काल जैसा स्त्री सम्मान नहीं रहा?
a) दहेज और शिक्षा
b) पर्दा, सती और बाल-विवाह ✅
c) व्यापार और कृषि
d) सेना और राजनीति

12. अनमेल विवाह का एक बड़ा दुष्परिणाम क्या था?
a) पुत्रियों की अधिक संख्या
b) स्त्रियों का कम आयु में विधवा होना ✅
c) पुरुषों का संन्यास लेना
d) राज्य का विभाजन

13. भारत पर इस्लाम के आक्रमण किस ईस्वी से आरम्भ हुए?
a) 600 ई.
b) 712 ई. ✅
c) 950 ई.
d) 1192 ई.

14. 1192 ई. के बाद किस क्षेत्र पर व्यापक रूप से इस्लामी शासन स्थापित हो गया?
a) दक्कन
b) कश्मीर
c) उत्तरी भारत का बड़ा भाग ✅
d) असम

15. हिन्दू समाज को इस्लामी आक्रमणों से बचाने हेतु क्या किया गया?
a) करों में कमी
b) सामाजिक वर्जनाओं की दीवारें खड़ी की गईं ✅
c) सेना भंग कर दी गई
d) विदेश गमन बढ़ाया गया

16. इन सामाजिक वर्जनाओं का सबसे बुरा प्रभाव किस पर पड़ा?
a) किसानों पर
b) ब्राह्मणों पर
c) नारी की स्थिति पर ✅
d) सैनिकों पर

17. मध्यकाल में नारी के किन अधिकारों पर सबसे अधिक संकट आया?
a) कराधिकार
b) सेना में भर्ती
c) शिक्षा एवं सम्पत्ति सम्बन्धी अधिकार ✅
d) व्यापारिक अधिकार

18. मुस्लिम महिलाओं के लिए अरब और तुर्किस्तान में क्या अनिवार्य था?
a) तलवार धारण करना
b) पर्दा, हिजाब एवं बुर्का ✅
c) घुड़सवारी
d) व्यापार

19. भारत में मुस्लिम आक्रांताओं ने स्त्रियों के लिए क्या अनिवार्य किया?
a) तलवारबाजी
b) खेती
c) पर्दा प्रथा ✅
d) संन्यास

20. हिन्दू महिलाएं बाहर निकलते समय क्या करती थीं?
a) शस्त्र धारण
b) मुख पर पर्दा और शरीर चादर से ढंकना ✅
c) नृत्य करना
d) शंख बजाना

21. अकबर का स्त्री संबंधी कठोर आदेश किस बात पर था?
a) बिना गहने के बाहर निकलने पर दण्ड
b) बिना घूँघट के बाजार में दिखने पर वेश्यालय भेजना ✅
c) पढ़ने-लिखने पर रोक
d) मंदिर जाने पर रोक

22. 16वीं सदी के यात्री बरबोसा ने किस प्रथा के प्रचलन का वर्णन किया है?
a) सती प्रथा
b) दहेज प्रथा
c) पर्दा प्रथा ✅
d) स्वर्ण मुद्रा

23. बरबोसा के अनुसार अमीर परिवारों में पुरुषों एवं औरतों के बीच संदेशवाहक कौन होते थे?
a) ब्राह्मण
b) सैनिक
c) हिंजड़े ✅
d) दास

24. पर्दा प्रथा के कारण बीमार औरतों के इलाज में क्या समस्या थी?
a) दवा नहीं मिलती थी
b) मर्द चिकित्सक को हरम में प्रवेश नहीं ✅
c) पानी नहीं दिया जाता
d) मंदिर नहीं जाने दिया जाता

25. मुसलमान महिला द्वारा थोड़ी देर पर्दा हटाने पर क्या हो सकता था?
a) पुरस्कार
b) न्यायालय में सम्मान
c) भयंकर दण्ड या त्याग ✅
d) नौकरी

26. काबुल के गवर्नर अमीर खाँ ने अपनी पत्नी को क्यों छोड़ दिया?
a) बीमारी के कारण
b) दहेज कम होने के कारण
c) हाथी से कूदते समय बेपर्दा हो जाने के कारण ✅
d) संतान न होने के कारण

27. मुसलमान महिला अपने पुरुष सम्बन्धियों से कब बात कर सकती थी?
a) कभी नहीं
b) केवल मस्जिद में
c) केवल पति की उपस्थिति में ✅
d) अकेले में

28. किस वर्ग की औरतें युद्धकला की शिक्षा लेकर शिकार एवं अभियानों में जाती थीं?
a) वैश्य
b) शूद्र
c) राजपूत औरतें ✅
d) साध्वी

29. समय के साथ राजपूत महिलाओं में किस बंधन की कठोरता बढ़ती गई?
a) दहेज
b) तलाक
c) पर्दा प्रथा ✅
d) शिक्षा

30. मध्यकालीन भारतीय परिवारों में बेटी का जन्म कैसा माना जाता था?
a) उत्सव का अवसर
b) अशुभ माना जाता था ✅
c) ईश्वर का वरदान
d) राजकीय दायित्व

31. टॉड के अनुसार राजपूत बेटी के जन्म को कैसे देखते थे?
a) विजय दिवस
b) ईश्वर की देन
c) अभिशाप स्वरूप दिन ✅
d) पुण्य दिवस

32. यदि किसी स्त्री की लगातार बेटियाँ होती थीं तो प्रायः क्या होता था?
a) पदोन्नति
b) उसे देविका मानते
c) पति द्वारा उसे छोड़ दिया जाता ✅
d) उसे दहेज दिया जाता

33. शाही परिवार में लड़की के जन्म पर सामान्यतः कौन खुशी मनाती थीं?
a) सैनिक
b) काजी
c) केवल हरम की बेगमें ✅
d) सारे दरबारी

34. क्षत्रिय कन्याओं से बलपूर्वक विवाह होने पर ‘बेटी का बाप’ होना कैसे देखा जाने लगा?
a) सम्मान की बात
b) नीची दृष्टि से ✅
c) धार्मिक कार्य
d) राजनीतिक पद

35. कन्या-वध मुख्यतः किस समाज में ज्यादा प्रचलित था?
a) ब्राह्मणों में
b) वैश्य समाज में
c) राजपूत और कुछ योद्धा जातियों में ✅
d) शूद्रों में

36. सामान्य परिवारों में बेटी के जन्म की सूचना दाई कैसे देती थी?
a) थारे सुरज जलमियो
b) थारे भाटो जलमियो है ✅
c) थारी लक्ष्मी आई है
d) थारा वारिस आ गया

37. पुत्री के जन्म पर किस धातु की थाली/तवा बजाया जाता था?
a) चांदी
b) सोना
c) कांसा
d) लोहे का तवा ✅

38. पुत्र के जन्म पर किस बर्तन की थाली बजती थी?
a) मिट्टी का घड़ा
b) लोहे का तवा
c) कांसे की थाली ✅
d) लकड़ी का पटका

39. लोहे के तवे की ध्वनि किसका प्रतीक थी?
a) वैभव
b) भोजन पर अधिकार
c) घर की जिम्मेदारियां एवं अशुभ ध्वनि ✅
d) विजय

40. कांसे की थाली का शब्द किसका सूचक था?
a) अशुभ संकेत
b) कर वसूली
c) घर के भोजन पर अधिकार एवं मंगल ध्वनि ✅
d) युद्ध की घोषणा

41. बाल-विवाह का प्रचलन किस काल से आरम्भ माना जाता है?
a) वैदिक काल
b) स्मृति काल ✅
c) ब्रिटिश काल
d) आधुनिक काल

42. मध्यकाल की राजनीतिक परिस्थितियों ने बाल-विवाह को क्या बना दिया?
a) निषिद्ध
b) अनिवार्य ✅
c) विरल
d) वैकल्पिक

43. पुत्री को जन्म के बाद अधिकतम कितनी आयु तक घर में रखना वर्जित माना जाता था?
a) 4–5 वर्ष
b) 6–8 वर्ष ✅
c) 10–12 वर्ष
d) 14–16 वर्ष

44. 16वीं सदी के बंगाली कवि मुकंदराय के अनुसार नौ वर्ष की आयु में बेटी का विवाह कराने वाला पिता कैसा माना जाता था?
a) पापी
b) अत्याचारी
c) भाग्यवान एवं ईश्वर का कृपापात्र ✅
d) मूर्ख

45. बाल-विवाह की एक प्रमुख बुराई क्या थी?
a) शिक्षा का प्रसार
b) दहेज की समाप्ति
c) वर-वधू अपनी पसंद का जीवनसाथी न चुन पाना ✅
d) युद्ध कम होना

46. वर पक्ष प्रायः वधू पक्ष से क्या मांगता था?
a) जमीन
b) सेना
c) दहेज ✅
d) मंदिर

47. कई बार वधू पक्ष अधिक धन देकर किस प्रकार का विवाह करवा देता था?
a) समान आयु वाले से
b) बहुत बड़े आयु अंतर में, बड़ी आयु की कन्या का छोटे दूल्हे से ✅
c) विदेश में
d) राजकुमार से

48. बाल-विवाह की बुराइयों के कारण अकबर को क्या आदेश देना पड़ा?
a) विवाह पर पूर्ण प्रतिबंध
b) बिना दहेज विवाह अनिवार्य
c) यदि स्त्री पति से 12 वर्ष बड़ी हो तो विवाह अमान्य ✅
d) 5 वर्ष से कम उम्र में विवाह

49. कुछ क्षेत्रों में वर पक्ष वधू पक्ष को क्या देता था?
a) केवल वस्त्र
b) केवल भूमि
c) धन ✅
d) दही-चूरमा

50. रूपवती कम आयु की कन्याओं के विवाह के लिए प्रौढ़ वर क्या करते थे?
a) तपस्या
b) अधिक धन देना ✅
c) युद्ध
d) विदेश गमन

51. राव सुरताण की पुत्री ताराबाई ने विवाह के लिए क्या शर्त रखी?
a) दहेज न लेना
b) तीर्थयात्रा करना
c) उसके पिता का राज्य पठानों से मुक्त कराना ✅
d) महल बनवाना

52. ताराबाई से विवाह करने वाला वीर कौन था?
a) महाराणा प्रताप
b) हुमायूँ
c) पृथ्वीराज का भाई जयमल ✅
d) मल्हारराव होलकर

53. मोहिल सरदार की कन्या कर्मदेवी ने किससे विवाह स्वीकार किया?
a) मंडोर के राव के उत्तराधिकारी से
b) दिल्ली के सुल्तान से
c) पूगल के राजकुमार साधु से ✅
d) अकबर से

54. औरंगजेब द्वारा भेजे गए डोले को अस्वीकार कर किस राजकुमारी ने मेवाड़ के महाराणा राजसिंह को विवाह हेतु बुलाया?
a) मीराबाई
b) चारुमति ✅
c) रूपमती
d) अकाबाई

55. अकबर के इबादतखाने में उलेमाओं ने मुसलमानों को निकाह द्वारा कितनी पत्नियाँ रखने की अनुमति बताई?
a) दो
b) तीन
c) चार ✅
d) पाँच

56. उलेमाओं के अनुसार ‘मूता’ के द्वारा मुसलमान कितने विवाह कर सकता था?
a) केवल एक
b) दो
c) दस
d) असंख्य ✅

57. अकबर ने साधारण मुसलमान के लिए पत्नी संख्या पर क्या सीमा लगाई?
a) कोई सीमा नहीं
b) दो पत्नियाँ
c) केवल एक पत्नी ✅
d) पाँच पत्नियाँ

58. दूसरी पत्नी रखने की अनुमति किन परिस्थितियों में दी जानी थी?
a) पहली पत्नी बूढ़ी हो जाए
b) पहली पत्नी बीमार हो
c) पहली पत्नी बांझ साबित हो ✅
d) पुत्र न हो

59. हिन्दू समाज में एक-पत्नी प्रथा मुख्यतः किस वर्ग में प्रचलित थी?
a) केवल राजाओं में
b) शूद्रों में
c) राजा और धनी वर्ग को छोड़कर सामान्य समाज में ✅
d) केवल ब्राह्मणों में

60. हिन्दू समाज में दूसरी पत्नी लेने के लिए प्रायः क्या करना पड़ता था?
a) दरबार की अनुमति
b) विदेश यात्रा
c) ब्राह्मणों की स्वीकृति ✅
d) कर-वृद्धि

61. विवाह का निर्णय सामान्यतः किसके द्वारा लिया जाता था?
a) स्वयं कन्या द्वारा
b) पंचायत द्वारा
c) माता-पिता अथवा परिवार के वरिष्ठ सदस्य द्वारा ✅
d) राजा द्वारा

62. हिन्दू समाज में विधवा-विवाह की क्या स्थिति थी?
a) सर्वत्र स्वीकार
b) केवल राजघरानों में
c) पूर्णतः निषिद्ध (ऊँचे वर्ग में) ✅
d) केवल नगरों में

63. जिन विधवाओं को सती नहीं किया जाता था, उन्हें किस रूप में देखा जाता था?
a) शुभ
b) कुलदेवी
c) तिरस्कृत एवं अशुभ ✅
d) राजमाता

64. विधवा स्त्री किस प्रकार के वस्त्र एवं भोजन से वंचित रहती थी?
a) साधारण भोजन
b) फलाहार
c) रंगीन वस्त्र, श्रंगार, आभूषण, मसालेदार भोजन ✅
d) जल

65. विधवा का शयन प्रायः कैसे होता था?
a) कोमल बिस्तर पर
b) सोने के पलंग पर
c) धरती पर ✅
d) झूले पर

66. विधवा होते ही स्त्री को क्या कराना पड़ता था?
a) तपस्या
b) उपनयन
c) सिर के बाल कटवाने ✅
d) तीर्थयात्रा

67. सती-प्रथा पर बलपूर्वक रोक लगाने वाला प्रथम मुस्लिम शासक कौन था?
a) अकबर
b) जहाँगीर
c) मुहम्मद बिन तुगलक ✅
d) औरंगजेब

68. अकबर ने बलपूर्वक सती के विरुद्ध क्या किया?
a) प्रोत्साहन
b) हस्तक्षेप कर कई विधवाओं को बचाया ✅
c) कर वसूला
d) मंदिर तोड़े

69. औरंगजेब ने सती-प्रथा के सम्बन्ध में क्या आदेश दिया?
a) सती अनिवार्य
b) सती को कर-मुक्त किया
c) सती-प्रथा को निषिद्ध घोषित किया ✅
d) सती के लिए पुरस्कार रखा

70. मध्यकाल में हिन्दू महिला को आर्थिक रूप से क्या अधिकार प्रायः नहीं मिलते थे?
a) दहेज
b) शिक्षा का अधिकार
c) पीहर और ससुराल की सम्पत्ति में उत्तराधिकार ✅
d) पूजा पाठ का अधिकार

-डॉ. मोहनलाल गुप्ता

मध्यकाल में नारी MCQ : मुख्य अध्ययन सामग्री

मध्यकाल में नारी की स्थिति

ब्रिटिश काल में नारी MCQ

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ब्रिटिश काल में नारी MCQ

ब्रिटिश काल में नारी MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए ब्रिटिश काल में नारी की स्थिति विषय पर 70 बहुविकल्पीय प्रश्न। सही विकल्प के अंत में ✅ हरा टिक मार्क है।

1. ब्रिटिश काल में नारी की स्थिति में मूल परिवर्तन किन कारणों से आया?
a) केवल भारतीय राजाओं के प्रयास से
b) केवल उद्योगीकरण से
c) अंग्रेजी शिक्षा, अंग्रेजी कानूनों एवं हिन्दू समाज सुधारकों के प्रयासों से ✅
d) केवल मिशनरियों के प्रयास से

2. परम्परा के नाम पर नारी पर होने वाले अत्याचारों को दूर करने में क्या लगा?
a) बहुत कम समय
b) बहुत लम्बा समय ✅
c) केवल एक दशक
d) केवल एक पीढ़ी

3. अंग्रेजी शिक्षा के प्रभाव से भारतीयों के मन में क्या उत्पन्न हुआ?
a) अन्धविश्वास
b) नए विचार ✅
c) जातिगत विद्वेष
d) सैन्य महत्वाकांक्षा

4. अंग्रेजी औरतों के रहन-सहन को देखकर भारतीय समाज पर क्या प्रभाव पड़ा?
a) भारतीय स्त्रियाँ अधिक पर्दानशील हो गईं
b) भारतीयों ने स्त्री-स्वतंत्रता को और घटाया
c) भारतीयों में नये सामाजिक विचार जगे ✅
d) स्त्री-शिक्षा का विरोध बढ़ा

5. शिक्षित भारतीयों ने पर्दा-प्रथा को कैसा समझा?
a) अनिवार्य
b) सार्थक
c) निरर्थक ✅
d) ईश्वरीय आदेश

6. पर्दा-प्रथा के विरोध का परिणाम क्या हुआ?
a) स्त्रियाँ घर में और कैद हो गईं
b) स्त्रियाँ राजनीति से अलग रहीं
c) हजारों स्त्रियों ने पर्दा त्यागकर राष्ट्रीय आन्दोलन में भाग लिया ✅
d) राष्ट्रीय आन्दोलन में स्त्रियों पर प्रतिबंध लगा

7. स्त्री-शिक्षा के प्रसार में किन संस्थाओं ने उल्लेखनीय कार्य किया?
a) आर्य समाज और ब्रह्मसमाज
b) थियोसोफिकल सोसायटी और दकन एजुकेशन सोसाइटी ✅
c) इस्लामिक स्कूल बोर्ड और चर्च बोर्ड
d) केवल प्रार्थना समाज

8. शिक्षित वर्ग ने स्त्री-शिक्षा के प्रति कैसा रुख अपनाया?
a) उदासीनता
b) विरोध
c) पूर्ण सहयोग ✅
d) निषेध

9. स्त्रियों के लिए किस प्रकार की विशेष शिक्षण-संस्थाओं की व्यवस्था की गई?
a) रात्रिकालीन शुल्कयुक्त संस्थाएँ
b) प्रातःकालीन निःशुल्क शिक्षण-संस्थाएँ ✅
c) केवल आश्रम आधारित शिक्षा
d) केवल उच्च शिक्षा संस्थान

10. चार्ल्स वुड के 1854 के शिक्षा सम्बन्धी सुझावों में क्या शामिल था?
a) केवल तकनीकी शिक्षा
b) केवल पुरुष शिक्षा
c) स्त्री-शिक्षा के बारे में भी परामर्श ✅
d) केवल धार्मिक शिक्षा

11. ब्रिटिश सरकार का स्त्री-शिक्षा के प्रति सामान्य रुख क्या था?
a) अत्यधिक उत्साहपूर्ण
b) अत्यधिक विरोधी
c) उदासीन ✅
d) पूर्ण प्रतिबंधात्मक

12. 19वीं सदी के उत्तरार्द्ध में लड़कियों की शिक्षा के क्षेत्र में क्या हुआ?
a) संस्थाओं की संख्या घट गई
b) कोई परिवर्तन नहीं हुआ
c) लड़कियों की शिक्षण-संस्थाओं में वृद्धि होने लगी ✅
d) केवल मिशनरी स्कूल बचे

13. 1882 में हण्टर आयोग ने बालिकाओं की शिक्षा के लिए क्या किया?
a) निजी स्कूल बंद करवाए
b) केवल परीक्षा शुल्क माफ किया
c) स्थानीय संस्थाओं को अनुदान दिया ✅
d) बालिकाओं की शिक्षा पर रोक लगाई

14. 18वीं–19वीं सदी के बीच अंग्रेज अधिकारियों ने किन कुरीतियों के विरुद्ध कानून बनाए?
a) केवल दहेज-प्रथा
b) केवल पर्दा-प्रथा
c) सती-प्रथा, बाल-विवाह, कन्या वध, दास-प्रथा आदि ✅
d) केवल बहु-विवाह

15. ब्रिटिश अधिकारियों ने विधवाओं के सम्बन्ध में कौन‑सा महत्वपूर्ण निर्णय लिया?
a) विधवा को सम्पत्ति अधिकार से वंचित किया
b) विधवा को मंदिर में भेजने का नियम बनाया
c) विधवा-पुनर्विवाह को वैध घोषित किया ✅
d) विधवाओं के पुनर्विवाह पर रोक लगाई

16. विलियम बैंटिक के काल में किस पर विशेष जोर दिया गया?
a) कर-वृद्धि
b) सैन्य विस्तार
c) समाज सुधार ✅
d) केवल व्यापार

17. जनवरी 1832 में अजमेर दरबार में विलियम बैंटिक ने क्या किया?
a) राजपूत राजाओं को कर बढ़ाने को कहा
b) समाज सुधार के विरुद्ध भाषण दिया
c) राजपूताना के राजाओं और ब्रिटिश अधिकारियों को नयी सामाजिक नीति अपनाने को प्रेरित किया ✅
d) सेना भर्ती का आदेश दिया

18. 1857 की क्रांति के बाद समाज सुधार कानूनों के साथ क्या हुआ?
a) उन्हें और कठोर बनाया गया
b) उन्हें तुरन्त समाप्त कर दिया गया
c) उन्हें लागू करने में ढील दी गई ✅
d) उन्हें केवल देसी राज्यों पर लागू किया गया

19. 1858 की महारानी विक्टोरिया की घोषणा में क्या कहा गया?
a) सरकार धर्म परिवर्तन कराएगी
b) सरकार कर नहीं लेगी
c) सरकार भारतीयों के धार्मिक एवं सामाजिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करेगी ✅
d) समाज सुधार को अनिवार्य करेगी

20. 1813 और 1817 के सती-प्रथा सम्बन्धी आदेशों की मुख्य कमी क्या थी?
a) वे केवल मौखिक थे
b) वे केवल राजपूतों पर लागू थे
c) वे कानून न होकर केवल शासकीय आदेश थे ✅
d) वे केवल ईसाइयों पर लागू थे

21. इन प्रारम्भिक आदेशों के तहत अंग्रेज अधिकारियों को क्या अधिकार मिला था?
a) सबको सती होने को बाध्य करना
b) सती पर पुरस्कार देना
c) अवयस्क या गर्भवती स्त्री को सती होने से रोकना ✅
d) केवल पुरुषों को दण्ड देना

22. सती-प्रथा के विरुद्ध बंगाल में प्रगतिशील आन्दोलन का नेतृत्व किसने किया?
a) ईश्वरचन्द्र विद्यासागर
b) स्वामी दयानन्द
c) विवेकानन्द
d) राजाराममोहन राय ✅

23. किस गवर्नर-जनरल ने 4 दिसम्बर 1829 को सती-प्रथा को गैर-कानूनी घोषित किया?
a) डलहौजी
b) कर्नवालिस
c) वेलेजली
d) विलियम बैंटिक ✅

24. 1830 में सती-निषेध कानून किन क्षेत्रों तक विस्तारित किया गया?
a) केवल पंजाब
b) केवल राजस्थान
c) बम्बई एवं मद्रास ✅
d) केवल असम

25. सती-निषेध कानून के अनुसार किस कार्य को दण्डनीय अपराध घोषित किया गया?
a) विधवा को भोजन देना
b) विधवा को घर में रखना
c) सती होने में किसी प्रकार की सहायता देना ✅
d) विधवा को पढ़ाना

26. जयपुर राज्य में सती-प्रथा को दण्डनीय अपराध कब घोषित किया गया?
a) 1829
b) 1830
c) 1846 ✅
d) 1857

27. 1856 के अंत तक राजस्थान में किस एक राज्य को छोड़कर शेष में सती-प्रथा समाप्त हो गई थी?
a) जोधपुर
b) बीकानेर
c) मेवाड़ ✅
d) कोटा

28. लगभग समूचे भारत में सती-प्रथा पर रोक किस वर्ष तक लग गई थी?
a) 1840
b) 1850
c) 1861 ✅
d) 1875

29. बाल-विवाह के विरुद्ध प्रथम महत्वपूर्ण वैधानिक कदम भारतीय दण्ड विधान में कब दिखता है?
a) 1854
b) 1860 ✅
c) 1872
d) 1885

30. 1860 के कानून में लड़की के लिए दाम्पत्य सहवास की न्यूनतम आयु क्या रखी गई?
a) 8 वर्ष
b) 9 वर्ष
c) 10 वर्ष ✅
d) 12 वर्ष

31. सरकार की प्रारम्भिक सोच बाल-विवाह की समाप्ति के बारे में क्या थी?
a) दमनात्मक कर लगाए जाएंगे
b) केवल सेना जाएगी
c) शिक्षा के द्वारा स्वतः जागृति आएगी और बाल-विवाह स्वयं समाप्त होगा ✅
d) मंदिरों के माध्यम से समाप्त होगा

32. बाल-विवाह के विरुद्ध आन्दोलन को इंग्लैण्ड तक ले जाने वाले समाजसुधारक कौन थे?
a) दयानन्द सरस्वती
b) लोकमान्य तिलक
c) बहरामजी मलबारी ✅
d) के. टी. तैलंग

33. के. टी. तैलंग का मत किस पर सुधार की आवश्यकता पर बल देता था?
a) विवाह की आयु की बजाय सहवास की आयु पर ✅
b) दहेज की राशि पर
c) केवल तलाक की व्यवस्था पर
d) केवल विधवा-विवाह पर

34. दयाराम गिदूमल ने सहवास-वय के लिए क्या सुझाव दिया?
a) 8 से 10 वर्ष
b) 10 से 11 वर्ष
c) 10 से 12 वर्ष ✅
d) 12 से 16 वर्ष

35. महादेव रानाडे किस आयु तक सहवास-वय बढ़ाने के पक्ष में थे?
a) 11 वर्ष
b) 12 वर्ष
c) 13 वर्ष
d) 14 वर्ष ✅

36. फूलमणी दासी की मृत्यु किस कारण से एक बड़ी बहस का मुद्दा बनी?
a) दहेज हत्या के कारण
b) भूख से मृत्यु
c) पति द्वारा पाशविक सहवास के कारण हुई मृत्यु ✅
d) महामारी से मृत्यु

37. फूलमणी के पति को क्यों दण्ड नहीं मिला?
a) वह राजा का रिश्तेदार था
b) समाज ने माफ कर दिया
c) 1860 के कानून में सहवास-वय 10 वर्ष होने का लाभ उठाया ✅
d) साक्ष्य न मिल सके

38. सहवास-वय विधेयक किस तिथि को पारित हुआ?
a) 4 दिसम्बर 1829
b) 19 मार्च 1891 ✅
c) 26 जुलाई 1856
d) 5 फरवरी 1847

39. सहवास-वय विधेयक के अनुसार लड़कियों की सहवास-वय क्या निर्धारित हुई?
a) 10 वर्ष
b) 11 वर्ष
c) 12 वर्ष ✅
d) 14 वर्ष

40. सहवास-वय विधेयक का लोकमान्य तिलक ने किस कारण विरोध किया?
a) वह स्त्री-शिक्षा के विरोधी थे
b) वह बाल-विवाह के समर्थक थे
c) उनका मत था कि ऐसे प्रतिबन्ध समाज स्वयं लगाए, विदेशी सरकार न लगाए ✅
d) वह अंग्रेज सरकार को मज़बूत करना चाहते थे

41. ब्रिटिश काल में कन्या-वध विशेष रूप से किन जातियों में प्रचलित था?
a) केवल ब्राह्मणों में
b) केवल मराठों में
c) राजपूतों, जाटों, मीणों, मेरों, मेवों आदि में ✅
d) केवल बनियों में

42. ब्रिटिश अधिकारियों को कन्या-वध की कुप्रथा का पहला पता किस वर्ष लगा?
a) 1775
b) 1780
c) 1789 ✅
d) 1800

43. 1795 और 1804 के कानूनों में कन्या-वध को किस रूप में वर्णित किया गया?
a) साधारण अपराध
b) कर-चोरी
c) हत्या का अपराध ✅
d) धार्मिक अनुष्ठान

44. राजपूताना में कन्या-वध को गैर-कानूनी घोषित करवाने में किन अधिकारियों की भूमिका रही?
a) मैकाले और नेहरू
b) कर्नवालिस और डलहौजी
c) जॉन लुडलो, जॉन सदरलैण्ड, विलकिंसन ✅
d) वेलेजली और कर्जन

45. 1834 में किन राज्यों ने कन्या-वध को प्रतिबंधित किया?
a) जयपुर और जोधपुर
b) बीकानेर और कोटा
c) कोटा एवं मेवाड़ ✅
d) बूंदी और धौलपुर

46. 1837 और 1839 में क्रमशः किस–किस राज्य में कन्या-वध रोकने के नियम बने?
a) जयपुर और बीकानेर
b) जोधपुर और बीकानेर
c) बीकानेर (1837) और जोधपुर (1839) ✅
d) मेवाड़ और धौलपुर

47. 1844 के आदेश के अनुसार त्याग की रकम के नियम किसके द्वारा तय हुए?
a) स्थानीय पण्डितों द्वारा
b) सेना द्वारा
c) राजपूताना के ए.जी.जी. सदरलैण्ड और पॉलिटिकल एजेंटों के संयुक्त प्रयासों से ✅
d) केवल जनता द्वारा

48. 1843 के आदेशानुसार 1000 रुपये से अधिक आय वाले जागीरदार राजपूत को त्याग में क्या देना था?
a) चारण को 50, भाट को 20 रुपये
b) चारण को 25, भाट को 9 रुपये ✅
c) चारण को 10, भाट को 5 रुपये
d) केवल भाट को 25 रुपये

49. हितैषिणी सभा उदयपुर ने 1877 में त्याग के सम्बन्ध में क्या निर्णय लिया?
a) त्याग पूरी तरह समाप्त
b) केवल चारणों को त्याग
c) केवल भाटों को त्याग
d) त्याग वही देंगे जिनकी आय 500 रुपये से अधिक हो और यह वार्षिक आय के 10% से अधिक न हो ✅

50. 1870 के कानून के अनुसार कन्या-वध पर निगरानी के लिए क्या अनिवार्य किया गया?
a) विवाह पंजीकरण
b) सम्पत्ति पंजीकरण
c) प्रत्येक बच्चे के जन्म का पंजीकरण ✅
d) कर-पंजीकरण

51. 19वीं सदी में अकेले जोधपुर राज्य में प्रतिवर्ष कन्या-वध की अनुमानित घटनाएँ कितनी थीं?
a) 50–60
b) 100–150
c) 300–400 ✅
d) 800–900

52. भारत की अनेक जातियों में प्रचलित डाकन-प्रथा विशेष रूप से कहाँ अधिक थी?
a) नगरीय मध्यवर्ग में
b) समुद्री तटवर्ती क्षेत्रों में
c) आदिवासी एवं जनजातीय समाज में ✅
d) ब्राह्मण बस्तियों में

53. डाकन-प्रथा के विरुद्ध ब्रिटिश सरकार ने अधिकारियों को क्या निर्देश दिए?
a) इसे प्रोत्साहन दें
b) इसे नजरअंदाज करें
c) स्थानीय शासकों पर दबाव डालकर इसे गैरकानूनी घोषित करवाएँ ✅
d) इसे राजाश्रय दें

54. डाकन-प्रथा को सबसे पहले गैरकानूनी और दण्डनीय अपराध किस राज्य ने घोषित किया?
a) जयपुर
b) जोधपुर
c) कोटा ✅
d) बीकानेर

55. मेवाड़ के महाराणा का डाकन-प्रथा के बारे में निजी विश्वास क्या था?
a) वह इसे अन्धविश्वास मानता था
b) वह इसका विरोधी था
c) वह स्वयं डाकन-प्रथा में विश्वास करता था ✅
d) उसे कुछ पता नहीं था

56. मेवाड़ में डाकन-प्रथा विरोधी कानून तो बना, परन्तु क्या स्थिति रही?
a) प्रथा तुरन्त समाप्त हो गई
b) प्रथा केवल कागज़ पर रही
c) यह कुप्रथा समाप्त नहीं हुई और निर्दोष स्त्रियों की हत्याएँ होती रहीं ✅
d) केवल पुरुष मारे जाने लगे

57. 19वीं सदी के अंत में डाकन-प्रथा रोकने के लिए मेवाड़ के रेजीडेन्ट कर्नल वाल्टर ने क्या किया?
a) सभी डाकनों को जेल भेजा
b) ग्रामों को जला दिया
c) प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर आदिवासी मुखियाओं से सौगन्ध ली कि वे हत्या न कर सरकार को सूचित करेंगे ✅
d) केवल कर बढ़ाया

58. डाकन-प्रथा के उल्लंघन पर सहमति-पत्र के अनुसार क्या दण्ड तय था?
a) 1 दिन की जेल
b) केवल जुर्माना
c) 6 मास का कारावास ✅
d) देश-निकाला

59. दासी-प्रथा में निर्धन लड़कियों के साथ अमीर लोग क्या करते थे?
a) उन्हें स्कूल भेजते थे
b) उन्हें मंदिर में दान करते थे
c) उन्हें खरीदकर अपनी बेटियों के दहेज में दासियों के रूप में भेजते थे ✅
d) उन्हें कृषि सीखाते थे

60. घरेलू दास-दासियों को किन नामों से पुकारा जाता था?
a) केवल नौकर
b) केवल सेवक
c) गोला, गोली, दावड़ी, वड़ारन, चाकर, दास आदि ✅
d) मंत्री और सरदार

61. 1833 के चार्टर एक्ट द्वारा ब्रिटिश भारत में किस प्रथा को गैरकानूनी घोषित किया गया?
a) बाल-विवाह
b) दहेज-प्रथा
c) दास-दासी प्रथा ✅
d) पर्दा-प्रथा

62. जयपुर राज्य में दास-व्यापार को प्रतिबंधित करने वाला आदेश किस वर्ष जारी हुआ?
a) 1830
b) 1835
c) 1839 ✅
d) 1845

63. 1 दिसम्बर 1840 को दास-व्यापार को प्रतिबंधित करने वाला आदेश किस राज्य ने जारी किया?
a) जयपुर
b) जोधपुर ✅
c) बीकानेर
d) मेवाड़

64. 1921 की जनगणना के अनुसार राजपूताने में घरेलू दास-दासियों की लगभग कितनी संख्या थी?
a) 60,000
b) 1,00,000
c) 1,60,755 ✅
d) 2,50,000

65. जोधपुर राज्य ने दास-प्रथा पर औपचारिक रोक किस वर्ष लगाई?
a) 1885
b) 1901
c) 1916
d) 1926 ✅

66. राजपूताने में बच्चों के क्रय-विक्रय की कुप्रथा में कौन‑सी जाति प्रमुख रूप से शामिल थी?
a) जाट
b) ब्राह्मण
c) बंजारा जाति ✅
d) लोधा

67. बच्चों की बिक्री से प्राप्त राशि का कितना प्रतिशत राजकोष में कर के रूप में जमा होता था?
a) 10 प्रतिशत
b) 25 प्रतिशत
c) 40 प्रतिशत ✅
d) 50 प्रतिशत

68. जयपुर संरक्षण परिषद ने 5 फरवरी 1847 के आदेश में किन संप्रदायों द्वारा चेला बनाने हेतु बच्चों की खरीद को असंवैधानिक घोषित किया?
a) सिख और आर्य समाजी
b) जैन और वैष्णव
c) नागा, दादूपंथी, सादू आदि ✅
d) केवल ईसाई मिशनरी

69. अधिकांश राजपूत रियासतों ने लड़के-लड़कियों के क्रय-विक्रय को असंवैधानिक किस वर्ष घोषित किया?
a) 1831
b) 1838
c) 1847 ✅
d) 1862

70. समय के साथ लड़के-लड़कियों के क्रय-विक्रय की प्रथा की स्थिति क्या हुई?
a) और मजबूत हो गई
b) केवल शहरों तक सीमित रही
c) केवल कागज़ों पर रही
d) धीरे-धीरे इस प्रथा पर पूर्णतः रोक लग गई ✅

-डॉ. मोहनलाल गुप्ता

ब्रिटिश काल में नारी MCQ : मुख्य अध्ययन सामग्री

ब्रिटिश काल में नारी की स्थिति

आधुनिक काल में नारी MCQ

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आधुनिक काल में नारी

आधुनिक काल में नारी MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए “आधुनिक काल में नारी की स्थिति” विषय पर 70 बहुविकल्पीय प्रश्न। सही विकल्प के अंत में ✅ हरा टिक मार्क है।

1. आधुनिक काल में नारी की सर्वोत्तम स्थिति किस काल की नारी से भी कम मानी गई है?
a) वैदिक काल की नारी से ✅
b) मध्यकालीन नारी से
c) ब्रिटिश काल की नारी से
d) महाकाव्य काल की नारी से

2. भारतीय इतिहास में आधुनिक काल की शुरुआत किस घटना से मानी जाती है?
a) मौर्य शासन की स्थापना से
b) गुप्त साम्राज्य की स्थापना से
c) मुगल शासन की समाप्ति एवं ईस्ट इंडिया कम्पनी के शासनारम्भ से ✅
d) भारत की स्वतंत्रता से

3. अंग्रेजों द्वारा सीधे शासित भाग को क्या कहा गया?
a) रियासती भारत
b) देसी भारत
c) स्वशासी भारत
d) ब्रिटिश भारत ✅

4. छोटे-छोटे राज्यों वाला हिस्सा, जहाँ राजा और नवाब शासन करते थे, क्या कहलाता था?
a) ब्रिटिश भारत
b) रियासती भारत ✅
c) संघीय भारत
d) संसदीय भारत

5. अंग्रेजों ने रियासती भारत पर प्रभाव बनाए रखने के लिए किस माध्यम का प्रयोग किया?
a) धार्मिक सुधारों से
b) शिक्षा प्रसार से
c) अधीनस्थ संधियों और पॉलिटिकल एजेंटों से ✅
d) व्यापारिक प्रतिबंधों से

6. अंग्रेज़ी शासनकाल में भारतीय समाज में नारी जीवन कैसा था?
a) अत्यंत सुखी
b) अत्यंत समृद्ध
c) अत्यंत कठिन ✅
d) अत्यंत स्वतंत्र

7. अंग्रेज काल में समाज में कौन‑सी विवाह संबंधी कुरीति प्रचलित थी?
a) सहमति विवाह
b) प्रेम-विवाह
c) बाल-विवाह
d) बहु-विवाह ✅

8. अंग्रेजी शासनकाल में स्त्रियों के लिए कौन‑सा निषेध प्रचलित था?
a) शिक्षा ग्रहण निषिद्ध
b) पुनर्विवाह निषिद्ध ✅
c) पर्दा निषिद्ध
d) सम्पत्ति अधिकार निषिद्ध

9. अंग्रेजों ने भारतीय समाज की किन कुप्रथाओं को रोकने के लिए कानून बनाए?
a) केवल दहेज प्रथा
b) केवल सती-प्रथा
c) केवल बाल-विवाह
d) सती, बाल-विवाह, पर्दा, कन्या-वध आदि अनेक कुप्रथाएँ ✅

10. भारतीय समाज में सती-प्रथा के प्रारम्भिक रूप में स्त्रियाँ कैसे सती होती थीं?
a) बलपूर्वक
b) स्वेच्छा से धार्मिक भावना से प्रेरित होकर ✅
c) आर्थिक दबाव से
d) राजाज्ञा से

11. सती हो चुकी स्त्री को समाज में क्या दर्जा दिया जाता था?
a) पापी
b) साधारण स्त्री
c) देवी ✅
d) दासी

12. प्राचीन काल में सती होना कैसा था?
a) अनिवार्य
b) राजकीय आदेश
c) वैकल्पिक, अनिवार्य नहीं ✅
d) अपराध

13. राजा दशरथ की मृत्यु पर सती होने के विषय में कौन‑सा कथन सही है?
a) सभी रानियाँ सती हुईं
b) आधी रानियाँ सती हुईं
c) केवल कौशल्या सती हुईं
d) कोई भी रानी सती नहीं हुई ✅

14. राजा पाण्डु की मृत्यु के समय कौन सती हुई?
a) कुंती
b) माद्री ✅
c) द्रौपदी
d) सुभद्रा

15. मध्यकाल में विधवा के विषय में क्या धारणा बन गई?
a) वे अधिक विदुषी होंगी
b) वे राजकीय सेविका बनेंगी
c) वे सच्चरित्र नहीं रह पाएंगी ✅
d) वे साध्वी बनेंगी

16. विधवा को सती कराने का मुख्य सामाजिक तर्क क्या था?
a) दहेज बढ़ाने के लिए
b) कुल की मर्यादा बचाने के लिए ✅
c) राजा को प्रसन्न करने के लिए
d) भूमि प्राप्त करने के लिए

17. सती होने की इच्छुक न होने वाली स्त्री के साथ क्या किया जाता था?
a) उसे छोड़ दिया जाता था
b) उसे निर्वासित किया जाता था
c) उसे चिता से बाँधकर सती कराया जाता था ✅
d) उसे मंदिर भेज दिया जाता था

18. सती होने से बचने को प्रयासरत स्त्री को चिता पर वापस धकेलने के लिए क्या किया जाता था?
a) रस्सी से खींचा जाता था
b) पत्थर मारे जाते थे
c) बांस से पीटते हुए धकेला जाता था ✅
d) पानी डाला जाता था

19. सती के समय स्त्री का क्रन्दन दबाने के लिए क्या किया जाता था?
a) शंख बजाए जाते थे
b) घंटे बजाए जाते थे
c) मौन रखा जाता था
d) जोर-जोर से ढोल बजाए जाते थे ✅

20. 18वीं–19वीं सदी में सती-प्रथा किन क्षेत्रों में विशेष रूप से प्रचलित थी?
a) बिहार, उड़ीसा
b) बंगाल, राजस्थान, पंजाब ✅
c) गुजरात, कर्नाटक
d) असम, केरल

21. प्राचीन काल से किसके जन्म को शुभ नहीं माना जाता था?
a) पुत्र
b) गुरु
c) राजन्य
d) कन्या ✅

22. पातंजलि के अनुसार पुत्र और पुत्री के बारे में क्या भावना दिखाई देती है?
a) पुत्र और पुत्री दोनों समान हैं
b) पुत्र संकट है
c) पुत्र प्रकाश है, पुत्री संकट का स्रोत है ✅
d) पुत्री प्रकाश है, पुत्र संकट है

23. किस समाज में कन्या के पैदा होने को विशेष रूप से अच्छा नहीं माना जाता था?
a) ब्राह्मण समाज
b) वैश्य समाज
c) राजपूत परिवार ✅
d) शूद्र समाज

24. कन्या-विवाह के समय किस पक्ष को दहेज देना पड़ता था?
a) वर-पक्ष को
b) वधू-पक्ष को ✅
c) दोनों पक्षों को
d) किसी को नहीं

25. राजपूत परम्परा में विवाह अवसर पर चारण, ढोली एवं भाट क्या माँगते थे?
a) खेती की भूमि
b) हाथी-घोड़े
c) त्याग और नेग के रूप में राशि ✅
d) ग्रामदान

26. त्याग और नेग न देने पर कन्या के पिता के साथ क्या होता था?
a) उन्हें पुरस्कृत किया जाता था
b) सामाजिक सम्मान बढ़ता था
c) समाज में नीचा देखना पड़ता था ✅
d) राजकीय संरक्षण मिलता था

27. अप्रिय परिस्थितियों से बचने के लिए अधिकांश कन्याओं के साथ क्या किया जाता था?
a) विदेश भेज दिया जाता था
b) मंदिर में चढ़ा दिया जाता था
c) जन्मते ही मार दिया जाता था ✅
d) दासी बना दिया जाता था

28. नवजात कन्याओं को मारने के लिए कौन‑सा तरीका प्रयुक्त नहीं था?
a) अफीम देना
b) गला दबाना
c) माता के स्तन पर विष लगाना
d) उन्हें स्कूल भेजना ✅

29. 18वीं सदी के अन्त तक कन्या-वध पर क्या प्रभाव दिखने लगा?
a) यह और बढ़ गया
b) इस पर स्वैच्छिक रोक लगनी आरम्भ हुई ✅
c) इसे क़ानून से अनिवार्य किया गया
d) इसे राजाश्रय मिला

30. डाकन-प्रथा में किन्हें डाकन या चुड़ैल माना जाता था?
a) केवल पुरुषों को
b) कुछ स्त्रियों को ✅
c) केवल बच्चों को
d) केवल साधुओं को

31. डाकन के बारे में कौन‑सा अन्धविश्वास प्रचलित था?
a) वे खेतों को सींचती हैं
b) वे गाँव बसाती हैं
c) वे बच्चों और रूपवती नववधुओं को खाती हैं ✅
d) वे देवताओं की पूजा करवाती हैं

32. श्मशान में गाड़े गए बच्चों के संदर्भ में डाकन के बारे में क्या माना जाता था?
a) वे उनकी रक्षा करती हैं
b) वे उनका कलेजा निकालकर खाती हैं ✅
c) वे उन पर फूल चढ़ाती हैं
d) वे उन्हें जी उठा देती हैं

33. डाकन घोषित स्त्री को मारने का उद्देश्य क्या बताया जाता था?
a) राज्य विस्तार
b) कर संग्रह
c) ताकि वह किसी को कष्ट न पहुँचा सके ✅
d) धार्मिक अनुष्ठान

34. 17वीं–19वीं शताब्दी में डाकन‑विश्वास की स्थिति कैसी थी?
a) बिलकुल नहीं था
b) बहुत कमज़ोर था
c) अत्यधिक दृढ़ था ✅
d) केवल शहरों तक सीमित था

35. किन जातियों में डाकन-प्रथा का अन्धविश्वास अधिक था?
a) ब्राह्मण, कायस्थ
b) बनिया, जाट
c) भील, मीणा तथा कुछ अन्य आदिवासी जातियाँ ✅
d) मराठा, राजपूत

36. कई बार डाकन घोषित स्त्री को जलाने में किसकी सहमति भी शामिल होती थी?
a) केवल राजा की
b) केवल पुजारी की
c) उसके परिवार और पति की ✅
d) विदेशी अधिकारियों की

37. वैदिक काल में कन्या-विवाह की आयु के बारे में क्या प्रथा थी?
a) बहुत कम आयु में
b) जन्म के साथ ही
c) विवाह योग्य होने पर ✅
d) केवल बुजुर्गों के निर्णय से

38. सूत्रकाल एवं पूर्वमध्यकाल तक आते-आते विवाह आयु के साथ क्या हुआ?
a) आयु बढ़ गई
b) कोई परिवर्तन नहीं हुआ
c) आयु घटने लगी, बाल-विवाह बढ़ा ✅
d) केवल विधवाओं से विवाह होने लगे

39. मुसलमानों के बार‑बार आक्रमणों के कारण किस कुरीति को अच्छा समझा गया?
a) सती-प्रथा
b) पर्दा-प्रथा
c) बाल-विवाह ✅
d) दास-प्रथा

40. बाल-विवाह से लड़कियों के किस विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा?
a) केवल धार्मिक विकास
b) केवल आर्थिक विकास
c) शारीरिक, मानसिक, शैक्षिक और व्यक्तित्व विकास ✅
d) केवल राजनीतिक विकास

41. बाल-विवाह से कौन‑सी प्रमुख समस्या उत्पन्न हुई?
a) बाल-संन्यासियों की समस्या
b) बाल-योद्धाओं की समस्या
c) बाल-विधवाओं की समस्या ✅
d) बाल-श्रमिकों की समस्या

42. अक्षय तृतीया के दिन प्रचलित विवाह प्रथा क्या थी?
a) केवल विधवा-विवाह
b) केवल प्रेम-विवाह
c) घर की कई कन्याओं का एक साथ विवाह ✅
d) केवल अंतर्जातीय विवाह

43. बाल-विवाह के कारण लड़कियाँ कब माँ बनती थीं?
a) वृद्धावस्था में
b) पढ़ाई पूरी होने के बाद
c) साध्वी बनने के बाद
d) छोटी आयु में ✅

44. आधुनिक समय में बाल-विवाह की कुप्रथा पर कैसे रोक लगाई गई?
a) केवल उपदेशों से
b) केवल धार्मिक सुधारों से
c) केवल दान से
d) कानून के बल पर ✅

45. पर्दा-प्रथा वैदिक संस्कृति में कैसी थी?
a) अत्यंत कठोर
b) सीमित
c) बिल्कुल नहीं थी ✅
d) राजघरानों तक सीमित

46. मुस्लिम आक्रमणों से पूर्व हिन्दू स्त्रियाँ कैसी थीं?
a) पूर्णतः घर में कैद
b) बिना परदे के स्वतंत्रता से आ-जा सकती थीं ✅
c) केवल रात में निकलती थीं
d) केवल मंदिर तक सीमित थीं

47. मुस्लिम आक्रमणों के समय सुन्दर हिन्दू कन्याओं के साथ क्या होता था?
a) उन्हें गुरु बनाया जाता था
b) उन्हें पढ़ने भेजा जाता था
c) उनका सम्मान बढ़ाया जाता था
d) उनका अपहरण कर बलात् निकाह किया जाता था ✅

48. हिन्दू समाज ने स्त्रियों की रक्षा के लिए किन उपायों का सहारा लिया?
a) संन्यास और यज्ञ
b) विदेश पलायन
c) बाल-विवाह और पर्दा-प्रथा ✅
d) व्यापार-वृद्धि

49. पर्दा-प्रथा का स्त्रियों की शिक्षा पर क्या प्रभाव पड़ा?
a) शिक्षा बढ़ी
b) शिक्षा पर कोई प्रभाव नहीं
c) केवल धार्मिक शिक्षा रही
d) उनका घर से निकलना और शिक्षा ग्रहण करना बंद हो गया ✅

50. मुसलमानों में स्त्रियों के लिए कौन‑सा वेश अनिवार्य था?
a) धोती-कुर्ता
b) पगड़ी
c) साड़ी
d) बुर्का एवं हिजाब ✅

51. 19वीं सदी के उत्तरार्द्ध में पर्दा-प्रथा के विरुद्ध किसने आवाज उठाई?
a) केवल अंग्रेज अधिकारी
b) केवल राजा-महाराजा
c) समाज-सुधारकों ने ✅
d) केवल साधु-संत

52. दासी-प्रथा में लड़कियों के साथ क्या किया जाता था?
a) उन्हें केवल मंदिरों में रखा जाता था
b) उन्हें पढ़ाया-लिखाया जाता था
c) उनकी खरीद-फरोख्त होती थी ✅
d) उन्हें सैनिक बनाया जाता था

53. राजपूत विवाह परम्परा में दहेज के साथ क्या दिया जाता था?
a) सैनिक दस्ता
b) उपाधि
c) दासियाँ ✅
d) ग्रामदान

54. दहेज में गई दासी की सामान्य स्थिति क्या होती थी?
a) समान अधिकार प्राप्त
b) घर की मुखिया
c) केवल पुजारी
d) घर के पुरुषों की भोग्या बनकर रहना ✅

55. 19वीं सदी के मध्य तक भारतीय नारी की स्थिति कैसी थी?
a) बहुत अच्छी
b) अत्यंत खराब ✅
c) पूर्णतः सुरक्षित
d) अत्यंत स्वतंत्र

56. 19वीं सदी के उत्तरार्द्ध में नारी की स्थिति सुधारने के लिए क्या किया गया?
a) केवल धार्मिक ग्रन्थ बदले गए
b) केवल शिक्षा बंद की गई
c) अनेक समाज सुधारकों के प्रयास से कानून बनाए गए ✅
d) राजतन्त्र को समाप्त किया गया

57. पश्चिमी समाज की कौन‑सी विशेषता बताई गई है?
a) केवल पुरुषवादी
b) केवल सामूहिकतावादी
c) व्यक्तिवादी समाज ✅
d) पूर्णत: राजशाही

58. पश्चिमी समाज में विवाह एवं संतानोत्पत्ति से सम्बन्धित निर्णय कौन लेती है?
a) केवल पिता
b) केवल पुरोहित
c) केवल न्यायालय
d) स्वयं स्त्री ✅

59. अंग्रेज़ी शिक्षा के प्रसार से भारतीयों में क्या विकसित हुआ?
a) केवल अन्धविश्वास
b) केवल सामन्तवाद
c) आधुनिक सोच एवं व्यक्तिवादी जीवन शैली ✅
d) केवल सैन्य शक्ति

60. ईसाई मिशनरियों ने भारतीय स्त्रियों को किसके लिए प्रेरित किया?
a) अधिक पर्दा करने के लिए
b) केवल गृहकार्य के लिए
c) पर्दा त्यागकर शिक्षा प्राप्त करने के लिए ✅
d) विदेश पलायन के लिए

61. ईसाई पादरियों ने किन कुप्रथाओं की कड़ी निन्दा की?
a) केवल दहेज प्रथा
b) केवल पर्दा-प्रथा
c) केवल बहु-विवाह
d) सती-प्रथा एवं बाल-विवाह ✅

62. राजाराममोहन राय ने किस संस्था के माध्यम से नारी सुधार कार्यक्रम चलाया?
a) आर्य समाज
b) प्रार्थना समाज
c) देव समाज
d) ब्रह्मसमाज ✅

63. किस गवर्नर-जनरल ने 1829 ई. में सती-प्रथा को असंवैधानिक घोषित किया?
a) डलहौजी
b) वेलेजली
c) विलियम बैटिक ✅
d) कर्नवालिस

64. ईश्वरचन्द्र विद्यासागर के प्रयास से 1856 में कौन‑सा महत्वपूर्ण कानून बना?
a) दहेज-निषेध अधिनियम
b) बाल-विवाह निषेध अधिनियम
c) हिन्दू कोड बिल
d) विधवा-पुनर्विवाह अधिनियम ✅

65. बैथ्यून गर्ल्स कॉलेज की नींव किसके प्रयत्नों से पड़ी?
a) ज्योतिराव फूले
b) सावित्रीबाई फूले
c) राजाराममोहन राय
d) ईश्वरचन्द्र विद्यासागर ✅

66. आर्य समाज के संस्थापक कौन थे?
a) राजाराममोहन राय
b) ज्योतिराव फूले
c) स्वामी दयानन्द सरस्वती ✅
d) महादेव रानाडे

67. स्वामी दयानन्द ने कन्याओं के लिए विवाह की उपयुक्त आयु क्या मानी?
a) 10–12 वर्ष
b) 12–16 वर्ष
c) 14–18 वर्ष
d) 16–24 वर्ष ✅

68. महाराष्ट्र में स्त्री-शिक्षा का प्रथम बिगुल किसने फूंका?
a) टिलक
b) महादेव रानाडे
c) ज्योतिराव (ज्योतिबा) फूले ✅
d) गोखले

69. ज्योतिराव फूले ने 1873 में किस संस्था की स्थापना की?
a) ब्रह्मसमाज
b) प्रार्थना समाज
c) सत्य शोधक समाज ✅
d) देव समाज

70. आधुनिक काल में शिक्षित कार्यरत नारी की सबसे बड़ी समस्या किस रूप में दिखाई गई है?
a) केवल आर्थिक समस्या
b) केवल धार्मिक बाधा
c) गृहस्थी और नौकरी की दोहरी चक्की में पिसना ✅
d) केवल राजनीतिक प्रतिबन्ध

-डॉ. मोहनलाल गुप्ता

आधुनिक काल में नारी MCQ : मुख्य अध्ययन सामग्री

आधुनिक काल में नारी की स्थिति

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