Saturday, February 24, 2024
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11. महान् रोमन साम्राज्य के शासक

16 मार्च 37 को ऑगस्टस सीजर के प्रपौत्र कैलिगुला ने तत्कालीन रोमन सम्राट टाइबेरियस की हत्या कर दी। उस समय टाइबेरियस की आयु 77 वर्ष थी। उसके बाद कैलिगुला इम्प्रेटर हुआ। वह केवल पौने चार साल ही शासन कर सका। 24 जनवरी 41 को मात्र 28 वर्ष की आयु में सीनेट के सदस्यों एवं उसके अंगरक्षकों द्वारा सम्राट कैलिगुला की हत्या कर दी गई।

इंग्लैण्ड पर रोमन सेनाओं का अधिकार

अब सीजर परिवार का एक मात्र जीवित वारिस कैलिगुला का चाचा क्लाउडियस (प्रथम) अर्थात् ऑगस्टस सीजर का पौत्र रोम का शासक बना। अब तक यूरोप के जर्मनी, गॉल (फ्रांस) तथा इटली आदि देश महान् रोमन साम्राज्य के अधीन रहते आए थे किंतु क्लाउडियस ने ई.43 में ब्रिटेन पर विजय प्राप्त करके उसे भी रोमन उपनिवेश बना दिया। वह लगभग 14 साल तक रोम पर शासन करता रहा।

राजकुमारी ऐग्रिप्पिना

ऑगस्टस सीजर की प्रपौत्री ऐग्रिप्पिना अत्यंत महत्त्वाकांक्षिणी राजकुमारी थी। उसका विवाह किसी रोमन सामंत से हुआ था जिससे उसे ‘नीरो‘ नामक एक पुत्र हुआ। ऐग्रिप्पिना ने नीरो को रोम का एम्परर बनाने के लिए अपने पति को छोड़ दिया तथा रोम के सम्राट क्लाउडियस (प्रथम) से विवाह कर लिया जो कि राजकुमारी ऐग्रिप्पिना का मामा भी था। ऐग्रिप्पिना ने सम्राट को इस बात के लिए सहमत कर लिया कि क्लाउडियस के बाद नीरो ही रोम का सम्राट होगा।

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क्लाउडियस ने नीरो को अपना दत्तक पुत्र मान लिया तथा उसे अपना उत्तराधिकारी घोषित कर दिया। ई.54 में ऐग्रिप्पिना ने 64 वर्षीय सम्राट क्लाउडिअस को जहर दिलवाकर उसकी हत्या कर दी और अपने पुत्र नीरो को रोम का सम्राट बना दिया।

नीरो

रोमनवसियों ने नीरो का स्वागत और समर्थन किया क्योंकि वह पितृ-परम्परा और मातृ-परम्परा दोनों से सम्राट् आगस्टस का वंशज था। अपने शासन काल के आरम्भ में नीरो ने अपने गुरु ‘सेनेका’ के मार्गदर्शन में राज्य का शासन किया किंतु शीघ्र ही नीरो में दुर्गुण प्रकट होने लगे। ई.55 में उसने अपने प्रतिद्वंद्वी ‘ब्रिटेनिकस’ को जहर देकर मरवा डाला जो स्वर्गीय सम्राट क्लाडिअस का अपना पुत्र होने के कारण राज्य का वास्तविक अधिकारी होने का दावा कर रहा था। चार वर्ष बाद नीरो ने अपनी माता ‘ऐग्रिप्पिना’ की भी हत्या करा दी। फिर उसने अपनी पत्नी ‘आक्टेविया’ को भी मरवा डाला और एक दिन अपनी दूसरी स्त्री ‘पापीया’ को भी क्रोध में आकर मार डाला।

उसने एक तीसरी स्त्री से विवाह करना चाहा परन्तु उस स्त्री ने मना कर दिया। इस पर नीरो ने उसे भी मौत के घाट उतार दिया गया। इसके बाद नीरो ने एक और स्त्री के पति को मरवा डाला ताकि वह उसे अपनी पत्नी बना सके। एक षड़यंत्र का सुराग पाकर उसने अपने गुरु सेनेका को आत्महत्या करने का आदेश दिया।

सम्राट नीरो ने इन लोगों के अतिरिक्त और भी कई प्रसिद्ध स्त्री-पुरुषों को मृत्युदंड दिया। सम्राट के इन दुर्गुणों के कारण राज्य में उसके प्रति असंतोष बढ़ने लगा। फिर भी वह एक शक्तिशाली राजा था जिसका जनता कुछ भी नहीं कर सकती थी। नीरो ने ई.58-63 के बीच पार्थियनों (फारसी साम्राज्य) के साथ शांति समझौता कर लिया। यह उसकी सबसे बड़ी उपलब्धि थी।

सेंट पीटर का रोम में प्रवेश

यीशू के 12 शिष्यों में से एक ‘सेंट पीटर’ ईसा की मृत्यु के बाद रोम आए। सेंट पीटर ही रोम के चर्च के पहले बिशप हुए। इस कारण दुनिया भर के ईसाइयों की दृष्टि में रोम एक पवित्र शहर हो गया तथा रोम के चर्च के बिशप, दुनिया भर के चर्चों के बिशपों में विशेष महत्त्व के माने जाने लगे। उस समय रोम में नीरो का शासन था। नीरो ने ई.64 अथवा ई.68 में सेंट पीटर को फांसी पर चढ़ा दिया क्योंकि सेंट पीटर प्राचीन रोमन धर्म के स्थान पर ईसाई धर्म के प्रचार का प्रयास कर रहे थे।

सेंट पीटर का शरीर रोम नगर के मध्य में वेटिकन सिटी के चर्च में दफनाया गया जिसे अब ‘सेंट पीटर बेसिलिका’ तथा ‘पापल बेसिलिका ऑफ सेंट पीटर इन वेटिकन सिटी’ कहा जाता है। वेटिकन सिटी अब एक स्वतंत्र देश के रूप में स्थित है।

यद्यपि सेंट पीटर प्रभु यीशू के प्रिय शिष्यों में से एक थे तथापि उस काल में रोम के लोगों पर सेंट पीटर अथवा उनके चर्च का विशेष प्रभाव नहीं पड़ सका क्योंकि रोम के शासक ईसाई धर्म के विरुद्ध थे और प्राचीन रोमन धर्म में आस्था रखते थे। यही कारण है कि अगले लगभग ढाई सौ साल तक रोमवासी अपने प्राचीन रोमन धर्म को मानते रहे।

रोम में आग और नीरो का वायलिन-वादन

मान्यता है कि नीरो बहुत विचित्र स्वभाव का राजा था। ई.64 में रोम नगर में अत्यंत रहस्यमय ढंग से आग की लपटें भड़क उठीं जिनसे आधे से अधिक नगर जलकर राख हो गया। कहा जाता है कि जब रोम धू-धू करके जल रहा था, तब नीरो एक स्थान पर खड़ा होकर वायलिन बजा रहा था। आग बुझ जाने के बाद नीरो ने नगर के पुनर्निर्माण का कार्य आरंभ किया और अपने लिए ‘स्वर्ण मंदिर’ नामक भव्य प्रासाद बनवाया। मंदिर निर्माण के लिए धन प्राप्त करने हेतु जनता पर कर-भार बढ़ा दिया गया। इससे जनता में भी अपने राजा के विरुद्ध असंतोष फैल गया।

राज्य में चारों ओर फैले असंतोष का लाभ उठाने के लिए स्पेन के रोमन गवर्नर ने अपनी फौजों के साथ रोम पर हमला बोल दिया। नीरो की अंगरक्षक सेना भी विद्रोही गवर्नर के साथ मिल गई। इस कारण नीरो को राज्य से पलायन करना पड़ा। इसी बीच सिनेट ने उसे फाँसी पर चढ़ा देने का निर्णय किया। गिरफ्तारी के अपमान से बचने के लिए 9 जून 68 को केवल 30 वर्ष की आयु में नीरो ने आत्महत्या कर ली।

जूलियस सीजर के वंश का अंत

नीरो के बाद ‘गायस’ नामक एक युवक ‘जूलियस सीजर ऑक्टावियानस’ के नाम से रोम की राजगद्दी पर बैठा किंतु कुछ दिन बाद ही उसे हटा दिया गया। इसके साथ ही रोम से जूलियस सीजर के वंश का शासन समाप्त हो गया। इसके बाद रोम में अराजकता छा गई और गृहयुद्ध छिड़ गया।

फ्लेवियन वंश

ई.68 में रोम में फ्लेवियन वंश की स्थापना हुई किंतु यह वंश केवल ई.96 तक ही शासन कर सका। 8 जून 68 को 71 वर्षीय गल्बा रोमन सम्राट हुआ किंतु केवल 7 माह बाद 15 जनवरी 69 को उसके अंगरक्षकों द्वारा उसकी हत्या कर दी गई। हत्यारों का नेतृत्व ओथो नामक एक सैन्य अधिकारी ने किया। वही रोम का अगला राजा हुआ। वह केवल 91 दिन ही शासन कर सका।

विटिलियस नामक एक योद्धा ने विद्रोह कर दिया। दोनों पक्षों में हुई लड़ाई में ओथो हार गया और उसने 16 अप्रेल 69 को 36 वर्ष की आयु में आत्मघात कर लिया। विटिलयस अगला राजा हुआ किंतु वह केवल 8 महीने ही शासन कर सका। उसे वेस्पेसियन की सेना ने मार डाला। वेस्पेसियन ने साढ़े नौ साल रोम पर शासन किया। उसने जनता पर करों को कम करके राज्य में नगारिक असंतोष को शांत किया तथा सेना में अनुशासन स्थापित किया।

उसके समय में रोम में विशाल कोलोजियम का निर्माण हुआ। उसके समय में रोम का कोई व्यक्ति किसी का कर्जदार नहीं था। उसने स्पेन के शासन में भी सुधार किए। उसने अपने पुत्र टाइटस को सह-सम्राट बनाया। 24 जून 79 को 69 वर्ष की आयु में वेस्पेसियन की मृत्यु हो गई तथा टाइटस रोम का शासक हुआ।

उसके समय में रोमन साम्राज्य में बड़ा ज्वालामुखी फटा। सम्राट टाइटस ने इस विपत्ति में प्रजा की बड़ी सहायता की जिससे वह प्रजा में बहुत लोकप्रिय हो गया। 13 सितम्बर 81 को मात्र 41 वर्ष की आयु में उसकी मृत्यु हो गई तथा वैस्पेसियन का दूसरा पुत्र डोमिशियन अगला राजा हुआ। वह 15 साल तक शासन करता रहा। 12 सितम्बर 96 को मात्र 44 वर्ष की आयु में उसके दरबारियों ने उसकी हत्या कर दी। उसके साथ ही फ्लैवियन राजवंश की समाप्ति हो गई। 

नेरवा-एण्टोने राजवंश

ई.96 में नेरवा-एण्टोने राजवंश की स्थापना हुई। इस वंश ने ई.192 तक शासन किया किंतु ई.96-180 के काल को पाँच अच्छे सम्राटों का काल कहा जाता है जिन्होंने साम्राज्य में शांतिपूर्ण ढंग से शासन किया। पूर्व में स्थित पार्थियन साम्राज्य से भी उनके सम्बन्ध शांति-पूर्ण बने रहे।

हालांकि फारसियों  (ईरानियों) से अर्मेनिया तथा मेसोपोटामिया (इराक) में इन रोमन सम्राटों के युद्ध हुए पर उनकी विजयों और शांति समझौतों से साम्राज्य का विस्तार बना रहा। इसे नेरवा-एण्टोने राजवंश कहा जाता है। इस वंश का पहला शासक नेरवा था जिसे सीनेट द्वारा सम्राट नियुक्त किया गया। केवल सवा साल के बाद 67 वर्ष की आयु में उसकी मृत्यु हो गई।

महान् रोमन साम्राज्य का चरम

नेरवा के दत्तक पुत्र ट्राजन को महान् विजेता माना जाता है। उसके समय रोमन सेनाओं ने डेसिया, अरब, मेसोपोटामिया और अर्मेनिया पर विजय प्राप्त की तथा उसके काल में महान् रोमन साम्राज्य अपने चरम विस्तार को प्राप्त कर गया। उसे सीनेट ने सर्वश्रेष्ठ एम्परर का सम्मान दिया। वह लगभग 20 साल तक रोम पर शासन करता रहा। 7 अगस्त 117 को 63 वर्ष की आयु में उसकी मृत्यु हुई।

ट्राजन के उत्तराधिकारी हैड्रियन के काल में रोम में वास्तुकला अपने चरम पर पहुँच गई। उसके समय में रोम में विशाल भवनों का निर्माण हुआ तथा भवनों के नए डिजाइन विकसित हुए।

ईसाई धर्म को रोकने के प्रयास

हैड्रियन के बाद एण्टोनियस पायस तथा उसके बाद ल्यूसियस वेरस सम्राट हुए। ल्यूसियस ने मार्कस ऑरलियस को सह-सम्राट बनाया। मार्च 169 में 39 वर्ष की आयु में प्लेग हो जाने से ल्यूसियस की मृत्यु हो गई। उसके उत्तराधिकारी मार्कस ऑरलियस को रोम के महान् विचारक राजा के रूप में ख्याति प्राप्त हुई।

उसने राज्य में बढ़ रहे ईसाई धर्म को रोकने के बड़े प्रयास किए तथा ईसाई प्रचारकों को कठोर दण्ड दिए। वह 19 साल तक शासन करता रहा तथा 58 वर्ष की आयु में उसकी मृत्यु हुई। उसने अपने पुत्र कॉमोडोस को सह-शासक बनाया।

नेरवा-एण्टोने राजवंश की समाप्ति

ई.180 में कॉमोडोस रोम का शासक बना। वह अपने पिता के काल में तीन साल सह-शासक तथा उसके बाद 12 साल तक एकल शासक के रूप में शासन करता रहा। उसका शासन पहले तो शांतिपूर्ण रहा परन्तु बाद में उसके विरुद्ध विद्रोह होने लगे और उसकी हत्या के प्रयत्न हुए। इस कारण उसने भी कुछ विद्रोहियों पर अत्याचार किए।

इससे राज्य में गृहयुद्ध छिड़ गया। 31 दिसम्बर 192 को उसके अंगरक्षकों ने उसे महल में ही घेर लिया तथा स्नानागार में गला घोंट कर मार डाला। उसके साथ ही नेरवा-एण्टोने राजवंश की समाप्ति हो गई।

उसके बाद 1 जनवरी 193 को प्रीटोरियन गार्ड द्वारा परटीनैक्स को राजा बनाया गया। उसे 86 दिन के शासन के बाद ही उसके अंगरक्षकों ने मार डाला। अगले राजा डिडियस जूलियानस को केवल 65 दिन ही शासन करने दिया गया तथा सीनेट ने उसे मुकदमा चलाकर मरवा दिया। इस कारण रोमन साम्राज्य में अराजकता उत्पन्न हो गई।

सेवरन वंश

ई.193 से 235 तक रोम में सेवरन वंश का शासन रहा। मात्र 42 वर्ष की अवधि में इस वंश के 6 राजा रोम की गद्दी पर बैठे। 9 अप्रेल 193 को रोमन सेनाओं ने अपने कमाण्डर सेप्टिमियस सेवेरस को रोम का सम्राट घोषित कर दिया। सेप्टिमियस सेवेरस का जन्म उत्तरी अफ्रीका में हुआ था तथा उसने अपना जीवन एक सैनिक के रूप में आरम्भ किया था। शीघ्र ही वह एक सैनिक कमाण्डर बन गया।

जब उसकी सेना ने उसे रोम का सम्राट घोषित कर दिया तो उसने राज्य पर अधिकार करने के लिए राजधानी रोम में प्रवेश किया। एक भी व्यक्ति उसका विरोध करने के लिए नहीं आया। आगे चलकर वह रोमन साम्राज्य का सबसे सफल सम्राट सिद्ध हुआ।

उसने नागरिकों एवं सामंतों के दंगों और षड्यंत्रों को दबा दिया। वह 18 साल तक रोम पर शासन करता रहा। उसने अपने पुत्र कैराकैला को सह-शासक बनाया। 65 वर्ष की आयु में ई.211 में सेप्टिमियस सेवेरस की मृत्यु हुई तथा उसका पुत्र कैराकैला रोम का शासक हुआ। उसने अपने भाई गेटा को सह-शासक बनाया।

केवल 10 माह बाद ही कैराकैला के आदेश से गेटा की हत्या कर दी गई। कैराकैला 6 साल तक ही शासन कर पाया। केवल 29 वर्ष की आयु में एक सैनिक द्वारा उसकी हत्या कर दी गई। उसकी हत्या के लिए राज्य में बड़ा षड़यंत्र रचा गया।

उसकी अंगरक्षक सेना का प्रमुख मैकरीनस इस षड़यंत्र में शामिल था। कैराकैला की हत्या हो जाने के बाद मैकरीनस रोम का शासक हुआ। उसने अपने 10 वर्षीय पुत्र डियाड्युमेनियन को सह-शासक बनाया।

13 माह के संक्षिप्त शासन के बाद ही सीनेट ने बाप-बेटे को मुकदमा चला कर हटा दिया तथा 14 साल के लड़के एल्गाबैलस को सम्राट बनाया।

चौदह वर्षीय एल्गाबैलस सेप्टिमियस सेवेरस के भाई का पोता था। कैराकैला के बाद एल्गाबैलस को ही शासक बनया जाना था किंतु उस समय उसे यह आरोप लगाकर राजगद्दी से वंचित कर दिया गया था कि वह कैराकैला का अवैध पुत्र था। अब एल्गाबैलस को सीरियाई सेनाओं की सहायता प्राप्त हो गई थी अतः उनके बल पर वह रोम का राजा बन गया किंतु पौने चार साल के शासन के बाद उसे भी रोमन अंगरक्षक सेना ने मार डाला।

उस समय उसकी आयु केवल 18 वर्ष थी। इसके बाद सेप्टिमियस सेवेरस के भाई का अन्य पोता सेरेवस एलैक्जेण्डर जो कि एलगाबैलस का चचेरा भाई था, गद्दी पर बैठा। वह 13 साल तक रोम पर शासन करता रहा किंतु उसे भी 18 मार्च 235 को 27 साल की आयु में अंगरक्षक सेना द्वारा मार डाला गया।

सेवेरन वंश के समय रोम के समस्त प्रांतों एवं उपनिवेशों के नागरिकों को रोमन नागरिकता दी गई। यह वंश ई.235 तक महान् रोमन साम्राज्य पर शासन करता रहा। इसके बाद रोम में संकट का काल आया। पूर्व में फारसी साम्राज्य शक्तिशाली होता जा रहा था। साम्राज्य के अन्दर भी गृहयुद्ध की स्थिति उत्पन्न हो गई थी।

गोर्डियन वंश

 ई.235 में रोम में गोर्डियन राजवंश की स्थापना हुई। यह वंश केवल 50 वर्ष तक रोम पर शासन कर सका। इस वंश के पहले शासक मैक्सीमिनस थ्रैक्स को केवल सवा तीन साल के शासन के बाद अंगरक्षक सेना ने मार डाला। इसके बाद गोर्डियन (प्रथम) रोम का राजा हुआ। राजसिंहासन पर बैठने के कुछ दिनों बाद उसे अपने पुत्र गोर्डियन (द्वितीय) की कार्थेज के युद्ध में मृत्यु होने का समाचार मिला। यह सुनकर गोर्डियन (प्रथम) ने आत्मघात कर लिया।

उस दिन उसे राजसिंहासन पर बैठे हुए केवल 21 दिन हुए थे। गोर्डियन के बाद 73 वर्षीय प्यूपीनस रोम का राजा हुआ किंतु 97 दिन बाद ही उसे अंगरक्षक सेना ने मार डाला। उसके बाद बल्बीनस रोम का सम्राट हुआ किंतु उसे केवल 93 दिन बाद ही रोम की अंगरक्षक सेना ने मार डाला।

इसके बाद गोर्डियन (तृतीय) सिंहासन पर बैठा। वह गोर्डियन (प्रथम) का पौत्र तथा गोर्डियन (द्वितीय) का भतीजा था। वह लगभग 6 साल तक राज्य करता रहा किंतु केवल 19 वर्ष की आयु में अंगरक्षकों की सेना के प्रमुख फिलिप अरब (प्रथम) के षड़यंत्र के कारण मार दिया गया।

उसके बाद फिलिप अरब (प्रथम) राजसिंहासन का अधिकारी हुआ। उसने अपने पुत्र फिलिप (द्वितीय) को सहशासक बनाया। फिलिप अरब पाँच साल तक ही शासन कर पाया था कि अपने सामंत डेसियस के विरुद्ध वेरोना के युद्ध में लड़ते हुए मारा गया। उसके पुत्र फिलिप (द्वितीय) को उसके अंगरक्षकों ने मार डाला।

सितम्बर 249 में डेसियस रोम का शासक हुआ। उसने अपने पुत्र हेरेनियस एट्रुस्कस को सह-शासक बनाया। जून 251 में ये दोनों ही ‘गोथ’ नामक जर्मन कबीले की सेना से लड़ते हुए मारे गए। इसके बाद डेसियस के दूसरे पुत्र हॉस्टिलियन को सीनेट ने उसका उत्तराधिकारी मान लिया किंतु वह भी केवल 4-5 माह के शासन के बाद मात्र 21 वर्ष की आयु में मृत्यु को प्राप्त हुआ।

उसके बाद मोएसिया का गवर्नर ट्रेबोनियानस गैलुस ई.251 में गद्दी पर बैठा। उसने अपने पुत्र वोल्यूसियानस को सह-शासक घोषित किया किंतु 2 साल बाद ही सम्राट ट्रेबोनियानस को उसके अपने सैनिकों ने मार डाला तथा एमीलियन शासक हुआ। उसने गोथों पर भारी विजय प्राप्त की थी किंतु वह भी 2 माह बाद उसके अपने सैनिकों द्वारा मार डाला गया।

अब नॉरीकम एवं रेटिया का गवर्नर वेलेरियन रोम का राजा हुआ। उसे सात साल शासन करने के बाद 65 वर्ष की आयु में पर्सियन सेना द्वारा ऐडेसा के युद्ध में बंदी बना लिया गया, बंदी अवस्था में ही उसकी मृत्यु हुई। उसके बाद वेलेरियन का पुत्र गैलीनस रोम का सम्राट हुआ।

उसने अपने पुत्र सैलोनस को सह-शासक बनाया। गैलीनस को 15 साल के शासन के बाद ई.268 में 50 वर्ष की आयु में एक्वीलिया में अपने ही सेनापतियों द्वारा मार डाला गया। गैलीनस के दूसरे पुत्र क्लॉडियस गॉथिकस ने सिंहासन पर अधिकार कर लिया।

वह लगभग डेढ़ साल शासन करने के बाद प्लेग से मर गया। उसकी मृत्यु के बाद उसके भाई क्विण्टिलस ने गद्दी पर अधिकार कर लिया। कुछ ही दिन बाद या तो उसकी हत्या कर दी गई या उसे आत्मघात करना पड़ा।

ई.270 में ऑरेलियन शासक हुआ, उसने रोमन साम्राज्य की एकता को पुनः स्थापित किया किंतु पाँच साल के शासन के बाद सितम्बर 275 में उसकी भी उसके अंगरक्षकों ने हत्या कर दी। इसके बाद ऑरेलियन की रानी यूल्पिया सेवेरेना ने रोम का शासन संभाला किंतु कुछ ही दिन बाद 25 सितम्बर 275 को उसे सीनेट ने हटा दिया और 76 वर्षीय टैक्टियस को रोम का सम्राट बनाया किंतु जून 276 में उसकी भी हत्या हो गई।

इस पर पश्चिम में नियुक्त रोम की सेनाओं ने टैक्टियस के भाई फ्लोरियानस को रोम का सम्राट बना दिया किंतु तीन माह के भीतर सितम्बर 276 में वह भी रोमन सेनाओं द्वारा मार डाला गया। अब सेना पूर्वी प्रांत के गवर्नर प्रोबस को सम्राट बनाना चाहती थी।

प्रोबस केवल 6 साल तक शासन कर सका और अक्टूबर 282 में उसकी भी उसके अंगरक्षकों ने हत्या कर दी तथा कारुस रोम का सम्राट हुआ। केवल 10-11 माह के शासन के बाद ही बिजली गिर जाने से उसकी मृत्यु हो गई। उसका पुत्र कैरीनस राजा हुआ किंतु दो वर्ष बाद ही ई.284 में वह डियोक्लेटियन से युद्ध करता हुआ मारा गया। इसके बाद कारुस का पुत्र नुमेरियन राजा हुआ किंतु नवम्बर 284 में उसकी भी हत्या कर दी गई। इसके साथ ही गोर्डियन वंश की समाप्ति हो गई।

Dr. Mohanlal Gupta
Dr. Mohanlal Gupta
Dr. Mohan Lal Gupta is a renowned historian from India. He has written more than 100 books on various subjects.

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