Wednesday, July 28, 2021

33. श्रीराम ने दिव्य शस्त्रों की प्राप्ति के लिए महर्षि अगस्त्य से भेंट की!

श्रीराम, लक्ष्मण तथा जनकनंदिनी सीताजी सुतीक्ष्ण ऋषि के साथ दण्डकारण्य से अगस्त्य ऋषि के आश्रम के लिए रवाना हो गए। श्रीराम एवं अगस्त्य की भेंट का श्रीराम कथा में अत्यंत महत्व है, यदि श्रीराम को मानव माना जाए तो भी और श्री हरि विष्णु का अवतार माना जाए तो भी! इस भेंट के महत्व की चर्चा करने से पहले हम अगस्त्य ऋषि की पृष्ठभूमि की चर्चा करते हैं।

महर्षि अगस्त्य एक ऋग्वैदिक ऋषि थे। उन्हें सप्तर्षियों में से एक माना जाता है। ऋग्वेद में उनका नाम कई बार आया है। महर्षि अगस्त्य ऋग्वेद के प्रथम मंडल के 165वें सूक्त से लेकर 191वें तक के सूक्तों के दृष्टा थे। अगस्त्य के पुत्र दृढ़च्युत तथा दृढ़च्युत के पुत्र इध्मवाह भी नवम मंडल के 25वें तथा 26वें सूक्तों के द्रष्टा थे।

अगस्त्य ऋषि महर्षि पुलस्त्य के पुत्र तथा विश्रवा के भाई थे। इनका जन्म काशी में हुआ था। वर्तमान में वह स्थान अगस्त्य कुंड के नाम से प्रसिद्ध है।

देवताओं के अनुरोध पर महर्षि अगस्त्य काशी से दक्षिणापथ की ओर गए। कुछ पुराणों में यह प्रसंग आया है कि उन दिनों विंध्याचल पर्वत बड़ी तेजी से बढ़ रहा था। इसलिए देवताओं ने महर्षि अगस्त्य से अनुरोध किया कि वे विंध्याचल पर्वत को आदेश दें कि वह बढ़ना बंद कर दे। इस पर अगस्त्य ऋषि काशी से दक्षिणापथ की ओर गए तथा मार्ग में जब उन्होंने विंध्याचल पर्वत को पार किया तो विंध्याचल से कहा कि जब तक मैं लौट कर न आऊं, तुम इसी प्रकार स्थिर रहना, अपना आकार मत बढ़ाना।

विंध्याचल पर्वत महर्षि अगस्त्य की महिमा के बारे में जानता था। उसे ज्ञात था कि ये वही महर्षि अगस्त्य हैं जिन्होंने एक बार समुद्र का पानी पीकर उदरस्थ कर लिया था ताकि देवगण समुद्र में छिपे हुए राक्षसों को देख सकें और उनका संहार कर सकें। इसलिए विंध्याचल ने महर्षि का आदेश स्वीकार कर लिया।

पूरे आलेख के लिए देखिए यह वी-ब्लॉग-

Related Articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Stay Connected

21,585FansLike
2,651FollowersFollow
0SubscribersSubscribe
- Advertisement -

Latest Articles