Wednesday, February 21, 2024
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4. हँसने का कोई अवसर हाथ से नहीं जाने देते थे वल्लभभाई

वल्लभभाई को बचपन से ही हंसने और विनोद करने की आदत पड़ गई। यह एक आश्चर्य ही था कि उन्हें अपने समय का सबसे सख्त व्यक्ति माना जाता था किंतु यह सख्त मिजाज का व्यक्ति मनोविनोद का कोई भी अवसर अपने हाथ से नहीं जाने देता था।

उनके इस विरोधाभासी स्वभाव को उनके ही दो वक्तव्यों में देखा जा सकता है। एक स्थान पर उन्होंने कहा- ‘आपकी अच्छाई आपके मार्ग में बाधक है, इसलिये अपनी आंखों को क्रोध से लाल होने दीजिये और अन्याय का मजबूत हाथों से सामना कीजिये।

‘ एक अन्य स्थान पर वल्लभभाई कहते हैं- ‘यदि हम हजारों की दौलत भी गंवा दें और हमारा जीवन बलिदान हो जाए, तो भी हमें मुस्कुराते रहना चाहिये और ईश्वर तथा सत्य में विश्वास रखकर प्रसन्न रहना चाहिये।’

सरदार अक्सर कहते थे कि बेशक कर्म पूजा है किंतु हास्य जीवन है जो कोई भी अपना जीवन बहुत गंभीरता से लेता है, उसे एक तुच्छ जीवन के लिये तैयार रहना चाहिये। जो कोई सुख और दुःख का समान रूप से स्वागत करता है, वास्तव में वही सबसे अच्छी तरह से जीता है।

Dr. Mohanlal Gupta
Dr. Mohanlal Gupta
Dr. Mohan Lal Gupta is a renowned historian from India. He has written more than 100 books on various subjects.

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