Wednesday, May 22, 2024
spot_img

27. गांधी दीवान के पुत्र थे किंतु वल्लभभाई किसान की गुदड़ी में पले थे

जब वल्लभभाई अहमदाबाद में जम गये तो विट्ठलभाई ने बम्बई में वकालात का काम बंद करके समाज सेवा का काम आरम्भ कर दिया। इससे दोनों परिवारों के पालन-पोषण की जिम्मेदारी वल्लभभाई पर आ गई। इस जिम्मेदारी को वल्लभभाई ने सहर्ष स्वीकार कर लिया। जनवरी 1915 में मोहनदास करमचंद गांधी दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटे। वह भी वल्लभभाई की तरह गुजराती थे।

वह भी वल्लभभाई की तरह वकील थे। उन्होंने भी वल्लभभाई की तरह लंदन से बैरिस्टर की परीक्षा उत्तीर्ण की थी। अंतर इतना था कि गांधी एक रियासत के दीवान के बेटे थे और पटेल एक किसान की गुदड़ी में पले थे। अंतर यह भी था कि गांधीजी दक्षिण अफ्रीका में वकालात करते थे किंतु वल्लभभाई भारत में।

अंतर यह भी था कि जहाँ दक्षिण अफ्रीका में अंग्रेज जाति ने गांधी का इतना अपमान किया था कि वे तिलमिलाकर भारत लौट आये थे, वहीं भारत के गोरे मजिस्ट्रेट, वल्लभभाई का सामना करने से घबराते थे इन सब कारणों से गांधी भारत में लौटकर वकालात की जगह राजनीति में सक्रिय हो गये।

उन दिनों पटेल के मन में गांधी के प्रति कोई विशेष स्थान नहीं था। एक बार जब पटेल के मित्र मावलंकर, गांधी का भाषण सुनने के लिये जा रहे थे तो पटेल ने उनसे कहा कि क्या करोगे गांधीजी का भाषण सुनकर ? वे तो अंग्रेजों को ब्रह्मचर्य का उपदेश देते हैं। भला भैंस को भागवत सुनाने का कोई लाभ हो सकता है ?

Related Articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Stay Connected

21,585FansLike
2,651FollowersFollow
0SubscribersSubscribe
- Advertisement -spot_img

Latest Articles

// disable viewing page source