Wednesday, February 21, 2024
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सामान्य ज्ञान प्रश्नोत्तरी: 5 महात्मा बुद्ध के धार्मिक विचार

1. प्रश्न: अष्टांग-पथ के तीन प्रधान अंग कौनसे हैं?

उत्तर: अष्टांग-पथ का अनुसरण करने से मनुष्य के भीतर शील, समाधि और प्रज्ञा का उदय होता है जो कि बुद्ध के अष्टांगिक मार्ग के तीन प्रधान अंग हैं।

2. बुद्ध के अनुसार प्रज्ञा क्या है?

उत्तर:  ‘प्रज्ञा’ पदार्थ ज्ञान है। प्रज्ञा का स्थान बौद्धिक स्थान से बहुत ऊँचा है।

3. प्रश्न: प्रज्ञा से क्या लाभ होता है?

उत्तर: प्रज्ञा से कामासव, भवासव और अविद्यासव का नाश होता है तथा यथार्थ ज्ञान उत्पन्न होता है।

4. प्रश्न: यथार्थ ज्ञान कब संभव है?

उत्तर: सदाचार से यथार्थ ज्ञान होता है। सदाचार के बिना ज्ञान की पूर्णता असम्भव है।

5. प्रश्न: प्रज्ञा का उदय कैसे होता है?

उत्तर: अखण्ड समाधि से ‘प्रज्ञा’ का उदय होता है।

इस प्रनोत्तरी का वीडियो देखें-

6. प्रश्न: महात्मा बुद्ध ने अपने अनुयाइयों को मन, वचन और कर्म से पवित्र रहने के लिए किन नियमों का पालन करने को कहा?

उत्तर: दसशील का।

7. प्रश्न: दसशील से क्या आशय है?

सदाचार के दस नियमों को दस शील कहते हैं।

8. प्रश्न: दश शील कौनसे हैं?

उत्तर – (1.) अहिंसा व्रत का पालन करना, (2.) सदा सत्य बोलना, (3.) अस्तेय अर्थात् चोरी न करना, (4.) अपरिग्रह अर्थात् वस्तुओं का संग्रह न करना, (5.) ब्रहाचर्य अर्थात् भोग विलास से दूर रहना, (6.) नृत्य का त्याग,  (7.) सुगन्धित पदार्थों का त्याग,  (8.) असमय में भोजन का त्याग, (9.) कोमल शय्या का त्याग, (10.) कामिनी एवं कंचन का त्याग।

9. प्रश्न: दस शील का पालन करना किनके लिए आवश्यक है?

उत्तर: दस शील के प्रथम पांच नियमों का पालन करना गृहस्थ, साधु तथा उपासकों आदि सबके लिए अनिवार्य है जबकि शेष पांच नियम केवल भिक्खुओं के लिए अनिवार्य हैं।

10. प्रश्न: बुद्ध के किन पांच नियमों की तुलना महावीर स्वामी के पाँच अणुव्रतों से की जाती है?

उत्तर: जिन नियमों का पालन करना गृहस्थ, साधु तथा उपासकों आदि सबके लिए अनिवार्य है, उनकी तुलना महावीर के पांच अणुव्रतों से की जाती है। ये नियम इस प्रकार हैं- (1.) अहिंसा (2.) सत्य (3.) अस्तेय (4.) अपरिग्रह (5.) ब्रहाचर्य।

11. प्रश्न: महात्मा बुद्ध श्रद्धा और तर्क में किस पर अधिक बल देते थे?

उत्तर: तर्क पर।

12. प्रश्न: वेदों में कही गई बातों के सम्बन्ध में बुद्ध के क्या विचार थे?

उत्तर: बुद्ध वेदों में कही गई बातों को अन्तिम सत्य के रूप में स्वीकार करने को तैयार नहीं थे।

13. प्रश्न: अंध विश्वासों के सम्बन्ध में बुद्ध का क्या विचार था?

उत्तर: बुद्ध का मानना था कि अन्धविश्वास से मानव बुद्धि कुण्ठित हो जाएगी।

14. प्रश्न: वेदों की प्रामाणिकता के सम्बन्ध में बुद्ध के क्या विचार थे?

उत्तर: बुद्ध वेदों की प्रमाणिकता में विश्वास नहीं रखते थे।

15. प्रश्न: बुद्ध को नास्तिक क्यों कहा जाता है?

उत्तर: क्योंकि महात्मा बुद्ध वेदों की प्रामाणिकता में विश्वास नहीं रखते थे।

16. प्रश्न: ईश्वर के सम्बन्ध में बुद्ध के क्या विचार थे?

उत्तर: बुद्ध ईश्वर को इस सृष्टि का निर्माता नहीं मानते थे।

17. बुद्ध ने ऐसा क्यों कहा- ‘जो लोग मुझे सर्वज्ञ मानते हैं, वे मेरी निन्दा करते है।’

उत्तर: महात्मा बुद्ध का कहना था कि मनुष्य की बुद्धि परीक्षात्मक होनी चाहिए। उसे किसी के कहे पर पूरा विश्वास न करके स्वयं बात और चीज को परखना चाहिए। इसीलिए उन्होंने कहा- ‘जो लोग मुझे सर्वज्ञ मानते हैं, वे मेरी निन्दा करते है।’

18. प्रश्न: आत्मा के सम्बन्ध में बुद्ध ने क्या कहा?

उत्तर: महात्मा बुद्ध जीवन भर इस विषय पर मौन रहे। उन्होंने न तो यह कहा कि आत्मा है और न यह कहा कि आत्मा नहीं है। उन्होंने आत्मा सम्बन्धी विषय पर विवाद करने से मना कर दिया। क्योंकि यदि वे यह कहते कि आत्मा है तो मनुष्य को स्वयं से आसक्ति हो जाती और उनकी दृष्टि में आसक्ति ही दुःख का मूल कारण थी। यदि वे यह कहते कि आत्मा नहीं है तो मनुष्य यह सोचकर दुःखी हो जाता कि मृत्यु के बाद मेरा कुछ भी शेष नहीं रहेगा। अतः उन्होंने इस विवाद में पड़ना उचित नहीं समझा।

19. प्रश्न: क्या महात्मा बुद्ध कर्म-फल के सिद्धांत में विश्वास रखते थे?

उत्तर: महात्मा बुद्ध कर्म-फल के सिद्धांत में विश्वास रखते थे। उनका कहना था कि मनुष्य जैसा कर्म करता है उसे वैसा ही फल भोगना पड़ता है। मनुष्य का यह लोक और परलोक उसके कर्म पर निर्भर हैं।

20. प्रश्न: बुद्ध कर्म किसे मानते थे?

उत्तर: बुद्ध मनुष्यों की समस्त कायिक, वाचिक और मानसिक चेष्टाओं को कर्म मानते थे। उनका कहना था कि हमारे कर्म ही सुख-दुःख के दाता हैं। बुद्ध वैदिक कर्मकाण्ड को कर्म नहीं मानते थे।

21. प्रश्न: जाति के सम्बन्ध में बुद्ध के क्या विचार थे?

उत्तर: बुद्ध का कहना था कि मनुष्य की जाति मत पूछिए। निम्न जाति का व्यक्ति भी अच्छे कर्मों से ज्ञानवान और पापरहित मुनि हो सकता है और आचरणहीन ब्राह्मण, शूद्र हो सकता है।

22. प्रश्न: महात्मा बुद्ध ने नैतिक आदर्शवाद की स्थापना का कौनसा मार्ग दिखाया?

उत्तर: महात्मा बुद्ध ने अन्तःशुद्धि और सम्यक् कर्मों पर जोर देकर समाज में नैतिक आदर्शवाद स्थापित करने पर जोर दिया।

23. प्रश्न: क्या महात्मा बुद्ध पुनर्जन्म में विश्वास करते थे?

उत्तर: बुद्ध कर्मवादी थे तथा उनकी मान्यता थी कि कर्मों के अनुसार मनुष्य अच्छा या बुरा जन्म पाता है।

24. प्रश्न: बुद्ध ने आत्मा के अस्तित्त्व के विषय में कुछ नहीं कहा। अतः बुद्ध की दृष्टि में कर्मों का फल कौन भोगता है? पुनर्जन्म किसका होता है?

उत्तर: महात्मा बुद्ध के अनुसार यह पुनर्जन्म आत्मा का नहीं अपितु अहंकार का होता है।

25. प्रश्न: बुद्ध की दृष्टि में मनुष्य पुनर्जन्म के चक्र से कब मुक्त होता है?

उत्तर: बुद्ध के अनुसार जब मनुष्य की तृष्णाएँ एवं वासनाएँ नष्ट हो जाती हैं तब वह पुनर्जन्म के चक्र से मुक्त हो जाता है।

26. प्रश्न: क्या महात्मा बुद्ध कार्य-कारण सम्बन्ध में विश्वास करते थे?

उत्तर: वेदों की तरह महात्मा बुद्ध भी संसार की प्रत्येक वस्तु और घटना के पीछे किसी न किसी कारण का होना मानते थे। उनका कहना था कि प्रत्येक घटना अथवा स्थिति के कारणों को समझकर ही उससे मुक्ति पाने का उपाय किया जा सकता है।

27. प्रश्न: महात्मा बुद्ध के अनुसार संसार चक्र कैसे चलता है?

उत्तर: महात्मा बुद्ध का कहना था कि जन्म-मरण सकारण हैं। जन्म के कारण वृद्धावस्था एवं मृत्यु है। कार्य-कारण की शृंखला से यह संसार चलता रहता है। संसार को चलाने के लिए किसी सत्ता अथवा ईश्वर की आवश्यकता नहीं पड़ती।

28. प्रश्न: क्या महात्मा बुद्ध मोक्ष में विश्वास रखते थे?

उत्तर: बुद्ध ने मोक्ष के स्थान पर निब्बान अर्थात् निर्वाण में विश्वास जताया है। बौद्ध धर्म का अन्तिम लक्ष्य निर्वाण प्राप्त करना है जिसक अर्थ है ‘बुझना’। बुद्ध का कहना था कि मन में पैदा होने वाली तृष्णा या वासना की अग्नि को बुझा देने पर निर्वाण प्राप्त हो सकता है। यह निर्वाण इसी जन्म में तथा इसी लोक में प्राप्त किया जा सकता है।

29. प्रश्न: बुद्ध ने वैराग्य को निर्वाण का पथ क्यों कहा?

उत्तर: महात्मा बुद्ध का कहना था- हे भिक्षुओ! यह संसार अनादि है। तृष्णा से संचालित हुए प्राणी इसमें भटकते फिरते हैं। उनके आदि-अन्त का पता नहीं चलता। भव-चक्र में पड़ा हुआ प्राणी अनादि काल से बार-बार जन्म लेता और मरता आया है। तुम समस्त संस्कारों से निर्वेद प्राप्त करो, वैराग्य प्राप्त करो, मुक्ति प्राप्त करो।

30. बुद्ध ने आत्मावलम्बन के सम्बन्ध में क्या कहा?

उत्तर: गौतम बुद्ध ने आत्मावलम्बन को बड़ा महत्त्व दिया है जिसका अर्थ है किसी के आश्रित न होकर अपने आश्रित बनो।

-डॉ. मोहनलाल गुप्ता

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