Saturday, June 19, 2021

लाल किले की दर्द भरी दास्तां

इतिहास पुरुष

आधुनिक भारत का इतिहास

आधुनिक भारत का इतिहास, लेखक डॉ. मोहनलाल गुप्ता – अनुक्रमणिका

अध्याय भारत में यूरोपीय जातियों का आगमनयूरोपियन जातियों के आगमन का उद्देश्य, पुर्तगालियों का प्रवेश, डचों का प्रवेश, अंग्रेजों का आगमन, फ्रांसीसियों का आगमन।अंग्रेजों...

अध्याय – 1 : भारत में यूरोपीय जातियों का आगमन

सिकंदर के भारत में आने (523 ई.पू.) से भी बहुत पहले, रोम के एक शासक ने कहा था- 'भारतीयों के बागों में मोर, उनके...

अध्याय – 2 : अँग्रेजों के आगमन के समय भारत की राजनीतिक स्थिति – 1

अँग्रेज भारत में समुद्री मार्ग से 1608 ई. में आये। उस समय भारत में मुगल बादशाह जहाँगीर का शासन था। मुगलों की केन्द्रीय सत्ता...

साहित्य

बुढ़िया का चश्मा , (हिन्दी लघु नाटक)

प्रस्तावना बुढ़िया का चश्मा भारतीय राजनीति तथा भारत में फैले भ्रष्टाचार पर एक करारा व्यंग्य है। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद लोगों की आकांक्षाएं जिस प्रकार...

अश्वत्थामा के आँसू

हास्य व्यंग्य नाटिका भूमिका महाभारत का युद्ध हुए 5300 वर्ष से भी अधिक समय व्यतीत हो चुका है किंतु आज भी महाभारत की कथा का रोमांच...

प्रस्तावना

अकबर के राज्यारोहण के समय राजस्थान में ग्यारह रियासतें थीं जिनमें से मेवाड़, बांसवाड़ा, डूंगरपुर तथा प्रतापगढ़ पर गुहिल, जोधपुर एवं बीकानेर पर राठौड़,...
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मध्यकालीन भारत

अनुमणिका – दिल्ली सल्तनत की दर्द भरी दास्तान

1.            किताबें लिखे जाने से पहले पूरी दुनिया सनातन धर्म को मानती थी! 2.            अरब के रेगिस्तान में भी पूजे जाते थे भारतीय देवी-देवता! 3.            जेहाद...

प्राक्कथन – दिल्ली सल्तनत की दर्दभरी दास्तान

भारत आदिकाल से हिन्दुओं का देश है। सृष्टिकर्ता ने इस देश को प्राकृतिक सम्पदा, मेधा एवं संस्कृति की दृष्टि से अत्यंत समृद्ध बनाया है।...

अनुक्रमणिका – लाल किले की दर्द भरी दास्तान

1.दर-दर के भिखारी से करोड़पति बन गए बाबर और हुमायूं! 2.सपनों के पंख लगाकर धरती पर उतरा था लाल किला! 3.मुमताजमहल की औलादों से रौशन हो...

1. किताबें लिखे जाने से पहले पूरी दुनिया सनातन धर्म को मानती थी!

मध्यएशिया से आए तुर्की कबीलों ने ई.1192 से ई.1526 तक भारत के बहुत बड़े भूभाग पर शासन किया जिसे दिल्ली सल्तनत कहा जाता है।...

2. अरब के रेगिस्तान में भी पूजे जाते थे भारतीय देवी-देवता!

एशिया महाद्वीप के निम्न-मध्य-पूर्व भाग में स्थित एक प्रायद्वीप 'अरब' कहलाता है। इसके दक्षिण में अदन की खाड़ी, पश्चिम में लालसागर और पूर्व में...

विश्व-इतिहास

प्रस्तावना

अत्यंत प्राचीन काल से भारतीय ऋषि-मुनि मानव मात्र को सुखी बनाने के उद्देश्य से धरती के विभिन्न द्वीपों और दूरस्थ देशों की यात्रा करके...

अनुक्रमणिका

1. इण्डोनेशियाई द्वीपों के पौराणिक संदर्भ-  जावा द्वीप का प्रारम्भिक इतिहास, गुप्तकाल में जावा एवं अन्य ईस्ट-इण्डीज द्वीपों पर भारतीय राजाओं का प्रसार, जावा...

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महाराणा जवानसिंह द्वारा राष्ट्रीय राजनीति में प्रभावी भूमिका

16 मार्च 1828 को महाराणा भीमसिंह का निधन हो गया तथा जवानसिंह, मेवाड़ का महाराणा हुआ। महाराणा भीमसिंह के 50 वर्षों के दीर्घ शासनकाल...

राष्ट्रीय राजनीति में महाराणा स्वरूपसिंह की भूमिका

3 जून 1842 को महाराणा सरदारसिंह का निधन हुआ। उसके निःसंतान होने के कारण उसके छोटे भाई सरूपसिंह को मेवाड़ का महाराणा बनाया गया।...

महाराणा शंभुसिंह के काल की घटनाओं का राष्ट्रव्यापी प्रभाव

ई.1857 का विद्रोह समाप्त हो जाने के बाद भारत में अंग्रेजों की राजनीति में महत्त्वपूर्ण परिवर्तन आये। अंग्रेज राजनीतिज्ञों ने देशी राजाओं के महत्त्व...

महाराणा सज्जनसिंह का राष्ट्रीय राजनीति पर प्रभाव

16 जुलाई 1874 को महाराणा शम्भुसिंह का निधन हो गया। महाराणा के निःसंतान होने के कारण बागोर के महाराज शक्तिसिंह का 15 वर्षीय पुत्र...

महाराणा फतहसिंह का राष्ट्रीय राजनीति में प्रभाव – 1

23 दिसम्बर 1884 को महाराणा सज्जनसिंह का निधन हो गया। सज्जनसिंह के पुत्र नहीं होने के कारण, शिवरती के महाराज दलसिंह का तीसरा पुत्र...

महाराणा फतहसिंह का राष्ट्रीय राजनीति में प्रभाव -2

दिल्ली दरबार में महाराणा की अनुपस्थिति फरवरी 1903 में भारत के वायसराय लार्ड कर्जन ने एडवर्ड सप्तम् के राज्यारोहण के अवसर पर दिल्ली में भारतीय...

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