Saturday, June 19, 2021

आधुनिक भारत का इतिहास, लेखक डॉ. मोहनलाल गुप्ता – अनुक्रमणिका

अध्याय

  1. भारत में यूरोपीय जातियों का आगमन
    यूरोपियन जातियों के आगमन का उद्देश्य, पुर्तगालियों का प्रवेश, डचों का प्रवेश, अंग्रेजों का आगमन, फ्रांसीसियों का आगमन।
  2. अंग्रेजों के आगमन के समय भारत की राजनीतिक स्थिति
    कम्पनी द्वारा भारत में साम्राज्य स्थापित करने का स्वप्न, औरंगजेब के अयोग्य उत्तराधिकारी, नादिरशाह का आक्रमण, क्षेत्रीय राज्यों का उदय, हैदराबाद, बंगाल, बिहार और उड़ीसा, अवध, बड़ौदा, मालवा, पंजाब, राजपूताना, मैसूर, मराठे, अहमदशाह अब्दाली के आक्रमण, पानीपत का तीसरा युद्ध, युद्ध के परिणाम, अंग्रेज और फ्रांसीसी कम्पनियों की प्रतिस्पर्धा- कर्नाटक का प्रथम युद्ध, कर्नाटक का दूसरा युद्ध, कर्नाटक का तीसरा युद्ध।
  3. अंग्रेजों के आगमन के समय भारत की आर्थिक स्थिति
    भू-स्वामित्व, भूमि की श्रेणियाँ और किस्म, कृषि का तरीका और फसलें, किसानों की स्थिति, शिल्प तथा उद्योग, व्यापार एवं वाणिज्य, आन्तरिक व्यापार, माल परिवहन के साधन, सड़कों पर सुरक्षा, चुंगी, व्यापार का स्वरूप, विदेशी व्यापार, समुद्री मार्ग द्वारा व्यापार, स्थल मार्ग द्वारा व्यापार, व्यापार संतुलन, उद्योगों की स्थिति- कपड़ा उद्योग, रेशम वस्त्र उद्योग, लौह उद्योग, मिट्टी के बर्तन एवं मूर्तियां, विविध उद्योग।
  4. बंगाल में ब्रिटिश प्रभुसत्ता का विस्तार
    ईस्ट इण्डिया कम्पनी की स्थापना तथा भारत में प्रवेश, बंगाल मंे ईस्ट इण्डिया कम्पनी की गतिविधियाँ, अठारहवीं शताब्दी में बंगाल की स्थिति, सिराजुद्दौला का अंग्रेजों से संघर्ष, सिराजुद्दौला तथा ईस्ट इण्डिया कम्पनी के बीच झगड़े के कारण, नवाब द्वारा ईस्ट इण्डिया कम्पनी के विरुद्ध सैनिक कार्यवाही, क्लाइव की नियुक्ति, कलकत्ता की पराजय, अलीनगर की सन्धि (1757 ई.), प्लासी का युद्ध (1757 ई.), सिराजुद्दौला के विरुद्ध षड्यंत्र, मीर जाफर तथा उसके साथियों की गद्दारी, प्लासी के युद्ध का महत्त्व, मीर जाफर और अंग्रेज, अलीगौहर का आक्रमण, डचों पर आक्रमण (बेदरा का युद्ध), बंगाल में प्रशासनिक अव्यवस्था, मीर जाफर को हटाया जाना, मीर कासिम, मीर कासिम की समस्याएँ, समस्याओं के निराकरण के प्रयास, अंग्रेजों के साथ झगड़ा, बक्सर का युद्ध (1764 ई.) मीर कासिम की पराजय, मीर जाफर को पुनः नवाबी, बंगाल में अराजकता, शुजाउद्दौला की गद्दारी, शुजाउद्दौला तथा मीर कासिम की पराजय, बक्सर युद्ध का महत्त्व, क्लाइव की दूसरी गवर्नरी (जून 1765 से जनवरी 1767 तक), इलाहाबाद की संधि का मूल्यांकन, बंगाल में द्वैध शासन की स्थापना, द्वैध शासन प्रणाली की स्थापना के कारण एवं परिणाम, रॉबर्ट क्लाइव की सफलताओं एवं कार्यों का मूल्यांकन, वेरेलस्ट तथा कार्टियर, वारेन हेस्टिंग्ज।
  5. आंग्ल मराठा युद्ध और मराठों का पतन
    अंग्रेजों की मराठा नीति, आंग्ल-मराठा सम्बन्ध, सूरत की सन्धि, प्रथम आंग्ल-मराठा संघर्ष, पुरन्दर की संधि, बड़गांव की संधि, सालबाई की सन्धि, पिट्स इण्डिया एक्ट, अहस्तक्षेप की नीति, मराठों में परस्पर संघर्ष, बसीन की संधि, द्वितीय आँग्ल-मराठ युद्ध, देवगढ़ की संधि, सुर्जीअर्जन की संधि, होल्कर से युद्ध, लॉर्ड कार्नवालिस से लॉर्ड मिण्टो तक, लॉर्ड हेस्ंिटग्ज व तृतीय मराठा युद्ध, पूना की संधि, पेशवा की किर्की पराजय, अप्पा साहब भौंसले की पराजय, होल्कर की पराजय, पेशवा के पद की समाप्ति, तृतीय मराठा युद्ध का महत्त्व, मराठों के पतन के कारण।
  6. भारत में ब्रिटिश शासन की स्थापना और विस्तार के कारण
    भारत में अंग्रेजी शासन की स्थापना एक आश्चर्यजनक घटना थी, भारत में ब्रिटिश राज्य की स्थापना एक संयोग थी, भारत में ब्रिटिश राज्य की स्थापना सोची समझी नीति का हिस्सा थी, अँग्रेजी शासन की स्थापना भारतीयों की कमजोरी का परिणाम थी, भारत में साम्राज्य विस्तार की ब्रिटिश नीतियाँ, प्रथम चरण- बाड़बंदी, दूसरा चरण- सहायक समझौते, तीसरा चरण- अधीनस्थ सहयोग, भारत में ब्रिटिश शासन की स्थापना, क्लाइव का योगदान, वारेन हेस्टिंग्ज का योगदान, अहस्तक्षेप की नीति से साम्राज्य विस्तार को आघात, मार्क्विस वेलेजली तथा उसकी सहायक संधियाँ, अहस्तक्षेप की नीति का परित्याग, सहायक सन्धि प्रथा का जन्म, सहायक सन्धि की शर्तें, सहायक सन्धि प्रथा की समीक्षा, देशी राज्यों से की गई सहायक सन्धियों की क्रियान्विती, वेलेजली की सफलताओं का मूल्यांकन, पुनः अहस्तक्षेप की नीति की ओर, लॉर्ड हेस्टिंग्ज द्वारा अहस्तक्षेप की नीति का त्याग, हेस्टिंग्ज की नीति का मूल्यांकन, मैसूर तथा कछार का अँग्रेजी राज्य में विलय, चार्टर एक्ट 1833 ई., सिंध का ब्रिटिश क्षेत्र में विलय, पंजाब पर अधिकार, डलहौजी द्वारा देशी राज्यों को हड़पने की नीति, गोद-निषेध नीति, व्यपगत का सिद्धांत, गोद निषेध नीति के अन्तर्गत विलीन किये गये राज्य, गोद-निषेध नीति की समीक्षा।
  7. जमींदारी, रैयतवाड़ी और महलवाड़ी व्यवस्थाएँ
    भू-राजस्व व्यवस्था की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, स्थायी बन्दोबस्त के पूर्व स्थिति, ईस्ट इण्डिया कम्पनी को बंगाल में दीवानी के अधिकार, भू-राजस्व वसूली के प्रमुख अधिकारी, कम्पनी द्वारा राजस्व वसूली व्यवस्था में परिवर्तन, कार्नवालिस के सुधार, स्थायी बंदोबस्त, स्थायी भू-प्रबन्ध की विशेषताएँ, स्थायी बन्दोबस्त के गुण और दोष, स्थायी बन्दोबस्त का कृषकों पर प्रभाव, रैयतवाड़ी बन्दोबस्त, बम्बई प्रेसीडेंसी में रैय्यतवाड़ी बन्दोबस्त, रैयतवाड़ी बन्दोबस्त का कृषकों पर प्रभाव, महलवाड़ी बन्दोबस्त, तीस वर्षीय बन्दोबस्त, ग्राम व्यवस्था, महलवाड़ी बन्दोबस्त का कृषकों पर प्रभाव।
  8. कृषि का वाणिज्यीकरण और उसका प्रभाव
    कृषि पर बढ़ता हुआ बोझ, कृषि उत्पादन में गिरावट, कृषि का वाणिज्यीकरण, नगदी फसलों की अवधारणा का विकास, वाणिज्यीकरण के प्रभाव।
  9. भारत से धन का निष्कासन
    ईस्ट इण्डिया कम्पनी एवं ब्रिटिश ताज द्वारा मचाई गई लूट, धन के बहिर्गमन का सिद्धांत, धन निष्कासन की मात्रा एवं स्वरूप, धन निष्कासन के परिणाम, धन निष्कासन के सम्बन्ध में राष्ट्रवादी नेताओं के विचार, धन निष्कासन के सम्बन्ध में विदेशी विद्वानों के विचार,
  10. कुटीर उद्योगों का पतन: कारण और प्रभाव
    अंग्रेजों के आगमन के समय भारतीय कुटीर उद्योग, भारतीय उद्योगों का वर्गीकरण, ग्रामीण उद्योगों की विशेषताएँ, नगरीय उद्योगों की विशेषताएँ, ईस्ट इण्डिया कम्पनी की कठिनाइयाँ, भारतीय कुटीर उद्योगों के विनाश के कारण, कुटीर उद्योगांे के पतन का प्रभाव, आधुनिक उद्योगों का विकास
  11. ब्रिटिश शासन में न्यायिक सुधार
    मुगलकालीन न्याय व्यवस्था का ह्रास, बंगाल में द्वैध शासन के अंतर्गत न्याय व्यवस्था, हेस्टिंग्ज द्वारा किये गये उपाय, दीवानी अदालतों की स्थापना, फौजदारी अदालतों की स्थापना, कलकत्ता में सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना, कार्नवालिस के न्यायिक सुधार, सर्किट अदालतें, कार्नवालिस कोड, लॉर्ड हेस्ंिटग्ज के न्यायिक सुधार, लॉर्ड विलियम बैंटिक के न्यायिक सुधार, विलियम बैंण्टिक के बाद न्यायिक सुधार, इलाहाबाद उच्च न्यायालय की स्थापना, संघीय न्यायालय की स्थापना,
  12. भारत में पश्चिमी शिक्षा का प्रसार
    प्राचीन भारतीय शिक्षा पद्धति, मध्यकाल में शिक्षा, ईसाई मिशनरियों द्वारा आरंभिक शैक्षणिक कार्य, पुर्तगाली मिशनरियों के प्रयास, नीदरलैण्ड वासियों के प्रयास, फ्रांस वासियों के प्रयास, डेनमार्क वासियों के प्रयास, ईस्ट इण्डिया कम्पनी के आरम्भिक शैक्षणिक कार्य, ईसाई धर्म और पश्चिमी शिक्षा का जुड़ाव, पाश्चात्य शिक्षा के विकास का प्रथम चरण, 1833 ई. का चार्टर एक्ट, लॉर्ड मैकाले के विचार, लॉर्ड मैकाले की देन, तकनीकी शिक्षा, शिक्षा के क्षेत्र में निजी प्रयास, पाश्चात्य शिक्षा के विकास का दूसरा चरण, वुड का घोषणा पत्र, पाश्चात्य शिक्षा के विकास का तीसरा चरण, हण्टर आयोग की नियुक्ति एव सुझाव, हण्टर आयोग की रिपोर्ट के बाद भारत में शैक्षणिक प्रगति, हण्टर शिक्षा आयोग की अनुशंसाओं का मूल्यांकन, पाश्चात्य शिक्षा के विकास का चतुर्थ चरण, विश्वविद्यालय अधिनियम की आलोचना, 1913 ई. का प्रस्ताव, सैडलर आयोग 1917, पाश्चात्य शिक्षा के विकास का पांचवा चरण, द्वैध शासन के अंतर्गत शिक्षा, द्वितीय विश्वयुद्ध के समय भारतीय शिक्षा।
  13. भारत में समाज सुधार एवं धर्म सुधार आन्दोलन
    सामाजिक एवं धार्मिक आंदोलनों के प्रमुख कारण, उग्र एवं कट्टर समाज सुधारक, राजा राममोहन राय और ब्रह्म समाज, युवा बंगाल आन्दोलन, केशवचन्द्र सेन और भारतीय ब्रह्म समाज, साधारण ब्रह्म समाज, डॉ. आत्माराम पाण्डुरंग और प्रार्थना समाज, स्वामी दयानन्द सरस्वती और आर्य समाज, आर्य समाज के नियम, थियोसॉफिकल सोसायटी, श्रीमती एनीबीसेण्ट का भारत आगमन एवं उनके द्वारा हिन्दू धर्म की सेवा, स्वामी विवेकानन्द और रामकृष्ण मिशन, रामकृष्ण की शिक्षाएँ, रामकृष्ण परमंहस की देन, स्वामी विवेकानन्द, शिकागो सर्व-धर्म-सम्मेलन, स्वामी विवेकानन्द के आदर्श कार्य, मुस्लिम सुधार आन्दोलन, वहाबी आंदोलन, अलीगढ़ आन्दोलन, देवबंद शाखा, अन्य सुधार आन्दोलन, ज्योति बा फुले और सत्य शोधक समाज, राधास्वामी सत्संग, पारसी समाज में सुधार आंदोलन, सिक्ख समाज में सुधार आंदोलन, ईसाई समाज में सुधार आंदोलन, सामाजिक-धार्मिक आन्दोलनों का परिणाम।
  14. भारत में प्रेस का विकास
    ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, भारत में छापाखाने का प्रारम्भ, बोल्ट्स के प्रयास, भारत में समाचार पत्रों का उदय एवं सरकारी प्रतिबन्ध, समाचार पत्रों के भारतीय प्रयास, कलकत्ता का पहला दैनिक समाचार पत्र- कलकत्ता जर्नल, राजा राममोहन राय का योगदान, एडम का प्रेस नियन्त्रण, बैण्टिक के समय में पत्रकारिता, चार्ल्स मैटकाफ की उदार नीति, महाराष्ट्र की पत्रकारिता, 19वीं शताब्दी के पूर्वार्द्ध में पत्रकारिता के उद्देश्य, 19वीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में पत्रकारिता के उद्देश्य, लॉर्ड केनिंग द्वारा बनाये गये कानून, प्रसिद्ध समाचार पत्रों का आरम्भ, हिन्दू पैट्रियट का योगदान, अमृत बाजार पत्रिका का योगदान, अन्य प्रांतों मेें पत्रकारिता का विकास, लॉर्ड लिटन का वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट, वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट निरस्त, बंगाली का योगदान, महाराष्ट्र में पत्रकारिता का विकास, उन्नीसवीं सदी के अन्त में समाचार पत्र।
  15. अँग्रेजी शासन की पहली शताब्दी में हुए विद्रोह
    गंगा घाटी तथा दोआब के विद्रोह, सन्यासी विद्रोह, मद्रास और बम्बई प्रेसीडेन्सियों के विद्रोह, राजपूताना के विद्रोह, मिदनापुर एवं तराई क्षेत्र के विद्रोह, ब्रह्मपुत्र घाटी के विद्रोह, हाथीखेड़ा का विद्रोह, अहोम विद्रोह, खासी विद्रोह, तमिल के कल्लारों के विद्रोह, पायकों के विद्रोह, मुक्तादारों के विद्रोह, विभिन्न आर्थिक कारणों से हुए विद्रोह, साम्प्रदायिक कारणों से विद्रोह, धार्मिक एवं सामाजिक कारणों से हुए विद्रोह।
  16. उन्नीसवीं सदी में किसान आन्दोलन
    भारत में किसान आन्दोलन के कारण, भारत के प्रमुख किसाना आंदोलन, बंगाल के कृषक विद्रोह, मराठा किसानों का विद्रोह, पंजाब का कूका आन्दोलन, पंजाब के किसानों के विद्रोह, पबना के किसानों का विद्रोह, असम में किसानों का विद्रोह, मोपला किसानों का विद्रोह, पूना और अहमदनगर जिलों में आन्दोलन।
  17. आदिवासियों के विद्रोह
    भीलों के विद्रोह, हो आदिवासियों का विद्रोह, कोल विद्रोह, संथालों का विद्रोह, नाईक दासों का विद्रोह, मुण्डा जाति का विद्रोह, कोली जाति का विद्रोह, कुम्बियों का विद्रोह, रामासियों के विद्रोह, रंपा विद्रोह, गौंड विद्रोह।
  18. 1857 की गौरवमय क्रांति
    1857 से पूर्व के सैनिक विद्रोह, लॉर्ड केनिंग की आशंका, भारतीय इतिहास की गौरवमयी घटना, 1857 की क्रांति के कारण, क्रांति की घटनाएँ एवं प्रसार, क्रांति की योजना, क्रांति का प्रचार, बैरकपुर में क्रांति का विस्फोट, अवध में सैनिक क्रांति, मेरठ में सैनिक क्रांति, दिल्ली पर अधिकार, राजपूताना में सैनिक क्रांति की चिन्गारी, नसीराबाद में सैनिकों का विद्रोह, नीमच में सैनिक क्रांति, आउवा में क्रांति, कोटा में क्रांति, मेवाड़ में क्रांति, झाँसी में क्रान्ति, कानपुर और बिठुर की क्रान्ति, बिहार में क्रान्ति, दक्षिण भारत में क्रांति की चिन्गारी, अँग्रेजों द्वारा क्रांति का दमन, दिल्ली में कत्लेआम, भारत के अन्य भागों में कत्लेआम, राजपूताने की सेवाएं, तात्या टोपे का दमन, अंतिम क्रांतिकारी की रिइाई, क्रांति का स्वरूप, 1857 की क्रांति की असफलता के कारण, 1857 की सशस्त्र क्रांति के परिणाम।
  19. कांग्रेस की स्थापना से पहले भारत में राजनीतिक संगठनों का उदय
    बंगाल प्रेसीडेंसी में राजनीतिक संगठनों का उदय, लैंड होल्डर्स सोसायटी, पेट्रियाटिक एसोसिएशन, देशहितैषिणी सभा, बंगाल ब्रिटिश इंडिया सोसायटी, ब्रिटिश इण्डियन एसोसिएशन, इंडियन लीग, इंडियन एसोसिएशन, बम्बई प्रेसीडेंसी में राजनीतिक संगठनों का उदय, बॉम्बे एसोसिएशन, पूना एसोसिएशन, पूना सार्वजनिक सभा, मद्रास प्रेसीडेंसी में राजनीतिक संगठनों का उदय, मद्रास नेटिव एसोसिएशन, मद्रास महाजनसभा, इंडियन नेशनल कॉन्फ्रेस।
  20. भारत में राजनीतिक जन-जागरण के कारण
  21. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना
    ए. ओ. ह्यूम और कांग्रेस की स्थापना, कांग्रेस की स्थापना के उद्देश्य, कांग्रेस की स्थापना के कारण, कांग्रेस का स्वरूप, कांग्रेस का विभिन्न क्षेत्रों पर प्रभाव।
  22. उदारवादी नेतृत्व (नरमपंथी कांग्रेस)
    उदारवादी युग, उदारवादी नेतृत्व की विशेषताएँ, उदारवादियों की मांगें, उदारवादियों की रणनीति, उदारवादियों के प्रति सरकार की नीति, कांग्रेस के प्रति ब्रिटिश सरकार की नीति में परिवर्तन के कारण, उदारवादियों की उपलब्धियाँ, उदारवादी नेतृत्व की आलोचना, उदारवादी आंदोलन का मूल्यांकन।
  23. उग्र राष्ट्रवादी आंदोलन (गरमपंथी कांग्रेस)
    उग्र राष्ट्रवादियों का उदय, उग्रवाद की उत्पति के कारण, राष्ट्रीय स्तर पर घटित घटनाएँ, अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर घटित घटनाएँ, बंग-भंग आन्दोलन, उदारवादियों और उग्रवादियों के अलग-अलग रास्ते, सूरत की फूट, सूरत की फूट का परिणाम, उग्रवादियों की कार्यशैली, उग्र राष्ट्रवाद की मुख्य विशेषताएँ, उदारवाद तथा उग्र राष्ट्रवाद में अन्तर, उदारवाद तथा उग्र राष्ट्रवाद में समानताएँ, उग्रवादी आन्दोलन का मूल्यांकन।
  24. क्रान्तिकारी आन्दोलन
    क्रान्तिकारी आन्दोलन का उद्भव, क्रान्तिकारी आन्दोलन के उदय के कारण, क्रांतिकारी आन्दोलन के उद्देश्य, क्रांतिकारियों की कार्यप्रणाली, क्रांतिकारी आन्दोलन का विकास, बंगाल, महाराष्ट्र, पंजाब, दिल्ली, संयुक्त प्रदेश, आगरा व अवध, बिहार और उड़ीसा, मद्रास में क्रांतिकारी गतिविधियाँ, विदेशों में क्रांतिकारी आन्दोलन, श्यामजी कृष्ण वर्मा, विनायक दामोदर सावरकर, रेवाभाई राना और श्रीमती कामा, गदर पार्टी और इण्डिया लीग, प्रथम विश्वयुद्ध के बाद क्रांतिकारी आन्दोलन, काकोरी षड़यंत्र केस, लालाजी की हत्या, नौजवान सभा, पूर्वी बंगाल, पेशवार, उत्तर-पूर्वी सीमान्त क्षेत्र में क्रांतिकारी गतिविधियाँ, जल सेना और वायु सेना में विद्रोह, क्रांतिकारी आन्दोलन की असफलता के कारण, राष्ट्रीय आन्दोलन में क्रांतिकारियों का योगदान।
  25. भारतीय राजनीति में गांधीजी का पदार्पण और उनके द्वारा चलाये गये आन्दोलन
    जन्म और शिक्षा, दक्षिण अफ्रीका में संघर्ष, भारत में वापसी, असहयोग आन्दोलन, रोलेट एक्ट, जलियाँवाला बाग हत्या काण्ड, खिलाफत आन्दोलन, असहयोग आन्दोलन और उसकी प्रगति, नागपुर अधिवेशन, आन्दोलन की प्रगति, आन्दोलन का स्थगित किया जाना, आन्दोलन की असफलता के कारण, आन्दोलन का महत्त्व, असहयोग आन्दोलन के बाद भारतीय राजनीति, स्वराज्य दल, साइमन कमीशन, नेहरू रिपोर्ट, पूर्ण स्वाधीनता का प्रस्ताव, सविनय अवज्ञा आन्दोलन, सविनय अवज्ञा आन्दोलन के विभिन्न चरण, दाण्डी कूच, प्रथम गोलमेज सम्मेलन, गांधी इरविन पैक्ट, द्वितीय गोलमेज सम्मेलन, सविनय अवज्ञा आन्दोलन का दूसरा चरण, सविनय अवज्ञा आन्दोलन का महत्त्व और प्रभाव, सविनय अवज्ञा आन्दोलन के प्रति अन्य संगठनों का रुख, तृतीय गोलमेज सम्मेलन, भारत छोड़ो आन्दोलन से पूर्व की राजनीतिक परिस्थितियाँ, भारत छोड़ो आन्दोलन, भारत छोड़ो प्रस्ताव, सरकार की दमन नीति, आन्दोलन का स्वरूप, क्या यह कांग्रेस का आंदोलन था?, अन्य दलों का आन्दोलन के प्रति रवैया, आन्देालन का महत्त्व और परिणाम, आन्दोलन की असफलता के कारण।
  26. उग्र वामपंथी आन्दोलन
    कांग्रेस समाजवादी दल की स्थापना, नीतियां एवं लक्ष्य, दल के कार्यक्रम, दल के प्रति कांग्रेसी नेतृत्व का रुख, कांग्रेस समाजवादी दल की उपलब्धियाँ, कांग्रेस समाजवादी दल का विघटन, भारत में साम्यवाद का उदय एवं विकास, साम्यवादियों की प्रारंभिक प्रवृत्तियां, भारत में साम्यवादी समूह, कानुपर षड़यंत्र केस, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की स्थापना, भारत की कम्युनिस्ट पार्टी की स्थापना, कम्युनिस्ट पार्टी की गतिविधियां, मजदूर-किसान पार्टियों का गठन, अखिल भारतीय मजदूर-किसान पार्टी की स्थापना, मेरठ षड़यन्त्र केस, कम्युनिस्ट पार्टी का नया कार्यक्रम, सविनय अवज्ञा आन्दोलन और कम्यूनस्टि पार्टी, सरकार द्वारा कम्युनिस्ट आंदोलन को कुचलने के प्रयास, संयुक्त मोर्चे का गठन, अन्य कम्युनिस्ट संस्थाओं की स्थापना, संयुक्त मोर्चे का पतन, द्वितीय विश्वयुद्ध और कम्युनिस्ट पार्टी, भारत छोड़ो आन्दोलन और कम्युनिस्ट पार्टी, युद्ध के बाद की घटनाएं, सुभाष चन्द्र बोस और फॉरवर्ड ब्लॉक, अन्य वामपंथी पार्टियां, भारतीय क्रांतिकारी साम्यवादी दल, क्रांतिकारी समाजवादी दल, भारतीय बोलशेविक पार्टी।
  27. मजदूर, किसान आन्दोलन और दलित वर्ग के आन्दोलन
    भारत में औद्योगिक क्रांति, औद्योगिक मजदूरों की संख्या में वृद्धि, मजदूर वर्ग की दुर्दशा, मजदूर वर्ग के असन्तोष के प्रारम्भिक संकेत, श्रमिक संघों का उदय, हड़तालों का जुझारूपन, प्रथम विश्वयुद्ध का प्रभाव, ट्रेड यूनियनवाद का उदय, मजूर-महाजन संघ की स्थापना, अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस, विश्वव्यापी मंदी का प्रभाव, संघर्ष की तैयारी, ट्रेड यूनियन कांग्रेस में साम्यवादियों का प्रवेश, अखिल भारतीय मजदूर एवं किसान पार्टी, हड़तालों की धूम, मेरठ षडयन्त्र केस, ट्रेड यूनियन कांग्रेस में दरार, विभिन्न ट्रेड यूनियनों का एकीकरण, भारतीय राष्ट्रीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस का जन्म, गांधी युग के किसान आन्दोलन, चम्पारन का सत्याग्रह, खेड़ा सत्याग्रह आन्दोलन, संयुक्त प्रदेश में किसान आन्देालन, बारदौली सत्याग्रह आन्दोलन, स्वतन्त्र किसान संगठनों का निर्माण, ते भागा (तिभागा) आन्दोलन, तेलंगाना किसान आन्दोलन, बर्ली आन्दोलन, राजस्थान में किसान आन्दोलन, दलित वर्ग आन्दोलन, निर्योग्यताएँ दूर करने का प्रयास, आधुनिक काल में दलितोत्थान के लिये किये गये प्रयास, ईसाई मिशनरियों के प्रयास, गाँधी के अछूतोद्धार कार्य, डॉ. भीमराव अम्बेडकर के प्रयास, स्वतंत्रता-प्राप्ति के बाद समाज-सुधार के कार्य, दलितोद्धार कार्यक्रमों का भावी स्वरूप।
  28. भारत सरकार अधिनियम 1919 और 1935
    भारत सरकार अधिनियम-1919 (मांटेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार), अधिनियम को पारित करने के कारण, मांटेग्यू-चेम्सफोर्ड रिपोर्ट, भारत सरकार अधिनियम-1919, गृह सरकार, भारत सचिव, भारत परिषद्, हाई कमिश्नर, केन्द्रीय सरकार, गवर्नर-जनरल और उसकी कार्यकारिणी, केन्द्रीय व्यवस्थापिका, विधान सभा, राज्य सभा, विधान मण्डल का कार्यक्षेत्र, शक्ति तथा राजस्व विभाजन, प्रान्तीय शासन व्यवस्था, द्वैध शासन प्रणाली, प्रान्तीय कार्यपालिका, प्रान्तीय विधान मण्डल, द्वैध शासन के दोष और उसकी असफलता के कारण, संसदीय कार्यप्रणाली के लिये मील का पत्थर, भारत सरकार अधिनियम-1935, अधिनियम की मुख्य विशेषताएं, अधिनियम की आलोचना।
  29. भारत में साम्प्रदायिक राजनीति का विकास
    साम्प्रदायिकता का अर्थ, साम्प्रदायिक समस्या का अर्थ, भारत में साम्प्रदायिकता की समस्या का स्वरूप, साम्प्रदायिकता के उदय के कारण, भारतीय राजनीति में साम्प्रदायिकता का विकास।
  30. सुभाषचन्द्रबोस और भारतीय राष्ट्रीय सेना
    प्रारम्भिक जीवन, राजनीति में प्रवेश, गांधी से मतभेद, फॉरवर्ड ब्लाक की स्थापना, वीर सावरकर से भेंट, सुभाषचंद्र बोस की गिरफ्तारी, नजरबन्दी से पलायन, हिटलर से भेंट, सुभाषचंद्र बोस की लिबरेशन आर्मी, रासबिहारी बोस की भारतीय राष्ट्रीय सेना, रास बिहारी बोस की अपील, सुभाष चंद्र बोस का दक्षिण-पूर्वेशिया में आगमन, भारतीयों के लिये मर्मस्पर्शी संदेश, लोकप्रिय नारों का निर्माण, अस्थायी भारत सरकार का गठन, सुभाष द्वारा आजाद हिन्द फौज का पुनर्गठन, दक्षिण पूर्वेशियाई देशों के प्रवासी भारतीयों के प्रयास, युद्ध के मोर्चे पर, सुभाष चंद्र बोस के अन्तिम दिन, आजाद हिन्द फौज की सफलताओं का मूल्यांकन, सुभाष के अन्तिम दिन, क्या सुभाष फासिस्ट थे? सुभाषचंद्र बोस राष्ट्रवादी थे।
  31. भारत की स्वतंत्रता एवं विभाजन
    भारत को स्वतंत्रता देने के कारण, भारत की स्वतंत्रता की प्रक्रिया, प्रधानमंत्री एटली की घोषणा, ब्रिटेन में विरोध, लार्ड माउण्टबेटन की नियुक्ति, ब्रिटिश सरकार की नीति, कांग्रेस में भारत विभाजन के प्रति सहमति, गांधीजी का रुख, मौलाना अबुल कलाम आजाद का रुख, माउण्टबेटन द्वारा जिन्ना को समझाने का प्रयास, भारत विभाजन का प्रस्ताव अथवा माउण्टबेटन योजना, औपनिवेशिक स्वतंत्रता का प्रस्ताव, औपनिवेशिक स्वतंत्रता को नेहरू की स्वीकृति, माउण्टबेटन योजना को स्वीकृति, 2 जून की बैठक, स्वतंत्रता की तिथि की घोषणा, कांग्रेस अधिवेशन में भारत विभाजन प्रस्ताव को स्वीकृति, भारत विभाजन के लिए उत्तरदायी परिस्थितियाँ, भारत के विभाजन की प्रक्रिया, भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947, फौज का विभाजन, विभाजन कौंसिल का गठन, कर्मचारियों के लिये विशेष रेल, संविधान सभा को संसद का दर्जा, दो वैकल्पिक सरकारें, पंजाब बाउंड्री फोर्स का गठन, रैडक्लिफ आयोग का गठन एवं उसकी रिपोर्ट के प्रकाशन में विलम्ब, पाकिस्तान का निर्माण, यूनियन जैक का अवतरण, ब्रिटिश सम्राट का अंतिम संदेश देने से इंकार, स्वतंत्रता दिवस समारोह, गवर्नर जनरल की नियुक्ति, ब्रिटिश अधिकारियों की विदाई।
  32. भारतीय राज्यों का भारत में विलय तथा कश्मीर, जूनागढ़ एवं हैदराबाद की समस्या
    कांग्रेस और देशी राजाओं में मतभेद, प्रधानमंत्री एटली की घोषणा, देशी राज्यों के शासकों की प्रतिक्रिया, रजवाड़ों की स्थिति पर विचार, भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947, स्वतन्त्रता के समय देशी राज्यों की स्थिति, अँग्रेज रेजीडेंटों की बैठक, देशी राज्यों की मंशा, जिन्ना का षड़यंत्र, भोपाल नवाब का षड़यंत्र, धौलपुर के राजराणा षड़यंत्र में सम्मिलित, कोरफील्ड के दुष्प्रयास, सरदार पटेल और देशी राज्य, भारत संघ में विलय की प्रक्रिया, राजाओं को माउण्टबेटन की सलाह, प्रविष्ठ संलेख प्रारूप को स्वीकृति, राजाओं के विशेषाधिकारों की संवैधानिक गारण्टी, शासकों द्वारा प्रविष्ठ संलेख पर हस्ताक्षर, जूनागढ़ की समस्या, हैदराबाद की समस्या, जम्मू-कश्मीर की समस्या, देशी रियासतों मंे प्रजातन्त्रीय व्यवस्था, राजाओं के नष्ट होने के कारण।
  33. परिशिष्ट – 1
    भारत में ब्रिटिश शासन के सर्वोच्च अधिकारी- बंगाल के गवर्नर, बंगाल के गवर्नर जनरल, भारत के गवर्नर जनरल, भारत के गवर्नर जनरल एवं वायसराय, गवर्नर जनरल एवं क्राउन रिप्रजेण्टेटिव, स्वतंत्र भारत के गवर्नर जनरल।

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